शख्सियत समाज कम्युनिज्म से अध्यात्म की यात्रा : उदासीन संत रामजीदास July 12, 2017 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | Leave a Comment मार्क्स और लेनिन को पढ़ने वाला, लिख-गा रहा है नर्मदा के गीत – लोकेन्द्र सिंह ऐसा कहा जाता है- ‘जो जवानी में कम्युनिस्ट न हो, समझो उसके पास दिल नहीं और जो बुढ़ापे तक कम्युनिस्ट रह जाए,समझो उसके पास दिमाग नहीं।’ यह कहना कितना उचित है और कितना नहीं, यह विमर्श का अलग विषय है। हालाँकि मैं यह नहीं मानता, क्योंकि […] Read more » Featured उदासीन संत रामजीदास कम्युनिज्म रामजीदास
लेख शख्सियत क्षणजन्मा डॉक्टर हेनरी नॉर्मन बेथुन June 22, 2017 / June 22, 2017 by गंगानन्द झा | Leave a Comment किताब चलते रहने का हौसला पैदा करती है, रास्ता दिखाती है और कभी कभी हमारा रास्ता रोककर खड़ी हो जाती है। — अनाम कभी कभार ही ऐसा होता है कि आपके हाथ ऐसी किताब लग जाए जो सालों बीत जाने पर भी आपकी चेतना को संस्कार-मण्डित करती रहती है और सदा के लिए महत्वपूर्ण […] Read more » Featured हेनरी नॉर्मन बेथुन
मनोरंजन शख्सियत साक्षात्कार सिनेमा सब कुछ अपने आप मिलता गया : असीमा भट्ट June 15, 2017 / June 15, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment बिहार के छोटे से शहर नवादा की असीमा भट्ट ने अपनी हिम्मत और जुनून के दम पर रंगमंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। धारावाहिक ‘मोहे रंग दे’ और ‘बैरी पिया’ में उन्होंने सशक्त अभिनय कर दर्शकों की वाहवाही भी बटोरी। वह इन दिनों फिल्मों में चरित्र भूमिकाएं भी निभा रही हैं… इन दिनों आप […] Read more » Aseema Bhatt Featured असीमा भट्ट
महत्वपूर्ण लेख शख्सियत समाज सावरकर May 29, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment कांग्रेस के नेतृत्व की इन भूलों पर सावरकर बहुत खिन्न थे। वह ये नही समझा पा रहे थे कि जब चीन जैसे देश अणुबम बनाने की बात कर रहे हैं, तो उस समय भारत ‘अणुबम नही बनाएंगे’ की रट क्यों लगा रहा है? क्या इस विशाल देश को अपनी सुरक्षा की कोई आवश्यकता नही है? वह नही चाहते थे कि इतने बड़े देश की सीमाओं को और इसके महान नागरिकों को रामभरोसे छोड़कर चला जाए। इसलिए उन्होंने ऐसे नेताओं को और उनकी नीतियों को लताड़ा जो देश के भविष्य की चिंता छोड़ ख्याली पुलाव पका रहे थे। Read more » Featured Savarkar Veer Savarkar सावरकर
शख्सियत समाज “मेरा गीत मुझे गाने दो”…..स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर….. May 27, 2017 by विनोद कुमार सर्वोदय | 1 Comment on “मेरा गीत मुझे गाने दो”…..स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर….. आज राष्ट्र चेतना के धधकते अंगारे, हिन्दू राष्ट्र के प्रचंड परंतु सर्वाधिक प्रताड़ित योद्धा स्वातंत्र्यवीर विनायक दमोदर सावरकर जी को उनके 135 वें जन्मोत्सव पर अधिकांश राष्ट्रवादी समाज स्मरण कर रहा है। प्रतिवर्ष आने वाली यह तिथि (28 मई) हिन्दुत्वनिष्ठ समाज को एकजुट व संगठित करके संगोष्ठी व वार्ताओं के विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा वीर सावरकर […] Read more » Featured vinayak damodar savarkar विनायक दामोदर सावरकर स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर
शख्सियत समाज सूना हो गया नदी का घर May 26, 2017 / May 26, 2017 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | 1 Comment on सूना हो गया नदी का घर एक वर्ष से केंद्रीय पर्यावरण मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे अनिल माधव दवे का जन्म 6 जुलाई, 1956 को उज्जैन के भदनगर में हुआ था। उनके पिता का नाम माधव दवे और माता का नाम पुष्पा देवी था। उन्होंने इंदौर स्थित गुजराती महाविद्यालय से एमकॉम की डिग्री हासिल की। उन्होंने विद्यार्थी जीवन से ही अपने राजनीतिक और सामाजिक सफर की शुरुआत कर दी थी। अपने महाविद्यालय के छात्र अध्यक्ष चुने गए। Read more » Anil Madhav Dave Featured अनिल माधव दवे
