प्रणव मुखर्जी का नागपुर प्रवास

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विजय कुमार जब से कांग्रेस वालों ने ये सुना है कि पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में जा रहे हैं, तब से उनकी नींद हराम है। कई तो मन ही मन उन्हें गाली दे रहे हैं। हो सकता है दो-चार दिन में गालियों का स्वर ऊंचा हो जाए। शायद अभी… Read more »

भूख का इतिहास – भूगोल … !!

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तारकेश कुमार ओझा क्या पता जब न्यूज चैनल नहीं थे तब हमारे सेलिब्रिटीज जेल जाते थे या नहीं… लेकिन हाल – फिलहाल उनसे जुड़ी तमाम अपडेट सूचनाएं लगातार मिलती रहती है। जब भी कोई सेलेब्रिटीज जेल जाता है तो मेरी निगाह उस पहले समाचार पर टिक जाती है जिसमें बताया जाता है कि फलां अब… Read more »

कुर्सी से चिपकने की राजनीति में पीएचडी है केजरीवाल की पार्टी: अन्ना हजारे

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भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में अपने अनशन से देश को जगाकर और सरकारों को हिलाकर रख देने वाले अन्ना हजारे से मिलना जैसे सादगी के प्रतीक से मिलना है। महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के रालेगण सिद्धि गांव स्थित यादव बाबा के मंदिर में जुलाई के पहले हफ्ते में वैसी ही चहल-पहल थी,जैसा किसी गांव के मंदिर… Read more »

अण्णा का आंदोलन और उसके बाद की राजनीतिक पार्टी / मा. गो. वैद्य

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श्री अण्णा हजारे ने भ्रष्टाचार निर्मूलन के लिए शुरु किया अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की. इसी उद्दिष्ट की पूर्ति के लिए, वे नई राजनीतिक पार्टी बना रहे है, ऐसा भी बताया गया. स्वयं अण्णा को राजनीति मतलब सत्ताकारण में दिलचस्वी नहीं. लेकिन उनके करीब जो लोग जमा हुए थे, उनकी वैसी स्थिति नहीं…. Read more »

टीम अन्ना का संगठन शास्त्र

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विजय कुमार अन्ना इन दिनों बीमार हैं। यद्यपि उनका उत्साह कम नहीं हुआ; पर क्या करें, शरीर साथ नहीं दे रहा। उनके साथियों को भी समझ नहीं आ रहा कि इस सरदी के मौसम में अब आगे क्या रास्ता पकड़ें कि आंदोलन में फिर से गरमी आ सके। अन्ना अपने गांव रालेगढ़ सिद्धि के शांत… Read more »

असफल होना आंदोलन अन्ना का

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निर्मल रानी बहुचर्चित, बहुप्रतीक्षित एवं अत्यंत विवादित लोकपाल बिल लगता है फिर अनिश्चितकाल के लिए ठंडे बस्ते में जाने की तैयारी में है। उधर संसद में राजनैतिक दलों की खींचातानी तथा इस विषय पर दिए जाने वाले अपने-अपने तर्कों के बीच जहां इस बिल पर सकारात्मक व रचनात्मक बहस नहीं हो सकी, वहीं सशक्त लोकपाल… Read more »

देश की असली संसद कौन सी?

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राजीव खण्डेलवाल  विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत के लोकतंत्र की संवैधानिक सर्वोच्च संस्था हमारी संवैधानिक रूप से चुनी गई ‘संसद’ है। संसद के दोनों सदन में लोकसभा, राज्यसभा के कुल मिलाकर ७८८ (५४५+२४३) सदस्य है जो न केवल देश के लिये कानून बनाते है बल्कि समवर्ती सूची में उल्लेखित विषयों पर राज्यों के… Read more »

अन्ना बनाम राहुल की जंग से कांग्रेस की बौखलाहट आई सामने?

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सिद्धार्थ शंकर गौतम ११ तारीख रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान पर अपने एक दिन के सांकेतिक अनशन में अन्ना ने लोकपाल बिल पर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाये| सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस बार अन्ना ने सीधे-सीधे राहुल गाँधी को मजबूत लोकपाल बिल पास न कराने का आरोपी ठहरा… Read more »

आर. सिंह को डॉ. मीणा का जवाब : मनुवादी व्यवस्था के कट्टर समर्थक हैं अन्‍ना हजारे

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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ के लेख पर आर. सिंह की कड़ी टिप्‍पणी आयी। लेखक ने इस टिप्‍पणी पर प्रति-टिप्‍पणी की, जो यहां प्रस्‍तुत है- सं. आदरणीय श्री आर सिंह जी, सादर प्रणाम| आपने इस आलेख पर टिप्पणी की है| इसके लिये आपका आभार| जहॉं तक आपकी ओर से उठाये गये सवालों के बारे में मेरे मत… Read more »

आन्दोलन को कमजोर करेगी ऐसी अपील

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डॉ. दिलीप अग्निहोत्री निःसन्देह अन्ना हजारे सीधे, सज्जन, ईमानदार, सादगीपसन्द, निःस्वार्थ समाजसेवी हैं। वह देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराना चाहते हैं। शक्तिशाली जनलोकपाल निर्माण की उनकी माँग इसी के अन्तर्गत है। केन्द्र सरकार इस दिशा में कारगर कदम उठाने के लिए तत्पर नहीं है। पहले भी इस अभियान को विफल करने, टालने की उसकी… Read more »