धार्मिक परिवेश का एक सच ऐसा भी

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-गंगानंद झा- मैं समझता था कि मेरी चेतना में  मुसलमानों की पहचान समझे जाने वाले प्रतीकों के विरुद्ध कोई पूर्वाग्रह नहीं था । पर सीवान ने मुझे बतलाया कि मेरे अवचेतन में कितने विकृत पूर्वाग्रह थे । मैं अपनी ही प्रतिक्रिया से चौंक गया जब एक दिन किश्वर के घर पर बैठा फैज साहब से… Read more »

हिन्दू हैं मुसलमानों की सुरक्षा की गारंटी

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-बिपिन किशोर सिन्हा- नेशनल कमीशन फॉर माइनारिटी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन जस्टिस एज़ाज़ सिद्दिकी ने कल, रविवार (१९.०४.२०१५) को आगरा के ग्रांड होटल में बज़्म-ए-मैकश अवार्ड वितरण समारोह में बोलते हुए बिना किसी भय के स्पष्ट शब्दों में कहा कि अल्लाह के बाद हिन्दुस्तान में मुसलमानों के लिए सुरक्षा की कोई गारंटी है, तो वह… Read more »

गौमाता: क्या केवल हिंदुओं की ही आराध्य ?

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-निर्मल रानी- आयुर्वेदाचार्योंं के अनुसार गाय में हज़ारों प्रकार के गुण प्राकृतिक रूप से विद्यमान हैं। हिंदू धर्म में चूंकि धरती, मानवता तथा सृष्टि को लाभ पहुंचाने वाली प्रत्येक प्राकृतिक उत्पत्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उसे देवता अथवा भगवान का दर्जा दिया जाता रहा है। लिहाज़ा गाय जैसे लाभकारी पशु को भी उसकी… Read more »

लगा दो आग इस चीलमन में !

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-फखरे आलम- लगा दो आग इस चीलमन में, के न तुम झांको, न में झांकूं! हिन्दी हैं हम वतन हैं हिन्दुस्तान हमारा। हम हिन्दी हैं। हम हिन्दु हैं। सभ्यता और संस्कृति हमारी है इसी से हम जाने और पहचाने जाते हैं। हमारी पहचान ही भारतीयता है हमारा संस्कार। आज हम इसी चीलमन में आग लगा… Read more »

विभाजन और संघ द्वारा हिन्दुओं की रक्षा

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-अनिल गुप्ता- स्वतंत्रता के पश्चात पाकिस्तान मिल जाने के बाद भी मुस्लिम लीग को संतुष्टि नहीं हुई और उसने दिल्ली में भारी मात्रा में हथियार एकत्रित करके और हथियारों का अवैध निर्माण करके दिल्ली को दहलाने की तैयारी कर ली थी.संघ द्वारा संचालित साप्ताहिक Organiser weekly ने इस सम्बन्ध में निरंतर समाचार प्रकाशित किये.श्री एएन… Read more »

विभाजन काल में हिन्दुओं की रक्षा

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-अनिल गुप्ता- -स्वतंत्रता संग्राम और रा.स्व.सं. कि भूमिका- 4- सत्ता लोलुप नेतृत्व के जल्दी से जल्दी सत्ता का अपने पक्ष में हस्तांतरण कराने के उतावलेपन के कारण देश का विभाजन हुआ. उस समय यदि थोड़ी भी दृढ़ता दिखाई गयी होती तो देश का विभाजन शायद न हो पाता. ये केवल धरती का बंटवारा नहीं था बल्कि अनादिकाल से… Read more »

जातियाँ और हिन्दू समाज : शंकर शरण

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शंकर शरण  प्रकाश झा के ‘आरक्षण’ में आरक्षण का विरोध है या नहीं, यह अभी पता नहीं। पर बिना फिल्म देखे, अनेक नेता-लेखक प्रकाश और उनकी फिल्म को कोसने लग गए हैं। ऐसी-ऐसी दलीलों पर कि हैरत होती है। जैसे, इसके कलाकार और निर्देशक कथित उच्च-जातियों के हैं। अभी तक ‘दलित साहित्य’ जैसा हास्यास्पद वर्गीकरण… Read more »

मैं हिन्दू होने पर स्वयं को गौरवान्वित अनुभव करता हूँ : डॉ. मीणा

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प्रवक्‍ता डॉट कॉम के लोकप्रिय व नियमित कंट्रीब्‍यूटर डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ ने यह टिप्‍पणी डॉ. कुसुमलता केडिया के लेख ‘ईसाई धर्म और नारी मुक्ति’ पर एक टिप्‍पणीकार डॉ. राजेश कपूर के उकसावे पर की थी। ‘प्रवक्‍ता’ पर प्रकाशित डॉ. मीणा के लेखों पर लंबी चर्चा होती रही है। उनके विचार व व्‍यक्तित्‍व को लेकर… Read more »

हिन्दू पर आतंकवादी छाप से अलकायदा को मदद

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-तरुण विजय भारत के इतिहास में पहली बार एक लोकतांत्रिक भारतीय शासन के नाम पर, भारतीय इतिहास और यहाँ के हिन्दू समाज की एक बड़ी विडम्बना है कि शासन का प्रथम प्रहार हिन्दू अस्मिता और उनके गौरव स्थानों तथा संगठनों पर हो रहा है।यह स्थिति हिन्दू समाज की कमजोरी के कारण ही आयी है। आपस… Read more »

हिन्दू एक संस्कृति है : मोहनराव भागवत

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भोपाल, 27 फरवरी (हि.स.)। हिन्दू कहने से किसी समाज विशेष का ही चरित्र नहीं मिलता बल्कि भारत की पहचान ही हिन्दुस्थान के नाम से विश्व में सर्वत्र है। हिन्दू एक संस्कृति है, जिसमें मत-पंथ की भिन्नता के बावजूद सभी समाहित हैं। सिंधू सभ्यता से जुडा हुआ यह शब्द सम्बोधन के स्तर पर प्रत्येक भारतीय के… Read more »