आर्थिकी पिछले एक दशक में भारत ने पूरे विश्व को प्रभावित किया है

पिछले एक दशक में भारत ने पूरे विश्व को प्रभावित किया है

भारत का प्राचीन इतिहास गौरवशाली रहा है। भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था, क्योंकि उस खंडकाल में भारत के ग्रामीण इलाकों में नागरिक सम्पन्न थे एवं हंसी खुशी अपना जीवन यापन कर रहे थे। एक ब्रिटिश अर्थशास्त्री एवं इतिहासकार श्री एंगस मेडिसन ने अपने शोधग्रंथ में बताया है कि एक ईसवी से लेकर 1750 ईसवी तक के खंडकाल में विश्व व्यापार में भारत की भागीदारी 32 से 46 प्रतिशत के बीच तक रही है। भारत से हो रहे विभिन्न कृषि एवं औद्योगिक उत्पादों के निर्यात का भुगतान सोने में किया जाता था अतः भारत में स्वर्ण का अपार भंडार निर्मित हो गया था। इसलिए, भारत को सोने की चिड़िया कहा जाने लगा था। परंतु, अरब आक्रांताओं एवं ब्रिटिश शासकों ने भारत को जमकर लूटा था और भारत को अति पिछड़ा एवं अति गरीब देश बनाकर छोड़ा। आज इतिहास ने पुनः एक नई करवट ली है और भारत अपने पुराने वैभव को प्राप्त करने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।  किसी भी देश की आर्थिक प्रगति में शासन द्वारा बनाई गई नीतियों का विशेष प्रभाव रहता है। पिछले 10 वर्षों के खंडकाल में भारत न केवल आर्थिक क्षेत्र बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनैतिक क्षेत्रों में भी मजबूत हुआ है और भारत ने पूरे विश्व में अपनी धाक जमाई है। आज भारतीय मूल के लगभग 3.20 करोड़ लोग विश्व के अन्य देशों में निवास कर रहे हैं। भारतीय मूल के इन नागरिकों ने भारतीय सनातन संस्कृति का पालन करते हुए इन देशों के स्थानीय नागरिकों को भी प्रभावित किया है जिससे विदेशी नागरिक भी अब सनातन संस्कृति की ओर आकर्षित होने लगे हैं। विशेष रूप से विकसित देशों में तो सामाजिक तानाबाना इतना अधिक छिन्न भिन्न हो चुका है कि अब ये देश आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक समस्याओं के हल हेतु भारत की ओर आशाभारी नजरों से देख रहे हैं। भारत ने वर्ष 1947 में राजनैतिक स्वतंत्रता प्राप्त की थी और आज यदि पिछले 77 वर्षों के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में भारत के विकास की बात करें तो ध्यान में आता है कि भारत ने पूरे विश्व में अपने लिए विशेष रूप से आर्थिक, अंतरिक्ष, विज्ञान, रक्षा-सुरक्षा, डिजिटल, योग एवं आध्यात्म जैसे क्षेत्रों में अपना एक अलग मुकाम बना लिया है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में आज भारत एक वैश्विक ताकत बनाकर उभरा है। भारत आज न केवल अपने लिए सेटेलाईट अंतरिक्ष में भेज रहा है बल्कि विश्व के कई अन्य देशों के लिए भी सेटेलाईट अंतरिक्ष में स्थापित करने में सक्षम हो गया है। योग एवं आध्यात्म के क्षेत्र में तो भारत अनादि काल से विश्व गुरु रहा ही है, परंतु हाल ही के समय में भारत एक बार पुनः योग एवं आध्यात्म के क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन करने की ओर अग्रसर है। योग को सिखाने के लिए तो यूनाइटेड नेशन्स ने प्रति वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस मनाने का निर्णय लिया है और इसे पूरे विश्व में लगभग सभी देशों द्वारा बहुत ही उत्साह से मनाया जाता है। इसी प्रकार विज्ञान के क्षेत्र में भी भारत ने पूरे विश्व में अपना एक अलग मुकाम बना लिया है। