मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ.

 बीजेपी ने 2019 के आम चुनाव का बिगुल बजाया मोदी की कांग्रेस-सपा-बसपा को खरी-खरी

संजय सक्सेना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘नरक का दरवाजा’ कहे जाने वाले मगहर (जिला संतकबीरनगर)

योगी सरकार के फैसलों से बड़े बदलाव की आहट

ऊर्जामंत्री ने बिजली विभाग से अन्य विभागों से 10 हजार करोड़ रूपये वसूलने के निर्देश दिये हैं यह प्रदेश के इतिाहस मे पहली बार होने जा रहा हैं । केंद्र सरकार ने भी प्रदेश में सड़कों व पुलों आदि के निर्माण के लिए भारी -भरकम खजाना खोल ही दिया है। यह मुख्यमंत्री की सख्ती का ही असर है कि अफसरों ने जनसुनवाई प्रारम्भ भी कर दी है। वहीं बहुत से अफसर अभी भी समझ नहीं पा रहे हैं। बैठकों में ही अफसरों को डांट पड़ने लग गयी है।

‘न्यू इंडिया’ और गांवों की समृद्घि का रास्ता

अब पुन: ‘न्यू इंडिया’ को भी अंग्रेजी में अभिव्यक्ति देना जंचता नहीं है। फिर भी ‘न्यू इंडिया’ अर्थात ‘नव भारत’ के निर्माण में गांव की भूमिका पर हम केन्द्र सरकार और राज्य सरकार दोनों से निवेदन करेंगे कि इस कार्य के लिए गांव को गंवारों का या पिछड़े लोगों का झुण्ड मानने की मानसिकता से इस देश के शिक्षित वर्ग को निकालने का प्रयास किया जाए। गांव के विकास की बात यहीं से प्रारंभ हो। देश का शिक्षित वर्ग आज भी गांव के लोगों से और गांव के परिवेश से वैसी ही घृणा करता है जैसी अंग्रेज किया करते थे। विदेशी शिक्षा को देश में लागू करोगे तो ऐसे ही परिणाम आएंगे। गांव के प्रति ऐसी घृणास्पद मानसिकता के परिवर्तित करने के लिए शिक्षा का भारतीयकरण किया जाए।

गाँव, गरीब और किसानों के लिए संकल्पबद्ध योगी सरकार

प्रदेश सरकार बनने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह दिखलायी पड़ रहा है कि अब प्रदेश के अफसरों को सुबह साढ़े नौ बजे तक कार्यालय में आ ही जाना होगा। मंत्रियों के अचानक निरीक्षणों के दौरान प्रदेश के कई सरकारी कार्यालयों में अनपुस्थित व देर से आने वाले अफसरों व कर्मचारियों के वेतन काटे जाने व नोटिस जारी करने का अभियान चल रहा हैं जिसकी गूंज दूर तक सूनायी पड़ रही है। सरकार ने एक बड़ा बदलाव करते हुूए बायोमैट्रिक हाजिरी व्यस्था भी लागू कर दी है। सरकार ने सबसे बड़ा कदम यह उठाया है कि किसी भी योजना का नाम समाजवादी नहीं रहेगा।

गौ-रक्षा का बदनाम होता उद्देश्य

गौ-हत्या पर रोक का कानून बनता है तो दुध का उत्पादन तो बढ़ेगा ही, जैविक खाद से खेती भी होने लग जाएगी। फिलहाल देश में दुग्ध उत्पादन में कमी अनुभव की जाने लगी है। जिसकी भरपाई नकली दूध से की जा रही है। जो नई-नई बीमारियां परोसने का काम कर रहा है। दूध की दुनिया में सबसे ज्यादा खपत भारत में है। देश के प्रत्येक नागरिक को औसतन 290 गा्रम दूध रोजाना मिलता है। इस हिसाब से कुल खपत प्रतिदिन 45 करोड़ लीटर दूध की हो रही है। जबकि शुद्ध दूध का उत्पादन करीब 15 करोड़ लीटर ही है। मसलन दूध की कमी की पूर्ति सिंथेटिक दूध बनाकर, यूरिया और पानी मिलाकर की जा रही है। दूध की लगातार बढ़ रही मांग के करण मिलावटी इस दूध का कारोबार गांव-गांव फैलता जा रहा है।

सर्वसमावेशी है हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा

हमनें सदा से विदेशियों को प्रश्रय व उनकें विचारों को सम्मान दिया है ऐसा करके हम हमारें नेसर्गिक “वसुधेव कुटुम्बकम” के मूल विचार को आगे ही बढ़ा रहे थे किंतु भारत भूमि पर बलात आने वाले मुस्लिम व ईसाई शासकों ने हमारी इस दयालुता, सहिष्णुता व भोलेपन का गलत लाभ उठाया है. इनके अतिरिक्त हमें कम्युनिस्टों से भी बड़ी हानि झेलनी पड़ी है जिन्होनें अंग्रेजों के बाद हमारा समूचा इतिहास गड्डमगड्ड कर डाला व हमारें “धर्मप्राण राष्ट्र” में “धर्म को अफीम” कहना प्रारंभ किया.