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सपा में ‘अखिलेश युग’ का आगाज

ऐसा नहीं था कि इस दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चुपचाप सब कुछ सहते रहे। उन्होंने ने भी खूब पलटवार किये। चचा शिवपाल यादव और उनके समर्थक कहलाये जाने वाले नेताओं को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया। शिवपाल के समर्थन में खड़े नजर आ रहे अमर सिंह को अंकल की जगह दलाल की उपमा दे डाली। शिवपाल के समर्थन में खड़े अमर सिंह शातिराना तरीके से सब कुछ चुपचाप देखते रहे ,लेकिन जब अखिलेश को समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा कर शिवपाल को अध्यक्ष बनाया गया तो इस खुशी में अमर सिंह ने दिल्ली में एक दावत दे दी।

समाजवादी पार्टी का इतिहास और उठापठक

चाचा शिवपाल की आपत्तियों को ख़ारिज कर अखिलेश मुख्यमंत्री बने. लेकिन आधे अधूरे.उनके पिता, चाचा और दूसरे वरिष्ठ नेता प्रशासन में दख़ल देते रहे. वे चुपचाप काम करते रहे. सर्व प्रथम इस सरकार ने अपने करीबियो तथा खास लोगों को वोट बैंक के लिहाज से कन्या विद्या धन योजना से लेकर लैपटॉप बांटने तक की कई स्कीमें तथा बेरोजगार भत्ता देना शुरू किया. इसके बाद अपने खास आदमियों को विभिन्न विभागों एवं निगमों में राज्यमंत्री का मानद पद बांटना शुरू कर दिया. पुलिस लेखपाल, शिक्षमित्रों आदि अनेक तरह के विवदित तथा पक्षपात पूर्ण भर्तियां की जाने लगी. दागियों को महिमा मंडित किया जाने लगा है. रेवड़ियां बंटने लगी हैं.

माया ‘मोह’ में सपा का मुस्लिम वोटर

2007 के विधान सभा में बड़ी तादात में मुस्लिम वोटर बसपा का दामन थाम चुके हैं, जिसके बल पर मायावती सत्ता की दहलीज चढ़ने में सफल रहीं थीं। इसी बार भी मायावती मुस्लिमों को लुभाने के लिये सभी तरह के दांवपेंच चल रही है। इसी लिये जैसे ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महोबा की रैली में तीन तलाक को मुस्लिम महिलाओं के हितों के खिलाफ बताया मायावती ने प्रेस रिलीज जारी कर तीन तलाक का विरोध शुरू कर दिया।