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी, तकनीकी, डिजिटल एवं ड्रोन तकनीकी में तो भारत ने अपना लोहा पूरे विश्व में ही मनवा लिया है। किसी भी देश के लिए आर्थिक प्रगति तभी सफल मानी जानी चाहिए जब उस देश के अंतिम पंक्ति में खड़े नागरिक को भी उस देश की आर्थिक प्रगति का लाभ मिलता दिखाई दे। इस दृष्टि से विशेष रूप से गरीबी एवं आय की असमानता को कम करने में भारत ने विशेष सफलता पाई है। जिसकी अंतरराष्ट्रीय मुद्रकोष एवं विश्व बैंक ने भी जमकर सराहना की है। भारत में वर्ष 1947 में 70 प्रतिशत लोग गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे थे, और अब वर्ष 2020 में देश की कुल आबादी का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहा है। जबकि 1947 में देश की आबादी 35 करोड़ थी जो आज बढ़कर लगभग 140 करोड़ हो गई है। वर्ष 2011 में भारत में गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे व्यक्तियों की संख्या 22.5 प्रतिशत थी जो वर्ष 2019 में घटकर 10.2 प्रतिशत पर नीचे आ गई है। भारत के शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों की संख्या बहुत तेज गति से कम हुई है। जहां ग्रामीण इलाकों में गरीबों की संख्या  वर्ष 2011 के 26.3 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2019 में 11.6 प्रतिशत पर आ गई है तो शहरी क्षेत्रों में यह संख्या 7.9 प्रतिशत से कम हुई है। बहुत छोटी जोत वाले किसानों की वास्तविक आय में 2013 और 2019 के बीच वार्षिक 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है वहीं अधिक बड़ी जोत वाले किसानों की वास्तविक आय में केवल 2 प्रतिशत की वृद्धि प्रतिवर्ष दर्ज हुई है। भारत में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे लोगों की संख्या में आ रही भारी कमी दरअसल केंद्र सरकार द्वारा समय समय उठाए जा रहे कई उपायों के चलते सम्भव हो पाई है। आज भारत डिजिटल इंडिया के माध्यम से क्रांतिकारी परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। पिछले 10 वर्षों के दौरान भारत ने डिजिटलीकरण के क्षेत्र में अतुलनीय प्रगति की है एवं आज भारत में 120 करोड़ से अधिक इंटरनेट, 114 करोड़ से अधिक मोबाइल एवं 65 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता हैं। इस प्रकार भारत ने एक नए डिजिटल युग में प्रवेश कर लिया है। भारत में सार्वजनिक अधोसंरचना विकसित कर ली गई है ताकि देश के सभी नागरिक इन सुविधाओं का लाभ ले सकें। यूनीफाईड पेमेंट इंटरफेस (UPI) इसका सबसे अच्छा उदाहरण है, जिसके माध्यम से आज प्रतिदिन 100 करोड़ से अधिक बैंकिंग व्यवहार हो रहे हैं। आधार कार्यक्रम की सफलता के बाद तो डिजिटल इंडिया एक नए दौर में चला गया है। शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी डिजिटल इंडिया ने कमाल ही कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाई गई है। अब तो ड्रोन के लिए भी नए डिजिटल प्लेटफार्म का उपयोग हो रहा है एवं ड्रोन के माध्यम से कृषि को किस प्रकार सहयोग किया जा सकता है इस पर भी कार्य हो रहा है। ड्रोन के माध्यम से बीजों का छिड़काव आदि जैसे कार्य किए जाने लगे हैं।  