दुश्मनों पर बेरहम साबित होता है अपाचे
Updated: July 17, 2020
अपाचे है दुनिया का सबसे आधुनिक और घातक हेलिकॉप्टर – योगेश कुमार गोयल भारतीय वायुसेना को अमेरिकी एयरोस्पेस कम्पनी ‘बोइंग’ से खरीदे गए सभी…
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भारतीय प्रतिभाओं के बिना भारत आगे नहीं जा सकता
Updated: July 17, 2020
किसीभीदेशकीशक्तिहोतेहैंउसकेनागरिकऔरअगरवोयुवाहोंतोकहनेहीक्या।भारतएकऐसाहीयुवादेशहै।हालहीमेंभारतीयजनसंख्याआयोगकेरजिस्ट्रारजनरलकीओरसेतैयारकिएगएसैंपलरेजिस्ट्रेशनसिस्टम 2018 कीरिपोर्टकेअनुसारहमारेदेशमें 25 वर्षसेकमआयुवालीआबादी 46.9% है।इसमें 25 वर्षकीआयुसेकमपुरूषआबादी 47.4% और महिला आबादी 46.3%। यह आंकड़े किसी भी देश को प्रोत्साहित करने के लिए काफी हैं। भारत जैसे देश के लिए भी यह आंकड़े अनेकों अवसर और आशा की किरणें जगाने वाले हैं लेकिन सिर्फ आंकड़ो से ही उम्मीदें पूरी नहीं होती, उम्मीदों को अवसरों में बदलना पड़ता है। इसे हम भारत का दुर्भाग्य कहें या फिर गलत नीतियों का असर कि हम एक देश के नाते अपने इन अवसरों का उपयोग नहीं कर पाते और उन्हें उम्मीद बनने से पहले ही बहुत आसानी से इन उम्मीदों को दूसरे देशों के हाथों में फिसलने देते हैं। हमारे प्रतिभावान और योग्य युवा जो इस देश की ताकत हैं जिनमें इस देश की उम्मीदों को अवसरों में बदलने की क्षमता है वो अवसरों की तलाश में विदेश चले जाते हैं। जो युवा इस देश का एक बार फिर से विश्वगुरु बनाने का सपना साकार करने में एक अहम भूमिका निभा सकते हैं वो अपने सपनों को साकार करने के लिए इस देश से पलायन करने के लिए विवश हो जाते हैं। जी हाँ यह कटु सत्य है कि ब्रेन ड्रेनेज का शिकार होने वाले देशों में भारत पहले स्थान पर आता है। यू एस नेशनल साइंस फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2003 से 2013 के बीच यू एस में भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की संख्या में 85% की वृद्धि हुई है। अगर ब्रेन ड्रेनेज के मामले में एशिया के अन्य देशों से तुलना की जाए तो यहाँ भी इसी रिपोर्ट के अनुसार एशिया के सभी देशों को मिलाकर विदेश जाने वाले 2.96 मिलियन वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की संख्या में से भारत 9,50,000 के साथ पहले स्थान पर है। लेकिनअगरआपसोचरहेहैंकियहपिछलेकुछसालोंकीहीसमस्याहैतोऐसानहींहै।इसदेशकेइतिहासमेंऐसेअनेकउदाहरणमिलजातेहैं।श्रीनिवासरामानुजनऐय्यंगरकाउदाहरणहमारेसामनेहैजिनकेपासगणितकीकोईऔपचारिकशिक्षायाडिग्रीनहींहोनेकेबावजूदगणितमेंउनकायोगदानअतुलनीयहै।आजभलेहीउनकेनामपरअनेकोंसम्मानदिएजातेहोंलेकिनयहभीसचहैकिउनकेजीवनकालमेंइसदेशमेंउनकीरिसर्चकोकोईमददतोदूरकीबातहै, स्वीकार्यताभीनहींमिलीथी।हारकेउन्होंनेकैम्ब्रिजयूनिवर्सिटीकेएकब्रिटिशगणितज्ञजीएचहार्डीकोअपनीरिसर्चभेजीतोहार्डीनेनासिर्फउनकेकार्यको “असाधारण” मानाबल्किउनकीप्रतिभाकोपहचानतेहुएउनकेब्रिटेनआनेकाप्रबंधभीकिया।