राजनीति कांग्रेसः मरता, क्या नहीं करता ?

कांग्रेसः मरता, क्या नहीं करता ?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक कांग्रेस पार्टी आजकल वैचारिक अधःपतन की मिसाल बनती जा रही है। नेहरू की जिस कांग्रेस ने पंथ-निरपेक्षता का झंडा देश में पहराया…

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कविता कबीर की भाषा का अनुवाद नहीं

कबीर की भाषा का अनुवाद नहीं

—विनय कुमार विनायककबीर की नहीं है कोई प्रतिलिपिकबीर की भाषा का अनुवाद नहींकबीर को पढ़ना है तो सीखनी होगीकबीर की अक्खड़ भाषा की प्रकृतिजाननी होगी…

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राजनीति जी-23 की बगावत से कमजोर होती कांग्रेस

जी-23 की बगावत से कमजोर होती कांग्रेस

-ः ललित गर्ग:- कांग्रेस की राजनीति की सोच एवं संस्कृति सिद्धान्तों, आदर्शों और निस्वार्थ को ताक पर रखकर सिर्फ सत्ता, पु़त्र-मोह, राजनीतिक स्वार्थ, परिवारवाद एवं…

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राजनीति जी हाँ ! “अपने स्कूलों में एक खास तरह की दुनिया दिखाता है आरएसएस”

जी हाँ ! “अपने स्कूलों में एक खास तरह की दुनिया दिखाता है आरएसएस”

– सौरभ कुमार  केरल में मछली पकड़ने और सिक्स पैक एब्स दिखाने के बाद राहुल गाँधी राजनीति में वापस आ गए हैं. घूम फिर के…

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लेख मां सीता के बिना अधूरे हैं प्रभु श्रीराम

मां सीता के बिना अधूरे हैं प्रभु श्रीराम

माता सीता जयन्ती – 6 मार्च, 2021-ः ललित गर्ग:- पौराणिक काल में ऐसी कई महिलाएं हुई हैं जिन्हें हम आदर्श और उत्तम चरित्र की महिलाएं…

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महिला-जगत खुद फैसला लेने में सक्षम होती ग्रामीण महिलाएं

खुद फैसला लेने में सक्षम होती ग्रामीण महिलाएं

राजेश निर्मलसुल्तानपुर, यूपी भारतीय संसद में महिलाओ की संख्या बढाने के लिए जब तैंतिस प्रतिशत आरक्षण की मांग जोर पकड़ने लगी, तब पुरानी धारा के…

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कविता नारी को अबला न समझना

नारी को अबला न समझना

नारी को अबला न समझना तुमवह गगन मे वायुयान उड़ाती है।कल्पना बन कर यही नारी,अब अंतरिक्ष में पहुंच जाती हैं।। विद्वता मे वह अब कम…

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लेख पुरुषप्रधान विश्व रचि राखा

पुरुषप्रधान विश्व रचि राखा

डॉ. वेदप्रताप वैदिक हम लोग कितने बड़े ढोंगी हैं? हम डींग मारते हैं कि हमारे भारत में नारी की पूजा होती है। नारी की पूजा…

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लेख साबरमती में आयशा नहीं, डूब मरी इंसानियत…!

साबरमती में आयशा नहीं, डूब मरी इंसानियत…!

हेलो, अस्सलाम वालेकुम। मेरा नाम है आयशा आरिफ खान। मैं जो कुछ भी करने जा रही हूं, अपनी मर्जी से करना चाहती हूं। किसी के…

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कविता रवीन्द्रनाथ टैगोर: क्षेत्रीय से वैश्विक कवि

रवीन्द्रनाथ टैगोर: क्षेत्रीय से वैश्विक कवि

—विनय कुमार विनायकगुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर बंगाल के,बंगाली अस्मिता, भाषा के रवि थे!गुलाम भारत के एक मात्र कवि थे,राष्ट्रीय नहीं, अंतरराष्ट्रीय छवि के! वे सात मई…

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कविता कुणाल तुम्हारी सुन्दर आंखें हो गई काल

कुणाल तुम्हारी सुन्दर आंखें हो गई काल

—विनय कुमार विनायककुणाल! तुम महारानी पद्मावतीव मगध सम्राट अशोक के लाल!तुम्हारी दो आंखें थी खंजन जैसीसुन्दर, हो गई थी तुम्हारा काल! कुणाल नयनाभिराम थे इतने…

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धर्म-अध्यात्म जीवात्मा के पुनर्जन्म का सिद्धान्त सत्य, नित्य होने सहित विश्वसनीय है

जीवात्मा के पुनर्जन्म का सिद्धान्त सत्य, नित्य होने सहित विश्वसनीय है

-मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य में भूलने की प्रवृत्ति व स्वभाव होता है। वह अपने जीवन में अनेक बातों को कुछ ही समय में भूल जाता है।…

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