भारत ने पिछले 10 वर्षों के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी सबसे तेज वृद्धि दर्ज की है। वर्ष 2014 से भारत ने सौर ऊर्जा में 18 गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की है, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा में 1.97 गुना वृद्धि दर्ज की है। भारत ने अपने लिए वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पन्न करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी प्रकार भारत ने आगामी 8 वर्षों में अपनी स्थापित बिजली का 40 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन से प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, आगामी 8 वर्षों में भारत में सौर और पावन ऊर्जा की संयुक्त स्थापित क्षमता 51 प्रतिशत हो जाएगी, जो अभी 23 प्रतिशत है।  भारत ने रक्षा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता हासिल करने की ओर अपने कदम बढ़ा लिए हैं एवं कई रक्षा उत्पादों का तो निर्यात भी किया जा रहा है। अभी हाल ही में भारत का स्वदेशी निर्मित तेजस हल्का लड़ाकू विमान मलेशिया की पहली पसंद बनाकर उभरा है। मलेशिया ने अपने पुराने लड़ाकू विमानों के बेड़े को बदलने के लिए प्रतिस्पर्धा की थी। जिसमें चीन के जेएफ-17, दक्षिण कोरिया के एफए-50 और रूस के मिग-35 के साथ साथ याक-130 से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद मलेशिया ने भारतीय विमान तेजस को पसंद किया है। आकाश मिसाइल भी भारत की पहचान है एवं यह एक स्वदेशी (96 प्रतिशत) मिसाइल है। दक्षिणपूर्व एशियाई देश वियतनाम, इंडोनेशिया, और फिलिपींस के अलावा बहरीन, केन्या, सउदी अरब, मिस्र, अल्जीरिया और संयुक्त अरब अमीरात ने आकाश मिसाइल को खरीदने में अपनी रुचि दिखाई है। आकाश मिसाइल के साथ ही कई अन्य देशों ने तटीय निगरानी प्रणाली, राडार और एयर प्लेटफार्मों को खरीदने में भी अपनी रुचि दिखाई है। भारत जल्द ही दुनिया के कई देशों यथा फिलीपींस, वियतनाम एवं इंडोनेशिया आदि को ब्रह्मोस मिसाइल भी निर्यात करने की तैयारी कर रहा है। कुछ अन्य देशों जैसे सउदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात एवं दक्षिण अफ्रीका आदि ने भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में अपनी रुचि दिखाई है। आज भारत से 84 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात किया जा रहा है।  इस सूची में कतर, लेबनान, इराक, इक्वाडोर और जापान जैसे देश भी शामिल हैं जिन्हें भारत द्वारा बॉडी प्रोटेक्टिंग उपकरण, आदि निर्यात किए जा रहे हैं। कृषि क्षेत्र, रक्षा उत्पादों, फार्मा, नवीकरण ऊर्जा, डिजिटल व्यवस्था के साथ ही प्रौद्योगिकी, सूचना तकनीकी, आटोमोबाईल, मोबाइल उत्पादन, बुनियादी क्षेत्रों का विकास, स्टार्ट अप्स, ड्रोन, हरित ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में भी  भारत अपने आप को तेजी से वैश्विक स्तर पर एक लीडर के रूप में स्थापित करने की ओर अग्रसर हो गया है। इस प्रकार आर्थिक प्रगति के बल पर भारत एक बार पुनः अपने आप को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने जा रहा है।  प्रहलाद सबनानी 