यहघटना 1913 कीहै।आजरामानुजनइसदुनियामेंनहींहैंलेकिनगणितमेंउनकेद्वाराकिएगएकामपरजबलगभगसौसालबाद 2011 – 2012 में रिसर्च की जाती है तो आज के गणितज्ञ भी उनके काम को गहन, बेहद बारीक और उच्चतम बौद्धिक स्तर का स्वीकार करते हैं। हरगोविंद खुराना,जिन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई भारत में ही की थी,आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए थे उसके बाद पी एच डी करके भारत आए, 1949 की बात है, लेकिन उन्हें यहाँ नौकरी नहीं मिली तो वो वापस विदेश चले गए और यू एस के नागरिक बन गए। हम सब जानते हैं कि 1968 में उन्हें नोबेल पुरस्कार दिया गया था। जिस देश में अपने देश के एक होनहार युवा के लिए एक नौकरी नहीं थी, आज उसी देश में अमरीकी नागरिक हरगोविंद खुराना के नाम पर उभरती हुई प्रतिभाओं को सम्मान दिए जाते हैं। सी आर राव, हरिश्चंद्र ऐसे नामों की फेहरिस्त अंतहीन है क्योंकि हमने अपनी गलतियों से कोई सबक नहीं सीखा और 21 वीं सदी में भी इस फेहरिस्त में नाम जुड़ते जा रहे हैं। इसविषयमेंहमचीनसेसीखसकतेहैंजोचीनकलतकब्रेनड्रेनेजकेमामलेमेंभारतकेकरीबखड़ाथाआजउसनेअपनीनीतियोंमेंबदलावकरकेअपनेदेशसेप्रतिभाओंकेपलायनकोकाफीहदतकरोकलियाहै।इसकेलिएउसनेशोधऔरअनुसंधानपरजोरदेनाशुरूकरदियाहैऔरउसकेबजटमेंबेतहाशावृद्धिकीहै।भारतकीअगरहमबातकरेंतोहमारेयहाँबुनियादीशिक्षामेंप्रायोगिककेबजाएसैद्धांतिकशिक्षापरजोरदियाजाताहै।इसकापरिणामहमारेसामनेउससर्वेरिपोर्टकेरूपमेंआताहैजोयहकहतीहैकिदेशके 80% इंजीनियरबनकरनिकलनेवालेयुवानौकरीकरनेकेलायकनहींहैं।केवल 2.5% के पास वो टैलेंट होता है जो आज की आवश्यकता के अनुरूप है।और जैसा कि होता आया है इस 2.5% में से अधिकांश युवा बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश चले जाते हैं। सुन्दर पिचाई सत्या नडेला इंद्रा नूई कल्पना चावला ऐसे अनेकों नाम हैं। अगरहमवाकईमेंएकदेशकेरूपमेंएकराष्ट्रकेरूपमेंआगेबढ़नाचाहतेहैंतोहमेंअपनेदेशकीप्रतिभाओंकोपहचाननाहोगा।ऐसीप्रतिभाएंजोविज्ञानकेक्षेत्रमेंविश्वकानेतृत्वकरनेकीक्षमतारखतीहों।भारतकेपासप्रतिभाओंकीकमीनहींहै।भारतसदासेहीकल्पनाओंऔरविचारोंकाकेंद्रबिंदुरहाहै।अपनेलक्ष्योंकोसीमितसंसाधनोंऔरकमबजटमेंहासिलकरनेकीभारतीयोंकीक्षमताविश्वमेंबेजोड़है।हमारेस्पेसप्रोग्रामइसकासर्वश्रेष्ठउदाहरणहैं।पिछलेकुछसालोंमेंइसरोनेजिसप्रकारविश्वकाध्यानअपनीओरआकर्षितकियाहैवोइसकासबूतहै।लेकिनयहभीसचहैकिभारतीयप्रतिभाओंकेबिनाभारतआगेनहींजासकता। देर से ही सही लेकिन अब सरकार ने इस दिशा में सोचना शुरू कर दिया है। 2019 के…
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नये सुख की सृजना में जुटी मोदी नीतियां
Updated: July 17, 2020
