विश्ववार्ता बर्बर पूंजीवाद का मॉडल है रूस-चीन का

बर्बर पूंजीवाद का मॉडल है रूस-चीन का

-जगदीश्‍वर चतुर्वेदी सोवियत संघ और चीन का समाजवाद से पूंजीवाद में रूपान्तरण हो चुका है। आज रूस और चीन बदल गए हैं। वे वैसे नहीं…

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विविधा दम घोंटती व्यवस्था

दम घोंटती व्यवस्था

-अतुल तारे यूनियन कार्बाइड से 2 दिसम्बर 1984 की रात में जिस जहरीली गैस का रिसाव हुआ, वह आज भी दम घोट रही है। बल्कि…

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राजनीति नक्सली और उनके बौद्धिक मददगार

नक्सली और उनके बौद्धिक मददगार

-डॉ. मयंक चतुर्वेदी देश में जिस तेजी से नक्सली मौत का ताण्डव कर रहे हैं, उतनी ही द्रुतगति से उनको भारत में रहने वाला एक…

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धर्म-अध्यात्म गायत्री जयंती महानता अपनाने का महान पर्व

गायत्री जयंती महानता अपनाने का महान पर्व

-गौरीशंकर शर्मा गायत्री को देवमाता, ज्ञान की गंगोत्री, संस्कृति की जननी एवं आत्मबल अधिष्ठात्री कहा जाता है। सृष्टि के आदि में ब्रह्माजी इसी शक्ति की…

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स्‍वास्‍थ्‍य-योग स्वास्थ्य के मानकों पर लड़ाई हारते आदिवासी

स्वास्थ्य के मानकों पर लड़ाई हारते आदिवासी

-राखी रघुवंशी खुली अर्थव्यवस्था, बाजारवाद और नव उपभोक्तावाद की चकाचौंध में कई मूलभूत समस्याएं सरकारी फाइलों में, नेताओं के झूठे वादों में और समाज के…

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राजनीति संघ परिवार का अतीतपंथी एजेण्डा

संघ परिवार का अतीतपंथी एजेण्डा

-जगदीश्‍वर चतुर्वेदी आरएसएस ने कभी भी भारत के स्वतंत्र होने पर खुशी नहीं मनाई,उलटे आजादी का मखौल उडाया है,आजादी की जंग में भाग लेने वालों…

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राजनीति ये है दिल्ली मेरी जान/अंतत: अर्जुन ने चला ही दिया ब्रम्हास्त्र

ये है दिल्ली मेरी जान/अंतत: अर्जुन ने चला ही दिया ब्रम्हास्त्र

-लिमटी खरे भोपाल गैस कांड के वक्त मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कुंवर अर्जुन सिह जो कि पिछले दो सालों से निर्वासित जीवन जी रहे…

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विविधा डॉ. श्‍यामाप्रसाद मुखर्जी और वर्तमान कश्मीर

डॉ. श्‍यामाप्रसाद मुखर्जी और वर्तमान कश्मीर

डॉ. मुखर्जी बलिदान दिवस(23 जून) पर विशेष -पंकज झा क्या आप किसी और ऐसे देश के ऐसे भूभाग को जानते हैं जहां दो प्रधान, दो…

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राजनीति साम्यवादी भूलों के आंगन के पार मार्क्सवाद

साम्यवादी भूलों के आंगन के पार मार्क्सवाद

-जगदीश्‍वर चतुर्वेदी एक जमाना था भारत में कहावत थी कि मास्को में सर्दी पड़ती है तो कॉमरेड को दिल्ली में जुकाम होता है। भारत में…

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विविधा शौचालय कम, मोबाइल ज्यादा

शौचालय कम, मोबाइल ज्यादा

-अतुल तारे क्या यह आंकडा भारत सरकार की आंखे खोल देने के लिए पर्याप्त नहीं है कि भारत में शौचालय से ज्यादा मोबाइल हैं? संयुक्त…

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धर्म-अध्यात्म मर्दों को तनख्वाह देकर बतौर शौहर रख रही हैं अरब की महिलाएं

मर्दों को तनख्वाह देकर बतौर शौहर रख रही हैं अरब की महिलाएं

-फ़िरदौस ख़ान यह बात सुनने में ज़रूर अजीब लगे, मगर है सोलह आने सच. हालांकि सऊदी अरब इस्लाम, तेल के कुंओं, अय्याश शेखों और जंगली…

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राजनीति वर्गीय एकता के पक्ष में

वर्गीय एकता के पक्ष में

-अरुण माहेश्वरी ‘तद्भव’ पत्रिका के ताजा अंक में पी.सी.जोशी का लेख है ‘विस्थापन की पीड़ा’। ज्योति बसु के साथ उनके संस्मरणों पर आधारित लेख। ज्योति…

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