Read more
राजनीति जज़िया कर: कर्नाटक कांग्रेस सरकार का उपहार

जज़िया कर: कर्नाटक कांग्रेस सरकार का उपहार

प्रवीण गुगनानी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि के भव्य निर्माण से आनंदित हिंदुओं के उत्साह, उल्लास, उमंग को समाप्त करने के प्रयास हो रहे हैं! राममंदिर…

Read more
कविता माँझी

माँझी

ले चल कश्तीबान उस पारहै दरिया एक आधारसमंदर की तरंगे रहे पुकारले चल कश्तीबान उस पारबीच समंदर में लगता त्रास बार-बारखेता चल कश्ती मेरे यारबारिश…

Read more
प्रवक्ता न्यूज़ वेद के सार्वभौम सिद्धांतों को अपनाने से ही विश्व शांति संभव : डॉ. आर्य

वेद के सार्वभौम सिद्धांतों को अपनाने से ही विश्व शांति संभव : डॉ. आर्य

मॉरीशस। वेद के सार्वभौम सिद्धांतों को अपनाने से ही विश्व शांति संभव है। सृष्टि के प्रारंभ में परमपिता परमेश्वर ने वेद का ज्ञान अग्नि, वायु…

Read more
यात्रा वृत्तांत लघु भारत की झांकी पेश करता मॉरीशस

लघु भारत की झांकी पेश करता मॉरीशस

पिछले दिनों 9 फरवरी से 14 फरवरी तक मॉरीशस प्रवास का अवसर उपलब्ध हुआ। मॉरीशस के दिल में भारत बसता है या भारत के दिल…

Read more
लेख रविदासजी एक सिद्ध एवं अलौकिक समाज-सुधारक संत थे

रविदासजी एक सिद्ध एवं अलौकिक समाज-सुधारक संत थे

संत गुरु रविदास जयन्ती- 24 फरवरी, 2024 के उपलक्ष्य में– ललित गर्ग –जब भारतीय समाज और धर्म का स्वरूप रूढ़ियों एवं आडम्बरों में जकड़ा एवं…

Read more
राजनीति समृद्धि के शिखर एवं गरीबी के गड्ढ़े वाली दुनिया

समृद्धि के शिखर एवं गरीबी के गड्ढ़े वाली दुनिया

– ललित गर्ग – वैश्विक संस्था ऑक्सफैम ने अपनी आर्थिक असमानता रिपोर्ट में समृद्धि के नाम पर पनप रहे नये नजरिया, विसंगतिपूर्ण आर्थिक संरचना एवं…

Read more
राजनीति संदेशखाली का संदेश और तृणमूल का ‘शाहजहाँ’ 

संदेशखाली का संदेश और तृणमूल का ‘शाहजहाँ’ 

– कुलदीप चन्द अग्निहोत्री पश्चिमी बंगाल के एक ग्राम नंदी ग्राम को उस गाँव के लोगों के सिवा कोई नहीं जानता था । लेकिन सारी…

Read more
राजनीति  संदेशखाली: ममता की नफ़रत का प्रतीक 

 संदेशखाली: ममता की नफ़रत का प्रतीक 

प्रवीण गुगनानी     दो बंगाली लोकोक्तियाँ हैं – थेलाई ना पोरले बेरल गाछे ओथे ना -अर्थात् आपकी समस्याओं  से पार पाने हेतु आपको उस समस्या का सामना…

Read more
यात्रा वृत्तांत ’’जैतो मोर्चा’’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का स्वर्णिम इतिहास

’’जैतो मोर्चा’’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का स्वर्णिम इतिहास

’जैतो मोर्चा’ गंगसर साहिब सिक्खों द्वारा अहिंसात्मक पूर्ण एवं शांतिपूर्ण किये गये भारतीय स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन का स्वर्णिम इतिहास है। 21 फरवरी 2024 को जैतो…

Read more
राजनीति संदेशखाली जैसी घटनाओं का पश्चिम बंगाल की आर्थिक प्रगति पर हो रहा है विपरीत प्रभाव

संदेशखाली जैसी घटनाओं का पश्चिम बंगाल की आर्थिक प्रगति पर हो रहा है विपरीत प्रभाव

