व्यंग्य हास्य व्यंग्य : षष्टिपूर्ति बनाम शोक सभा

हास्य व्यंग्य : षष्टिपूर्ति बनाम शोक सभा

– पं. सुरेश नीरव और साहब बेचारे प्रेमीजी आखिर बाकायदा सठिया ही गए। मतलब ये हुआ कि जीवन के पूरे साठ पतझड़ झेलकर भी वे…

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प्रवक्ता न्यूज़ वेब पत्रकारिता : पहचान की जरूरत नहीं- संजय कुमार

वेब पत्रकारिता : पहचान की जरूरत नहीं- संजय कुमार

सूचना और संचार क्रांति के दौर में आज प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के बीच वेब पत्रकारिता का चलन तेजी से बढ़ा है और अपनी पहचान…

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राजनीति ओबामा की भाषा में छिपी परमाणु सच्चाई

ओबामा की भाषा में छिपी परमाणु सच्चाई

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के तीन दिन के दौरे का समापन हो चुका है। उन्हें और हमें जो कहना था उसे संयुक्त विज्ञप्ति में…

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धर्म-अध्यात्म लक्ष्मी-गणेश या विक्टोरिया-पंचम

लक्ष्मी-गणेश या विक्टोरिया-पंचम

सोने-चांदी के सिक्के और दीपावली पूजन -लोकेन्‍द्र सिंह राजपूत भारत का सबसे बड़ा त्योहार है दीपावली। हर कोई देवी लक्ष्मी को प्रसन्न कर उनका स्नेह…

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राजनीति शाबाश ओबामा, पहले दिन ही दस अरब डालर का बिजनेस

शाबाश ओबामा, पहले दिन ही दस अरब डालर का बिजनेस

अपने भारत दौरे के पहले दिन ही बराक ओबामा दस अऱब डालर का बिजनेस कर गए। बेशक भारत को कुछ न मिले। पर भारत ओबामा…

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राजनीति हम भ्रष्टन के, भ्रष्ट हमारे !!!

हम भ्रष्टन के, भ्रष्ट हमारे !!!

हमारी लालचें क्या हमें संवेदना से मुक्त कर चुकी हैं ? -संजय द्विवेदी देश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी जो महात्मा गांधी से भी…

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राजनीति प्रधानमंत्री जी, यही तो हैं ‘बड़ी मछलियां’

प्रधानमंत्री जी, यही तो हैं ‘बड़ी मछलियां’

गत दिनों कांग्रेस कार्य समिति का अखिल भारतीय अधिवेशन नई दिल्ली में संपन्न हुआ। इस अधिवेशन पर जहां कांग्रेसजनों की निगाहें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी…

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राजनीति दिल जीतने की कला है ओबामा का नाच

दिल जीतने की कला है ओबामा का नाच

बराक ओबामा भारत आए हैं तो उन्होंने आम लोगों में उम्मीदें जगा दी हैं। बराक ओबामा की जो चीज सबसे ज्यादा अपील कर रही है…

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कविता बैठ कुऐं की मुंडेर पे

बैठ कुऐं की मुंडेर पे

सहेली आ बैठ मेरे पास मनं की दो बातें कर लूँ फीर भर के घड़ा पानी का अपने घर को चल दूँ सहेली आ बैठ…

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व्यंग्य हास्य-व्यंग्य : माल बनाम इज्जत – इज्जत बनाम माल

हास्य-व्यंग्य : माल बनाम इज्जत – इज्जत बनाम माल

एक समय था हमारे देश में, जब लोग इज्जतदार हुआ करते थे। आजकल लोग मालदार होते हैं। इज्जत उन्हें बतौर गिफ्ट-हैंपर माल के साथ फ्री…

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विविधा अक्टूबर क्रांति की लेनिन के संदर्भों में एक आधुनिक समीक्षा

अक्टूबर क्रांति की लेनिन के संदर्भों में एक आधुनिक समीक्षा

वामपंथ में शब्दों का विशेष महत्व है । अपने आंदोलन की शुरुआत से ही कम्युनिस्टों को नारों की ताकत का अंदाजा था । मानवीय विचारों…

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राजनीति कांग्रेस की नापाक चालों के विरूद्ध संघ का आंदोलन 10 नवम्बर से

कांग्रेस की नापाक चालों के विरूद्ध संघ का आंदोलन 10 नवम्बर से

विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी, समाजसेवी, सामाजिक व सांस्कृतिक संगठन आरएसएस द्वारा इसी 10 नवम्बर को भारतभर के सभी जिला केन्द्रो पर केन्द्र सरकार द्वारा उसके…

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