चिंतन धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द जीवन के प्रमुख महान कार्य June 19, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment ऋषि दयानन्द का पहला प्रमुख कार्य तो उनका गुरु विरजानन्द जी से आर्ष शिक्षा को प्राप्त करना था जिससे वह वेदों के यथार्थ स्वरूप सहित वेद मन्त्रों के यथार्थ अर्थ जान सके। यदि यह न हुआ होता तो फिर ऋषि दयानन्द, दयानन्द व स्वामी दयानन्द ही रहते जैसे कि आज अनेकानेक साधु संन्यासी व विद्वान हैं। कोई उनको जानता भी न। गुरु विरजानन्द जी की शिक्षा ने उन्हें संसार के सभी विद्वानों से अलग किया जिसका कारण उनकी प्रत्येक मान्यता का आधार वेद सहित सत्य व तर्क पर आधारित होने के साथ उनका सृष्टि क्रम के अनुकूल होना भी है। Read more » Featured ऋषि दयानन्द जीवन के प्रमुख महान कार्य
धर्म-अध्यात्म पुनर्जन्म का ज्ञानपूर्ण व बुद्धिसंगत कारण व आधार June 16, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य जन्म का आधार प्रत्यक्ष रूप में माता-पिता होते हैं परन्तु अप्रत्यक्ष रूप में इस सृष्टि में व्यापक एक चेतन सत्ता जो सृष्टि की उत्पत्ति की सामर्थ्य सहित मनुष्य व अन्य प्राणियों की उत्पत्ति व रचना का ज्ञान रखती है, वह दोनों हैं। हमने माता-पिता से इतर सृष्टि में व्यापक एक […] Read more » पुनर्जन्म
धर्म-अध्यात्म जानें, किस दिन कर्ज लेना या देना होता है हानिकारक एवं लाभकारी— June 14, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment वैसे तो कभी न कभी कर्ज की जरूरत हर मध्यम वर्ग को पड़ती है।धन ऐसी मूलभूत अवश्यकता है, जिसके अभाव में जीवनयापन करना असंभव है। अवश्यकता पड़ने पर किसी से उधार लेना या किसी की जरूरत के समय उसे उधार देना आम बात है| पिछले दिनों ब्याज पर पैसा लेने वाले कई व्यापारियों ने सूदखोरों […] Read more » कर्ज देना होता है हानिकारक कर्ज लेना या देना होता है हानिकारक
चिंतन धर्म-अध्यात्म जानिए वास्तु अनुसार आदर्श घर कैसा होना चाहिए? June 14, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | 17 Comments on जानिए वास्तु अनुसार आदर्श घर कैसा होना चाहिए? वास्तु कुछ नियमों का पालन का विकास करने,इमारतों और हमारे आसपास के प्राकृतिक सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने के लिए एक बहुत पुरानी प्रथा है। भारतीय सभ्यता की यह सदियों पुरानी प्रथा अद्भुत परिणाम देती है और इसके चिकित्सकों का जीवन सफल, समृद्ध और शांतिपूर्ण बनाती है |बढ़ती हुई आबादी और जगह की कमी की […] Read more » Featured वास्तु अनुसार आदर्श घर
धर्म-अध्यात्म जानिए सरसो के तेल के कुछ प्रभावी और लाभकारी टोटके/उपाय…. June 13, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment -किसी भी शनिवार के दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख कर हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं , उसमें सरसों के कुछ दाने, 2 लौंग और एक कपूर का टुकड़ा डाल कर 3 बार बजरंग बाण का पाठ करें और हनुमान जी से प्रार्थना करें की अमुक व्यक्ति आपका सारा धन जल्दी से जल्दी वापस कर दे। अब इसी जलते हुए दीपक से एक चम्मच पर एक दो बूँद तेल चुपड़ कर काजल बना लें। Read more » सरसो के तेल सरसो के तेल के कुछ प्रभावी और लाभकारी टोटके
धर्म-अध्यात्म पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-18 June 13, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य  वेद की बोलें ऋचाएं सत्य को धारण करें गतांक से आगे…. मंत्र का अगला शब्द है-‘इंद्र’। इंद्र को हमारे वीरता और ऐश्वर्य का अर्थात समृद्घि का प्रतीक माना गया है। राजा का कत्र्तव्य है कि वह देश की प्रजा को वीर तथा ऐश्वर्यशाली बनाये। वीर्य रक्षा से वीर संतति का निर्माण […] Read more » पूजनीय प्रभो हमारे