किसी भी देश में आर्थिक प्रगति को गति देने के लिए उस देश में सामाजिक शांति बनाए रखना अति आवश्यक है। यही शर्त किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति के सम्बंध में भी लागू होती है। भारत का पश्चिम बंगाल राज्य कुछ वर्ष पूर्व तक भारत में सबसे तेज गति से आर्थिक प्रगति कर रहे राज्यों के बीच अग्रिम पंक्ति में रहता आया है। परंतु, हाल ही के वर्षों में पश्चिम बंगाल में शांति भंग होती दिखाई दे रही है, इसका प्रभाव स्पष्टत: इस राज्य के आर्थिक विकास पर भी विपरीत रूप से पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।     विशेष रूप से पिछले कुछ वर्षों से पश्चिम बंगाल में सामाजिक ताना बाना छिन्न भिन्न होता दिखाई दे रहा है। पूरे राज्य में अराजकता का माहौल बन गया है, विशेष रूप से सनातन संस्कृति का पालन करने वाले बंगाल के शांति प्रिय नागरिकों पर असामाजिक तत्वों द्वारा लगातार हमले किए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर हाल ही के समय में पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों जैसे संदेशखाली इलाके में महिलाओं पर अत्याचार आम बात हो गई है।  संदेशखाली, पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले का एक छोटा कस्बा है। यह बांग्लादेश की सीमा से सटा सीमावर्ती क्षेत्र भी है, जहां हिंदू अनुसूचित जातियों की आबादी बहुलता में है। संदेशखाली, पश्चिम बंगाल की उन 14 विधानसभा की सीटों में शामिल हैं जो कि भारत बांग्लादेश सीमा से सटीं हुई हैं। दुर्भाग्य से संदेशखाली सहित यह सभी विधानसभा सीटें अतिवादी संगठनों द्वारा समर्थित सुनियोजित षड्यंत्र का एक हिस्सा बन गई हैं। इन 14 सीमावर्ती विधान सभा क्षेत्रों में बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ उल्लेखनीय रूप से बढ़ रही है। यहां  की जनसांख्यिकी बदलने की साजिश का षड्यंत्र भी उच्च स्तर पर हो रहा है। वास्तव में, यह क्षेत्र पाकिस्तानी खुफिया एजेन्सी ISI की आतंकी गतिविधियों के अलावा तमाम आपराधिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में भी विकसित हो रहा है। कुछ समय पहले तक संदेशखाली में मुस्लिम जनसंख्या नहीं के बराबर थी, लेकिन अवैध घुसपैठ के चलते यहां असामाजिक तत्वों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह इलाका जनसांख्यिकी परिवर्तन की चपेट में आ गया है। इसमें सबसे बड़ी आबादी अब रोहिगियाई मुसलमानों की हो गई है।  गौर करने वाली बात है कि विगत चुनावों के दौरान घटित सभी आपराधिक घटनाओं में अधिकतर अपराधी असामाजिक तत्व मुस्लमान ही पाए गए थे। यह मामले गौ-तस्करी से लेकर मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े रहे हैं। इस तरह के सभी गैरकानूनी मामलों में मुस्लिम ही अभियुक्त पाए जाते हैं। संदेशखाली में जो कुछ सामने आया है अथवा आ रहा है, यह कोई पहली बार घटित हुई वारदातें नहीं है। हिंदू महिलाओं के साथ गैंग रेप की एक नहीं बल्कि सैकड़ों घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जिसके खिलाफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  के कार्यकर्ताओं ने जब भी आवाज उठायी हैं तो परिणाम में उन्हें ही निशाना बनाना शुरू कर दिया गया है। न सिर्फ संघ के कार्यकर्ताओं की हत्या की गई है बल्कि उनके घरों को भी जला दिया गया है। इस क्षेत्र में हिंदू अनुसूचित जाति की महिलाओं एवं नाबालिग़ लड़कियों को इस इलाके के दबंग घुसपैठिए अपनी हवस का शिकार बनाने के उद्देश्य से जबरन उठा ले जाते हैं। इस क्षेत्र में तस्करी – मादक पदार्थ, हथियार, गोमांस आदि अपराधों में संलिप्त शेख शहंशाह जैसे मुस्लिम दबंगों का बोलबाला है। हाल ही में शेख शहंशाह के ठिकानों पर छापेमारी के लिए गई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पर उसके गुर्गों द्वारा हिंसक हमला भी किया गया था। इस हमले में ED के कई अधिकारी गम्भीर रूप से घायल हुए थे । इस इलाके में नौकरी/रोजगार, विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ देने की आड़ में भी अनेक महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया है।  