– ललित गर्ग –कोरोना कोरोना वायरस से उपजे संकट ने भारत को गहरे घाव दिये हैं। स्वास्थ्य संकट, सीमा विवाद, बेरोजगारी, व्यापार की अस्तव्यस्तता, अनियंत्रित…
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वक्त है बदलाव का
Updated: July 17, 2020
वर्तमान में दल-बदल विरोधी कानून की प्रासंगिकता पर सवाल उठना लाजमी है। करीब एक साल के भीतर अलग अलग राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष ने कई…
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आयुष्मान भव
Updated: July 17, 2020
श्याम सुंदर भाटिया चौंकिएगा नहीं, देश में एक हजार से अधिक सरकारी और निजी विश्वविद्यालय हैं। 45 हजार डिग्री कॉलेज हैं। 15 लाख+ स्कूल हैं।…
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राजस्थान में भाजपा का उम्मीदभरा चेहरा
Updated: July 16, 2020
-ललित गर्ग – राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं उपमुख्यमंत्री सचिन पायलेट के बीच मचे सियासी घमासान ने लोकतंत्र की बुनियाद को गहरा आघात पहुंचाया…
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ठाकुरों की गढ़ी बड़वा में हैं अंग्रेजों के जमाने की शानदार चीजें।
Updated: July 16, 2020
(गगनचुंबी हवेलियां, मनमोहक चित्रकारी, कुंड रुपी जलाश्य, हाथीखाने, खजाना गृह, कवच रुपी मुख्य ठोस द्वार और न जाने क्या-क्या) — डॉo सत्यवान सौरभ, दक्षिण-पश्चिम हरियाणा में शुष्क…
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“चीनी कम”
Updated: July 16, 2020
कुछ समय पहले टीवी पर एक इश्तहार आता था जिसमें सब झूम झूम कर कहा करते थे कि “जो तेरा है वो मेरा है जो मेरा है…
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संभलिए ! क्योंकि आप कोरोना काल में हैं
Updated: July 16, 2020
तारकेश कुमार ओझा क्या फिर लॉकडाउन होने वाला है ? क्या अन लॉक के तहत दी जा रही छूट में कटौती होने जा रही है…
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माहवारी पर शर्म नहीं, चर्चा करती है लड़कियाँ
Updated: July 16, 2020
पूनम जोनवाल टोंक, राजस्थान 21वीं सदी का भारत न केवल विज्ञान और टेक्नोलॉजी में ही आगे बढ़ा है, बल्कि सामाजिक रूप से भी यह पहले…
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पूरी पढ़ाई अभिभावक करवाए और फीस वसूले स्कूल
Updated: July 16, 2020
( तरह-तरह की तिकड़मबाजी से अभिभावकों को लूट रहें प्राइवेट स्कूल ) – –प्रियंका सौरभ देश भर में ऑनलाइन क्लासेस के नाम पर दिनों निजी स्कूलों…
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फ्रॉक वाली हिन्दी मास्टरनी : दुर्गाबाई देशमुख
Updated: July 16, 2020
– प्रो. अमरनाथ अपने माता पिता के सामाजिक कार्यों तथा गाँधी जी से प्रभावित होकर दुर्गाबाई ने 10 वर्ष की आयु में ही काकीनाडा ( आंध्र प्रदेश…
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