शिव शरण त्रिपाठी

वरिष्ठ पत्रकार सम्प्रति सम्पदक-दि मॉरल मो - 9450329077

आर्तनाद अन्नदाता का!

आला कमान व राहुल बाबा की नजरों में हीरो बनने की चाहत में माननीय दीक्षित जी ने रविवार को अपने एक बयान में भारतीय सेना के प्रमुख जनरल विपिन रावत ‘सड़क का गुंडा करार दे डालाÓ उनकी व कांग्रेस की बुरी तरह भद्द पिटने पर भले ही दीक्षित ने माफी मांग ली पर खुद को, कांग्रेस को जितना नुकसान पहुंचना था वो तो उन्होने पहुंचा ही दिया। कोई भी यह नहीं समझ पा रहा है कि आखिर कांग्रेस के रणनीतिकार कांग्रेस को किस दिशा में ले जाना चाहते है। राहुल गांधी की राजनीतिक अपरिपक्वता समझ में आती है पर सोनिया गांधी का मौन समझ से परे है।

सुपरफस्ट योगी सरकार!

कार्यालयों में तम्बाकू खाने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने के फ रमान के साथ योगी सरकार ने कार्यालयों को साफ -सुथरा रखने के लिये सख्त निर्देश जारी कर दिये। मुख्यमंत्री ने जहां अपने कैबिनेट के मंत्रियों को स्वच्छता अभियान की शपथ दिलाई वहीं ऐसा ही फ रमान सारे विभागों को जारी कर दिया।
सरकारी कार्यालयों में चौपट हो चुकी कार्यसंस्कृति को पुन: बहाल करने की दृष्टि से मुख्यमंत्री ने जहां सभी कार्यालयों में बायोमैट्रिक हाजिरी लगाने की व्यवस्था करने के निर्देश जारी कर दिये वहीं मंत्रियों को औचक निरीक्षण करने के भी आदेश जारी कर दिये। नि:संदेह उनके सभी सहयोगियों ने अपना काम शुरू भी कर दिया चाहे कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही हो, चाहे खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री सत्यदेव पचौरी अथवा वक्फ मंत्री श्री मोहसिन रजा ताबड़तोड़ छापों से लापरवाह व कामचोर अधिकारियों/कर्मचारियों को समय पर आने को मजबूर कर दिया।

महापुरूषों की आत्माओं ने कहा धन्यवाद ‘योगी’

कर्मयोगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह शिक्षा की दुर्दशा के मुद्देनजर विद्यालयों में महापुरूषों के नाम पर होने वाली सरकारी छुट्टियां रद्द करके उनके बारे में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिये है उसका न केवल सूबे की जनता ने दिल खोलकर स्वागत किया है वरन् प्रदेश व देश के शिक्षा के प्रति समर्पित शिक्षा विदों ने भी सराहना की है।

अर्थ हीन है नेता जी का प्रलाप!

कोई यह नहीं समझ पा रहा कि आखिर वह अपने उसी पुत्र अखिलेश यादव पर पार्टी की नईया डूबने के बावजूद क्यों मुलायम बने रहे और जिस पर वह आज पुन: दगाबाजी का इल्जाम मंढ़ रहे है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव में सपा की लुटिया डूबने पर नेता जी ने कहा था कि वह भी चुनाव हार चुके है और फिर वापस लौटे है।

दहाड़ एक योगी की !

कार्यालयों में कार्य संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने केन्द्र के कार्यालयों की भांति बायोमैट्रिक प्रणाली अपनाने पर जोर दिया ताकि हाजरी लगाकर अनुपस्थिति होने की प्रवृत्ति पर अंकुश लग सके। कौन नहीं जानता कि आज अनेक विभागों की हालत यह है कि अधिकारी कर्मचारी ११-१२ बजे तक आते है और ३-४ बजे तक घर निकल जाते है।

चुनाव परिणामों के गहरे निहितार्थ

यदि कोई कल यह कह रहा था कि अखिलेश यादव की पांच सालों की कमियों खासकर कानून व्यवस्था की खस्ता हालत पर पर्दा डालने की नीयत से पिता की गद्दी छीनना, चाचा व चचाओं को धता बताना एक सधी योजना का हिस्सा भर था तो अंतत: सपा सरकार डूबने में खस्ता हाल कानून व्यवस्था का कम योगदान नहीं रहा। माना की सबकुछ सुनियोजित था तो भी योजना के परखचे उड़ाने में स्वयं अखिलेश यादव का हाथ कम नहीं रहा था।

काश! सुप्रीमो, सुप्रीम को अहमियत देते!

सोमवार को जब उन गायत्री प्रसाद प्रजापति ने पुन: मंत्री पद की शपथ ली जिन्हे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते अपने मत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था तो लोगो के मुंह से बरबस निकल पड़ा कि काश! सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव ने सुप्रीम मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पूर्व के निर्णय का सम्मान किया होता।