लेख कभी वज्र थी किसान की छाती, अब कमजोर क्यों ?

कभी वज्र थी किसान की छाती, अब कमजोर क्यों ?

कृषि कल्याण आयोग गठित कर किसान को दी जा सकती है सुरक्षा –          आत्माराम यादव पीव भारत के किसान को देश का…

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लेख पतई वाले बाबा संत रामस्वरूप महाराज ने बांद्राभान को बनाया है तपस्थली 

पतई वाले बाबा संत रामस्वरूप महाराज ने बांद्राभान को बनाया है तपस्थली 

              भारत संत-महात्मा और सिद्धों का देश है। देश में संत ही है जो मानव जीवन में निराशा के…

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लेख राम मंदिर: सियासी मंच या आस्था का उत्सव  

राम मंदिर: सियासी मंच या आस्था का उत्सव  

राजनीति अपनी जगह है लेकिन राम मंदिर करोडों भारतीयों के लिए आस्था का विषय है। राजनीति कैसे साधारण विषयों को भी उलझाकर मुद्दे में तब्दील…

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शख्सियत श्रीराम के अदभुत अर्चक-फ़ादर कामिल बुल्के

श्रीराम के अदभुत अर्चक-फ़ादर कामिल बुल्के

प्रो. श्याम सुंदर भाटिया बेल्जियम में जन्मे फ़ादर कामिल बुल्के की जग-विख्यात विशेषता यह है, वे रामकथा के मर्मज्ञ, हिंदी के विद्वान और विलायत में…

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लेख नर्मदा क्षेत्र के उदारमना महंत दौलत दास जी ग्वाल

नर्मदा क्षेत्र के उदारमना महंत दौलत दास जी ग्वाल

आत्‍माराम यादव पीव                 नर्मदापुरम  नगर के ग्वालटोली में निवासरत हीरालाल बानिये के घर दौलतराम जी का जन्म…

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राजनीति नये भारत की पुलिस में बड़े बदलाव जरूरी

नये भारत की पुलिस में बड़े बदलाव जरूरी

-ललित गर्ग- पुलिस की भक्षक छवि आजादी के अमृतकाल की सबसे बड़ी विडम्बना एवं त्रासदी है, पुलिस की रक्षक छवि कैसे स्थापित हो, वे खलनायक…

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राजनीति घरेलू पर्यटन प्रोत्साहन से मालदीप क्यों बौखलाया?

घरेलू पर्यटन प्रोत्साहन से मालदीप क्यों बौखलाया?

-ललित गर्ग- नववर्ष पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लक्षद्वीप की यात्रा पर क्या गये, चीन की कटपुतली बने मालदीव को मिर्ची लग गयी। वहां की नई…

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राजनीति पांव पांव वाले भैया से,मुख्यमंत्री तक का सफर

पांव पांव वाले भैया से,मुख्यमंत्री तक का सफर

अराजनीतिक तरीके से राजनीति करने वाला एक नेता जिसने मध्यप्रदेश के रंग रूप को बदल दिया।खस्ताहाल सड़कों को सरसराती हुई सड़कों में,कम उपज वाले खेतों…

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कविता अनुबाद

अनुबाद

जीवन  मृत्यु में अनुबाद होता है धीरे-धीरे,  बेहद धीरे-धीरे l पिता से  पुत्र का अनुवाद पुत्र से पिता का, माँ से  बेटी का अनुवाद पुनः…

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कविता पेड़ की हत्या

पेड़ की हत्या

जब में पेड़ बनके मरता हूँ मेरे हत्यारे कहीं फरार नहीं होता वल्कि वह अस्त्र उठाके ऐसे चलता है जैसे कोई युद्ध जीतके लौटा  है …

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कविता कितना अच्छा होता

कितना अच्छा होता

कितना अच्छा  होता अगर दुनिआ  में इनसान नहीं होते चारो  तरफ  जंगल  ही  जंगल  होता पानी  ही पानी  होता  चिड़िया अपने सुर में  गाते सारे…

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लेख ग्रामीण क्षेत्रों की लचर शिक्षा व्यवस्था

ग्रामीण क्षेत्रों की लचर शिक्षा व्यवस्था

मुरली कुमारीबीकानेर, राजस्थान पिछले कुछ वर्षों में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों की तरह कई स्तरों पर विकास हुआ है. विशेषकर सड़क और…

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