नितिन गडकरी पर हावी हैं वसुंधरा व मोदी

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कांग्रेस कमजोर, मगर खुद अपने में उलझी है भाजपा एक ओर जहां केंद्र की यूपीए सरकार भ्रष्टाचार, घोटाले और महंगाई जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की वजह से बुरी तरह घिरी हुई है और उसके दुबारा सत्ता में आने की संभावना क्षीण होने लगी है, वहीं भाजपा मौके का फायदा उठाने की बजाय खुद अपने में ही… Read more »

सरकार का बौखलाना तो लाजमी है

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राजीव गुप्ता  जनाब आजकल की फिजां ही ऐसी है ! वर्तमान सरकार की जगह अगर कोई भी होता तो शायद अपना आत्म – संतुलन खो देता और किसी अज्ञातवास में चला जाता परन्तु दाद देनी होगी इनके हिम्मत की ! अभी कल ही हिसार के उपचुनाव में कड़ी शिकस्त के बाद आज अरविन्द केजरीवाल पर… Read more »

सरकार की लाचारी, देश पर पड़ेगी कितनी भारी?

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राजेश कश्यप  देश इन दिनों भयंकर महंगाई, भ्रष्टाचार और आतंकवाद से जूझ रहा है और सत्तारूढ़ सरकार इन समस्याओं से जूड़े सवालों पर कोई जिम्मेदाराना जवाब देने की बजाय बस एक ही राग अलाप रही है कि हमारे हाथ में क्या है? वर्ष 2011 में चौथी बार पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए गए और सरकार… Read more »

बर्बरता की पराकाष्‍ठा

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मृत्‍युंजय दीक्षित योगगुरू बाबा रामदेव के साथ रामलीला मैदान में अनशन और अनशन के समर्थन में बैठे भारत के एक लाख नागरिकों को वहां से हटाने और बाबा रामदेव का अनशन तुड़वाने के लिए 4 जून, 2011 की मध्य रात्रि में दिल्ली पुलिस ने जिस प्रकार बर्बरतापूर्वक पुलिस कार्यवाही की वह स्वाधीन भारत के लोकतांत्रिक… Read more »

स्वनाश को आतुर भयग्रस्त केन्द्र सरकार

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कुन्दन पाण्डेय संघ और अक्षम भाजपा से फोबियाग्रस्त केन्द्र सरकार को जनता बदलना चाहती है। लेकिन उसके पास विकल्प का घोर अभाव होना लोकतंत्र की पतली हालत का द्योतक है क्योंकि जनता को विपक्ष और सरकार में कोई अंतर नहीं दिखता। दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। सरकार ने गहन रात्रि में सोते… Read more »

केन्द्र सरकार का हिन्दुओं के प्रति घोर अन्याय

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पाकिस्तान बनने के पश्चात भी भारत में हिन्दुओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है- 1. हिन्दुओं की जनसंख्या का प्रतिशत कम करने के लिए मुसलमानों को चार-चार शादीयां और अधिक बच्चे, जबकि माननीय उच्चतम न्यायालय कई बार देश के सभी नागरिकों के लिये Common Civil Code (समान नागरिक संहिता) बनाने का आदेश दे… Read more »

घोटालों का युग

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अखिलेश आर्येन्दु यह मामने में हमें कोई दिक्कत महसूस नहीं होनी चाहिए कि हम जिस युग में जी रहे हैं वह घोटालों का युग है । इस युग की शुरुआत कब हुई इसके बारे में इतिहासकारों में मतभेद तो हो सकते हैं लेकिन यह कोई नहीं कह सकता कि यह महान युग ‘घोटाले’ का नहीं… Read more »

जांच एजेंसियों के काम में राजनीतिक हस्तक्षेप से आतंरिक सुरक्षा पर उठे सवाल

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भूपेन्द्र धर्माणी स्वतंत्र भारत के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में उलझी मनमोहन सरकार अब सरकारी जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे प्रश्नों में उलझती प्रतीत हो रही है। देश के बडे प्रदेशों उत्तर प्रदेश एवं पश्चिम बंगाल सहित कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने मुस्लिम वोट बैंक को… Read more »

और कितने घोटाले…?

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रामबिहारी सिंह वर्तमान में देश जिस दौर से गुजर रहा है वह समय किसी भी मुल्क के लिए ठीक नहीं कहा जा सकता। एक ओर आम जनता महंगाई, भ्रष्टाचार, भुखमरी, कुपोषण, अकाल यही नहीं पानी, बिजली जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है वहीं केंद्र सरकार का आमजन की इन समस्याओं से कोई सरोकार नहीं… Read more »

यूपीए सरकार और भ्रष्टाचार

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पंडित सुरेश नीरव यूपीए सरकार और भ्रष्टाचार एक-दूसरे के अभिन्न पूरक त्तव हैं। जैसे हायड्रोजन और ऑक्सीजन के मिलने से पानी बनता है वैसे ही है इनका अटूट मिलन। और जैसे पानी की रासायनिक सरंचना में से हायड्रोजन और ऑक्सीजन में से किसी एक को अलग करने पर पानी पानी नहीं रहता बल्कि पानी शर्म… Read more »