शख्सियत समाज सिनेमा हमेशा अपने दमदार अभिनय से मां के किरदार को जीवंत किया रीमा लागू ने (स्मृति-शेष) May 25, 2017 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment रीमा लागू का जन्म 1958 में हुआ था। रीमा के बचपन का नाम गुरिंदर भादभाड़े था। रीमा लागू जानीमानी मराठी एक्ट्रेस मंदाकनी भादभाड़े की बेटी हैं। रीमा लागू की अभिनय क्षमता का पता जब चला जब वह पुणे में हुजुरपागा एचएचसीपी हाई स्कूल में छात्रा थीं। हाई स्कूल पूरा करने के तुरंत बाद उनके अभिनय […] Read more » Featured रीमा लागू
शख्सियत समाज गणि राजेन्द्र विजय: दांडी पकडे़ आदिवासियों के ‘गांधी’ May 15, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment गणि राजेन्द्र विजयजी बच्चों को कच्चे घड़े के समान मानते हैं। उनका कहना है उन्हें आप जैसे आकार में ढालेंगे वे उसी आकार में ढल जाएंगे। मां के उच्च संस्कार बच्चों के संस्कार निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए आवश्यक है कि सबसे पहले परिवार संस्कारवान बने माता-पिता संस्कारवान बने, तभी बच्चे संस्कारवान चरित्रवान बनकर घर की, परिवार की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकेंगे। अगर बच्चे सत्पथ से भटक जाएंगे तो उनका जीवन अंधकार के उस गहन गर्त में चला जाएगा जहां से पुनः निकलना बहुत मुश्किल हो जाएगा। बच्चों को संस्कारी बनाने की दृष्टि से गणि राजेन्द्र विजय विशेष प्रयास कर रहे हैं। Read more » Featured गणि राजेन्द्र विजय
शख्सियत समाज राष्ट्र के जागरूक पुरोहित बाबा रामदेव May 6, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य  वेद का आदेश है- वयं राष्ट्रे जागृयाम् पुरोहिता:।। ‘अर्थात हम अपने राष्ट्र में जागरूक रहते हुए अग्रणी बनें। राष्ट्र का नेतृत्व करें।’ जो जागरूकों में भी जागरूक होता है, वही राष्ट्रनायक होता है, वही पुरोहित होता है। यज्ञ पर पुरोहित वही बन सकता है जो जागरूकों में भी जागरूक है, […] Read more » Baba Ramdev Featured बाबा रामदेव योगगुरू बाबा रामदेव
लेख शख्सियत साहित्य कविवर टैगोर : कुछ विवाद – कुछ प्रवाद May 4, 2017 by डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री | Leave a Comment रवीन्द्र नाथ टैगोर (7 मई 1861–7 अगस्त 1941), जिन्हें आधुनिक भारत में “ गुरुदेव “ का सम्मान मिला, ऐसे महाकवि, जिन्हें साहित्य का नोबल पुरस्कार मिला, विश्व के एकमात्र ऐसे कवि जिनके लिखे गीतों को दो भिन्न देशों में “राष्ट्रगान “ का सम्मान मिला, बहु-आयामी व्यक्तित्व के ऐसे धनी जो हर आयाम में शिखर […] Read more » Featured Guru Rabindra Nath tagore गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर टैगोर
राजनीति शख्सियत आज भी हजारों लोग सुनने और देखने आते हैं उमा भारती को May 2, 2017 / May 2, 2017 by ब्रह्मानंद राजपूत | 1 Comment on आज भी हजारों लोग सुनने और देखने आते हैं उमा भारती को इस समय साध्वी उमा भारती केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में जल संसाधन और गंगा संरक्षण मंत्री का दायित्व निभा रहीं हैं। अगर भगवाधारी केंद्रीय मंत्री उमा भारती के गंगा के प्रति नजरिए के बारे में बात की जाये तो वह गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने को अपने जीवन-मरण का सवाल बना चुकी हैं। इसलिए उमा भारती अपने हर वक्तव्य में कहती हैं कि ‘‘जब आए हैं गंगा के दर पर तो कुछ करके उठेंगे, या तो गंगा निर्मल हो जाएगी या मर के उठेंगे।’’ इससे पता चलता है कि उमा भारती गंगा के प्रदूषण से कितनी विचलित हैं। अब आगे देखने वाली बात होगी कि केंद्रीय मंत्री उमा भारती यमुना का कितना जीर्णोद्धार या कायाकल्प कर पाती हैं। Read more » Uma Bharti उमा भारती
शख्सियत सिनेमा विनोद खन्नाः अभियन की स्कूल के प्रिसिंपल … .!! April 29, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment 80 के दशक के शुरूआती वर्षों तक अभियन के इन दो धुरंधरों की टक्कर जारी रही। अक्टूबर 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद अमिताभ बच्चन राजनीति में चले गए और इलाहाबाद से सांसद निर्वाचित होकर संसद भी पहुंच गए। तब विनोद खन्ना के लिए सुपर स्टार के रूप में उभरना आसान था। हालांकि फिल्म से दूरी के बावजूद अमिताभ बच्चन के प्रशंसकों के लिए किसी अन्य हीरों को सुपर स्टार के तौर पर स्वीकार करना मुश्किल था। Read more » Featured Vinod Khanna विनोद खन्ना