धर्म-अध्यात्म अनादि से अनन्त काल की यात्रा में जीवात्मा कर्मानुसार अनेक प्राणी योनियों में विचरता रहा है और आगे भी विचरेगा June 9, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य यदि हम आर्यसमाज की बात न करें और इतर मनुष्यों व समुदायों की बातें करें तो हम देखते हैं कि मनुष्य को जड़ व चेतन का भेद व उसका तत्वार्थ ज्ञात नहीं है। मनुष्य का जन्म होता है, माता-पिता उसका पालन करते हैं, स्कूल व कालेजों में पढ़ने के लिए उसे […] Read more » जीवात्मा
धर्म-अध्यात्म माता के समान हितकारी गाय की रक्षा करना मनुष्य मात्र का परम कर्तव्य व धर्म June 9, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य संसार के जितने भी देश है या यह कहिये कि पृथिवी तल पर जहां-जहां भी मनुष्य है, वहां-वहां गाय भी विद्यमान है। यह व्यवस्था ईश्वर ने मनुष्यों के हितों को देखकर की है। यदि उसे मनुष्य का हित करना अभीष्ट न होता तो ईश्वर गाय को बनाता ही नहीं। मनुष्यों को अपने […] Read more » गाय की रक्षा
धर्म-अध्यात्म पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-17 June 7, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य वेद की बोलें ऋचाएं सत्य को धारण करें गतांक से आगे…. वेद की ऋचाओं में सत्य-धर्म का रस यूं तो सर्वत्र ही भरा पड़ा है, पर इस वेदमंत्र के ऋषि ने जितनी सुंदरता से सत्यधर्म का रस निचोडक़र हमें पिलाने का प्रयास किया है, वह अनुपम है। मैं समझता हूं कि विश्व […] Read more » पूजनीय प्रभो हमारे
धर्म-अध्यात्म बटुक भैरव जयंती 2017 June 5, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment ।।ॐ ह्रीं वां बटुकाये क्षौं क्षौं आपदुद्धाराणाये कुरु कुरु बटुकाये ह्रीं बटुकाये स्वाहा।। उक्त मंत्र की प्रतिदिन 11 माला 21 मंगल तक जप करें। मंत्र साधना के बाद अपराध-क्षमापन स्तोत्र का पाठ करें। भैरव की पूजा में श्री बटुक भैरव अष्टोत्तर शत-नामावली का पाठ भी करना चाहिए। Read more » बटुक भैरव जयंती 2017
धर्म-अध्यात्म पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-16 May 30, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य  वेद की बोलें ऋचाएं सत्य को धारण करें गतांक से आगे…. सत्य को धारण करना हमारा राजनीतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक लक्ष्य है। हम उसी के आधार पर ‘विश्वगुरू’ बनने की अपनी साधना में लगे हैं। हमारा सैकड़ों वर्ष का स्वाधीनता संग्राम इसी सत्य की साधना के लिए था। क्योंकि यह सत्य […] Read more » पूजनीय प्रभो हमारे
धर्म-अध्यात्म ऋषिभक्त आर्यों, नेताओं व विद्वानों का राग-द्वेष से मुक्त होना आवश्यक May 26, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment सत्यार्थप्रकाश को ऋषि दयानन्द सरस्वती जी का सबसे महत्वपूर्ण ग्रन्थ कह सकते हैं। इसके उत्तरार्ध के चार समुल्लासों में अन्तर्देशीय व दूर विदेशों में उत्पन्न मतों की समालोचना की गई है। ऋषि ने इन सभी चार समुल्लासों की पृथक भूमिका लिखी है। चतुर्दश समुल्लास की भूमिका में उन्होंने लिखा है कि उनका यह लेख हठ, दुराग्रह, ईष्र्या, द्वेष, वाद-विवाद और विरोध घटाने के लिये किया गया है, न कि इनको बढ़ाने के अर्थ क्योंकि एक दूसरे की हानि करने से पृथक् रह, परस्पर को लाभ पहुंचाना हमारा मुख्य कर्म है। अब यह विवेच्य मत विषय सब सज्जनों के सामने निवेदन करता हूं। विचार कर, इष्ट का ग्रहण, अनिष्ट का परित्याग कीजिये। हमारे विद्वानों को इसी भावना से ही अन्य विद्वानों की आलोचना करनी चाहिये। हमारी आलोचना पढ़कर कोई विद्वान हमसे क्षमा याचना ही करे, इसकी अपेक्षा करना उचित नहीं है। Read more » राग-द्वेष से मुक्त