शिक्षा

ईश्वरीय ज्ञान वेदों के 6 अंग शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष हैं:

ईश्वरीय ज्ञान वेदों के 6 अंग शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष हैं: डा.

शिक्षा अधिकार है तो मिलता क्यों नही ?

समाजसेवी शब्बीर अहमद कहते हैं ” हमें गांव में बसने की सरे आम सजा दी जा रही है। जिससे यह साबित हो रहा है कि शिक्षा भी केवल अमीर लोगों की जागीर बन चुकी है।गरीबों के बच्चे अमीरों की नौकरी के लिए ही इस्तेमाल किए जाते हैं और आगे भी किए जाते रहेंगे। नेता चुनाव के दौरान उच्च अधिकारियों के सामने इन गरीबों को ख्वाब दिखा कर उनका शोषण करते हैं। जिससे साफ जाहिर होता है कि हम लोकतांत्रिक भारत में नहीं रहते । आज के विकसित दौर में भी मोरी अड़ाई के बच्चे खुले आसमान तले शिक्षा लेने को मजबूर हैं।मिडिल स्कूलकी अधूरी बिल्डिंग के निर्माण को पूरा होना चाहिए ताकि कम से कम धूप और बारिश में भी उनकी पढ़ाई जारी रह सके “।

भारतीय मूल्यों पर आधारित हो शिक्षा

वैसे भी जो समाज व्यापार के बजाए शिक्षा से मुनाफा कमाने लगे उसका तो राम ही मालिक है। हमारे ऋषियों-मुनियों ने जिस तरह की जिजीविषा से शिक्षा को सेवा और स्वाध्याय से जोड़ा था वह तत्व बहुलतः शिक्षा व्यवस्था और तंत्र से गायब होता जा रहा है। इस ऐतिहासिक फेरबदल ने हमारे शिक्षा जगत से चिंतन, शोध और अनुसंधान बंद कर दिया है। पश्चिम के दर्शन और तौर-तरीकों को स्वीकार करते हुए अपनी जड़ें खोद डालीं। आज हम न तो पश्चिम की तरह बन पाए, न पूरब का सत्व और तेज बचा पाए।

बहुत जरूरी हैं शिक्षा में बदलाव

हमें सफलता, मूल्यांकन एवं आकलन के वर्तमान आधारों पर पुनर्विचार करना होगा। हमारे मूल्यांकन की इससे बड़ी विसंगति और क्या हो सकती है कि जिन्होंने कभी गाॅव नहीं देखा, जो कभी गाॅव में नहीं रहे, वे ‘ग्रामीण विकास‘ एवं ‘गाॅव‘ के बारे में अधिकारपूर्वक लिख रहे हैं, एवं बड़ी-बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रहे हैं।