पश्चिम बंगाल के विशेष इलाके संदेशखाली में घटित उक्त घटनाओं का वर्णन केवल उदाहरण के तौर पर किया गया है। वरना, पूरे पश्चिम बंगाल में ही आज अराजकता का माहौल है जो पश्चिम बंगाल की आर्थिक प्रगति को विपरीत रूप में प्रभावित कर रहा है।  लगभग 1960 के दशक तक पश्चिमी बंगाल की औसत प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय स्तर पर औसत प्रति व्यक्ति आय से अधिक हुआ करती थी। पश्चिम बंगाल, भारत के प्रथम तीन सबसे अधिक धनी राज्यों में शामिल था। पहिले दो राज्य थे – महाराष्ट्र एवं गुजरात। 1980 का दशक आते आते पश्चिम बंगाल की औसत प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय स्तर पर औसत प्रति व्यक्ति आय के लगभग बराबर तक नीचे आ गई थी। 1990 के दशक में राष्ट्रीय स्तर पर औसत प्रति व्यक्ति आय पश्चिम बंगाल की तुलना में तेज गति से आगे बढ़ने लगी और पश्चिम बंगाल का स्थान देश में 7वें स्थान पर आ गया। वर्ष 2000 में और भी नीचे गिरकर 10वें स्थान पर आ गया एवं वर्ष 2011 में यह 11वें स्थान पर आ गया। यह गिरावट आज भी जारी है और आज पश्चिम बंगाल औसत प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश में 14वें स्थान पर आ गया है।   इसी प्रकार, वर्ष 1993-94 एवं 1999-2000 के बीच पश्चिम बंगाल में औसत प्रति व्यक्ति आय में 5.5 प्रतिशत की वृद्धि अर्जित की गई थी जबकि भारत का राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत 4.6 प्रतिशत था। अगली दशाब्दी में पश्चिम बंगाल में औसत प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि दर गिरकर 4.9 प्रतिशत रह गई जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गया। वर्ष 2011-12 से लेकर वर्ष 2019-20 के दौरान पश्चिम बंगाल में औसत प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि दर और भी नीचे गिरकर 4.2 प्रतिशत हो गई जबकि राष्ट्रीय स्तर पर औसत 5.2 प्रतिशत रहा। इस प्रकार पश्चिम बंगाल एवं राष्ट्रीय स्तर पर औसत प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि दर में यह अंतर और भी बढ़ता ही जा रहा है। यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि 1990 के दशक में पश्चिम बंगाल में विकास दर राष्ट्रीय स्तर पर औसत विकास दर से अधिक थी। परंतु, वामपंथी दलों के शासनकाल में पश्चिम बंगाल में विकास दर राष्ट्रीय औसत से कम हो गई थी। पश्चिम बंगाल पर स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से लगातार कांग्रेस, वामपंथी दलों और तृणमूल कांग्रेस का शासन रहा है। विशेष रूप से वामपंथी दलों एवं तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल के दौरान पश्चिम बंगाल की आर्थिक प्रगति विपरीत रूप से प्रभावित होती रही है।       वर्ष 2022 में पश्चिम बंगाल में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद 157,254 रुपए था जबकि विश्व बैंक द्वारा जारी किए गए अनुमानों के अनुसार भारत में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद का राष्ट्रीय औसत 2411 अमेरिकी डॉलर था। यदि 80 रुपए प्रति डॉलर की दर पर अमेरिकी डॉलर को रुपए में बदला जाए तो यह राशि लगभग 164,000 रुपए प्रति व्यक्ति रहती है, जो पश्चिम बंगाल में प्रति व्यक्ति औसत से कहीं अधिक है। जबकि पश्चिम बंगाल किसी समय पर भारत के समस्त राज्यों के बीच सबसे तेज गति से आर्थिक प्रगति करता हुआ राज्य रहा है। यह देश की आर्थिक राजधानी भी माना जाता रहा है। आज आर्थिक प्रगति के मामले में पश्चिम बंगाल की स्थिति दिनोदिन बिगड़ती जा रही है। यह सब पश्चिम बंगाल में छिन्न भिन्न हो रहे सामाजिक ताने बाने के चलते एवं उपरोक्त वर्णित संदेशखाली जैसी घटनाओं में हो रही वृद्धि के चलते हो रहा है।  प्रहलाद सबनानी 

Read more
राजनीति मोदी के तीसरे कार्यकाल की सुखद आहट

मोदी के तीसरे कार्यकाल की सुखद आहट

– ललित गर्ग- वर्ष 2024 के आम चुनाव सन्निकट हैं। भारतीय जनता पार्टी ऐतिहासिक एवं धमाकेदार जीत के प्रति आश्वस्त है। एक बार फिर प्रधानमंत्री…

Read more