समाजवाद

न समाजवाद न बहुजनवाद : साईकिल के चक्कों में फंसा बचपन

अगर शिक्षा के प्रति बच्चों के ख़त्म होते रुझान की बात करें तो आपको इसका अंदाजा यहाँ के सरकारी विद्यालयों से लग जायेगा । यहाँ के विद्यालय में कहने को तो सारे बच्चों का एडमिशन है और शायद सभी बच्चे कुछ अहम मौके पर उपस्थित भी हो जाते हों पर पर सच्चाई ये थी की विद्यालय में इक्का दुक्का ही बच्चे थे । जब मैं उसी समय गाँव के अंदर गया तो मुझे कई बच्चे साइकिल के चक्के चलाते हुए दिखे ।