महाराष्ट्र

मिसाल बनेगी महाराष्ट्र की किसान ऋणमाफी

ऐसी विरोधाभासी स्थिति उत्पन्न कर दिए जाने के बावजूद कृषि उत्पादनों के दाम उस अनुपात में नहीं बढ़े जिस अनुपात में अन्य जरूरी वस्तुओं और सरकारी कर्मचारियों के वेतनमान बढ़े ? इस कारण किसान और किसानी से जुड़ा मजदूर लगातार आर्थिक विशमता के शिकार होते चले गए। 1960-70 के दशक तक 1 तोला सोना करीब 2 क्विंटल गेंहूं में आ जाया करता था। लेकिन आज इतने ही सोने के दाम 20 क्विंटल गेंहूं के बराबर हैं। 1970 से 2016 के दौरान गेंहूं के मूल्य में वृद्धि महज 19 गुना हुई है, जबकि इसी अवधि के दौरान सरकारी कर्मचारियों के वेतनमान 120 से 150 गुना तक बढ़ाए गए है।