कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म मंगलिक कार्य आरम्भ होने का दिन है ‘‘देवोत्थान एकादशी’’ November 8, 2016 / November 8, 2016 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment प्रबोधिनी एकादशी अथवा देवोत्थान एकादशी के दिन भीष्म पंचक व्रत भी शुरू होता है, जो कि देवोत्थान एकादशी से शुरू होकर पांचवें दिन पूर्णिमा तक चलता है। इसलिए इसे इसे भीष्म पंचक कहा जाता है। कार्तिक स्नान करने वाली स्त्रियाँ या पुरूष बिना आहार के रहकर यह व्रत पूरे विधि विधान से करते हैं। इस व्रत के पीछे मान्यता है कि युधिष्ठर के कहने पर भीष्म पितामह ने पाँच दिनो तक (देवोत्थान एकादशी से लेकर पांचवें दिन पूर्णिमा तक) राज धर्म, वर्णधर्म मोक्षधर्म आदि पर उपदेश दिया था। Read more » Featured देवोत्थान एकादशी’ मंगलिक कार्य आरम्भ होने का दिन
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म शख्सियत गुरुनानक देव : भारतीय धर्म और संस्कृति के पुरोधा November 8, 2016 / November 8, 2016 by ललित गर्ग | Leave a Comment गुरुनानकजी का धर्म जड़ नहीं, सतत जागृति और चैतन्य की अभिक्रिया है। जागृत चेतना का निर्मल प्रवाह है। उनकी शिक्षाएं एवं धार्मिक उपदेश अनंत ऊर्जा के स्रोत हैं। शोषण, अन्याय, अलगाव और संवेदनशून्यता पर टिकी आज की समाज व्यवस्था को बदलने वाला शक्तिस्रोत वही है। धर्म के धनात्मक एवं गतिशील तत्व ही सभी धर्म क्रांतियों के नाभि केन्द्र रहे हैं। वे ही व्यक्ति और समाज के समन्वित विकास की रीढ़ है। Read more » Featured Guru Nanakdev Jayanti गुरुनानक देव भारतीय धर्म और संस्कृति के पुरोधा
कला-संस्कृति ज्योतिष विविधा ज्योतिष और वाणीदोष/गूंगापन November 6, 2016 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment वाणी दोष कि वजह से परिवार में अशांति हो जाती है , अगर बुध कि उँगली (कनिष्ठ) बहुत अंदर कि तरफ झुकी हुइ है या फिर बाहर कि तरफ़ निकली हुई है , या फिर बुध के पर्वत पर बहुत सारी लकीरों का जाल है , तो जब आप बोलना चाहेंगे तब आप वह चीज बोल नही पाएँगे , झूठ ज्यादा बोलेंगे , गले से जुड़ी समस्या हो जाती है | Read more » गूंगापन ज्योतिष वाणीदो
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म वर्त-त्यौहार छठ पर्व इतिहास और महत्व November 4, 2016 / November 4, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment छठ त्यौहार का धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी बहुत महत्व माना गया है। षष्ठी तिथि (छठ) एक विशेष खगौलीय अवसर होता है। इस समय सूर्य की पराबैगनी किरणें पृथ्वी की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्र हो जाती हैं। उसके संभावित कुप्रभावों से रक्षा करने का सामर्थ्य इस परंपरा में रहा है। छठ व्रत नियम तथा निष्ठा से किया जाता है।भक्ति-भाव से किए गए इस व्रत द्वारा नि:संतान को संतान सुख प्राप्त होता है। Read more » Featured छठ पर्व
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म हनुमान जयंती:- पर सभी भक्तों के संकट हरते हनुमान जी November 1, 2016 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment आज की तारीख में राजधानी लखनऊ में लगने वाला बड़ा मंगल का मेला जहां गली गली में लोकप्रिय हो रहा है। वहीं यहीं का असर है कि यह मेला अब लखनऊ के सटे बाराबंकी में भी लगने लगा है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने एक बार कहा भी था कि ,”श्री महावीर जी मन के समान वेग वाले हैं । अतः मेरी हार्दिक इच्छा है कि उनका दर्शन लोगों को गली -गली में हो। मुहल्ले -मुहल्लें में हनुमान जी की मूर्ति स्थापित करके लोगों को दिखलायी जायें। स्थान- स्थान पर अखाड़ें हों जहां उनकी मूर्तियां स्थापित हो जायें। Read more » Featured हनुमान जयंती
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म अंकोरवाट मन्दिर: विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक November 1, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment ख्मेर शास्त्रीय शैली से प्रभावित स्थापत्य वाले इस मंदिर का निर्माण कार्य सूर्यवर्मन द्वितीय ने प्रारम्भ किया परन्तु वे इसे पूर्ण नहीं कर सके। मंदिर का कार्य उनके भानजे एवं उत्तराधिकारी धरणीन्द्रवर्मन के शासनकाल में सम्पूर्ण हुआ। मिश्र एवं मेक्सिको के स्टेप पिरामिडों की तरह यह सीढ़ी पर उठता गया है। इसका मूल शिखर लगभग 64 मीटर ऊँचा है। इसके अतिरिक्त अन्य सभी आठों शिखर 54 मीटर उँचे हैं। मंदिर साढ़े तीन किलोमीटर लम्बी पत्थर की दिवार से घिरा हुआ था, उसके बाहर 30 मीटर खुली भूमि और फिर बाहर 190 मीटर चौडी खाई है। Read more » Featured अंकोरवाट मन्दिर विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म हनुमान जयंती : सभी भक्तों के संकट हरते हनुमान जी October 31, 2016 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment आज की तारीख में राजधानी लखनऊ में लगने वाला बड़ा मंगल का मेला जहां गली गली में लोकप्रिय हो रहा है। वहीं यहीं का असर है कि यह मेला अब लखनऊ के सटे बाराबंकी में भी लगने लगा है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने एक बार कहा भी था कि ,”श्री महावीर जी मन के समान वेग वाले हैं । अतः मेरी हार्दिक इच्छा है कि उनका दर्शन लोगों को गली -गली में हो। Read more » Featured हनुमान जयंती
कला-संस्कृति विविधा इस दीवाली को वास्तु अनुसार कैसे बनाये लाभकारी— October 30, 2016 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment घर के दरवाजे पर मां लक्ष्मी के पैर का चिन्ह जरूर लगाने चाहिए। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि पैर की दिशा अंदर की तरफ होनी चाहिए। घर के दरवाजे पर चांदी का स्वस्तिक लगाना बेहद शुभ माना जाता है। वास्तु के अनुसार इससे घर में बीमारी नहीं आती। ---- पानी में नमक मिलाइये और इसे पूरे घर के कोने-कोने में छिड़किये। वास्तु के हिसाब से नमक घर की बुरी ऊर्जा को सोख लेता है। --- घर में उत्तर दिशा को कुबेर स्थान बोला जाता है। सुनिश्चित करें कि माता लक्ष्मी की मूर्ति यही पर रखी जाए और गणेश जी की मूर्ति उनके दाहिने साइड में हो। इसके अलावा मूर्तियों को लाल रंग के कपडे़ में सजाइये। Read more » Featured दीवाली को वास्तु अनुसार कैसे बनाये लाभकारी
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म बटेश्वर का धार्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक इतिहास October 28, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 1 Comment on बटेश्वर का धार्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक इतिहास बटेश्वर की गुझिया, खोटिया, बताशा और शकरपाला प्रसिद्ध हैं। मेले के अवसर पर यहाँ बहुत चहल-पहल रहती है। पशुमेला तीन चरणों में पूरा होता है। पहले चरण में ऊँट, घोड़े और गधों की बिक्री होती है, दूसरे चरण में गाय आदि अन्य पशुओं की तथा अंतिम चरण में सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। मेला शुरू होने के एक सप्ताह पहले से ही पशु व्यापारी अपने पशु लेकर यहां पहुँचने लगते हैं। Read more » बटेश्वर बटेश्वर नाथ मंदिर
कला-संस्कृति विविधा महान आयुर्वेदाचार्य धन्वन्तरि October 28, 2016 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment महान आयुर्वेदाचार्य धन्वन्तरि Read more » Featured धन्वन्तरि महान आयुर्वेदाचार्य धन्वन्तरि
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म पर्व - त्यौहार विविधा स्वच्छता व प्रकाश की प्रतीक दीपावली October 27, 2016 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। लोग कई दिनों पहले से ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ कर देते हैं, और सब अपने घरों, प्रतिष्ठानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। दिवाली के आते ही घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग अपने घरों और दुकानों को साफ सुथरा कर सजाते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि लक्ष्मी जी उसी घर में आती है यहाँ साफ-सफाई और स्वच्छता होती है। Read more » दीपावली स्वच्छता व प्रकाश की प्रतीक
कला-संस्कृति जन-जागरण धर्म-अध्यात्म पर्व - त्यौहार दीवाली उपहार है हिंदुत्व की परिभाषा की पुनर्स्थापना October 27, 2016 by प्रवीण गुगनानी | 1 Comment on दीवाली उपहार है हिंदुत्व की परिभाषा की पुनर्स्थापना हिन्दुस्थानियों के एक बड़े व महान पर्व दीवाली के एन पूर्व पिछले सप्ताह एक हलचल कारी घटना हुई , जिसनें हिन्दुओं की दीवाली पूर्व ही दीवाली मनवा दी हुआ यह कि देश केउच्चतम न्यायालय ने यह जांच प्रारम्भ की कि हिंदुत्व भारतीय जीवन शैली का हिस्सा है या फिर धर्म है. तीस्ता सीतलवाड़ द्वारा दायर […] Read more » Deepawali Depawali Diwali Featured दीवाली हिंदुत्व हिंदुत्व की परिभाषा की पुनर्स्थापना