कला-संस्कृति वर्त-त्यौहार विविध रूपों में मनाया जाता है मकर संक्रान्ति January 12, 2017 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप मकर संक्रांति हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है। चाहे वह महाभारत के समय की बात हो या फिर रामायण काल की बात हो या फिर अन्य पौराणिक ग्रन्थ हो, कहीं न कहीं मकर संक्राति का किसी न किसी रूप में वर्णन मिलता है। गोस्वामी तुलसी दास जी श्री रामचरित्र मानस में लिखते है- माघ […] Read more » makar sankranti मकर संक्रान्ति
कला-संस्कृति विविधा मोक्ष का महासागर गंगासागर January 9, 2017 by जगदीश यादव | Leave a Comment 14 जनवरी गंगासागर पुण्य स्नान पर विशेष जगदीश यादव अंग्रेजों ने भी इस देश को साधु-संतों का देश कहा है। भारत की धरती ही एक मात्र जगह है जहां आस्था सिर चढ़कर बोलती है। यहां डुबते सूर्य को भी अर्घ्य प्रदान किया जाता है। पश्चिम बंगाल की जिस पावन भूमि में गंगा व सागर का […] Read more » गंगासागर पुण्य स्नान मोक्ष का महासागर गंगासागर
कला-संस्कृति विविधा प्राचीन भवनों के संरक्षण की अनुपम पहल January 8, 2017 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment डॉ मयंक चतुर्वेदी संस्कृति एवं परंपरा के कभी जागृत नमूने रहे भवन आज भले ही अपने वैभव से दूर होकर अनेक स्थानों पर टूटे-फूटे स्मारकों में तब्दील हो गए हों, किंतु वे हैं तो हमारे अतीत का दिग्दर्शन करानेवाले आधार स्तम्भ ही। इसलिए उन्हें उनके प्राचीन गौरवपूर्ण स्वरूप में वापस लाकर उनसे निरंतर प्रेरणा […] Read more » Featured प्राचीन भवनों के संरक्षण
कला-संस्कृति विविधा इतिहास के आइने में 64वीं बांसी माघ मेला एव प्रर्दशनी January 8, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 5 Comments on इतिहास के आइने में 64वीं बांसी माघ मेला एव प्रर्दशनी डा. राधेश्याम द्विवेदी इतिहास एवं विस्तार :- बांसी भारत के मानचित्र पर 27040‘ उत्तरी अक्षांस तथा 820 56‘ पश्चिमी देशान्तर पर स्थित है। यह राप्ती नदी के किनारे बसा हुआ है जिसके इस पार मेंहदावल व डुमरियागंज तथा उस पार विस्कोहर , चिल्हिया तथा उस्का बाजार है। नदी के तट पर ही राजा साहब का […] Read more » ’बांसी माघ मेला 64वीं बांसी माघ मेला एव प्रर्दशनी
कला-संस्कृति जरूर पढ़ें फ़ेस बुक पेज़ से विविधा वीर गाथा उन सुकुमारों की है जिनकी शहादत के समय अभी दूध के दाँत भी नहीं गिरे थे। January 5, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on वीर गाथा उन सुकुमारों की है जिनकी शहादत के समय अभी दूध के दाँत भी नहीं गिरे थे। छोटे साहिबजादों और माता गुजरी जी की शहीदी सूरा सो पहचानिये, जो लरै दीन के हेतु ।। पुरजा पुरजा कटि मरै, कबहु न छाडै खेतु ।।(सलोक कबीर जी) यह वीर गाथा उन सुकुमारों की है जिनकी शहादत के समय अभी दूध के दाँत भी नहीं गिरे थे। सन :1705 ईस्वी 20 दिसम्बर: की मध्यरात्रि का समय श्री गुरू गोबिन्द सिंघ जी की श्री […] Read more » Featured Guru Gobind Singh ji श्री गुरू गोबिन्द सिंघ जी
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म वर्त-त्यौहार रोग, राग, दुःख और दरिद्रता के निवारणार्थ स्कन्द षष्ठी व्रत January 3, 2017 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” भारतीय सांस्कृतिक चिन्तन में जहाँ भगवान शिव आत्मा तत्त्व या सृष्टि के केंद्र विन्दु के रूप में स्वीकार किये जाते हैं , वहीं उनकी अर्धागिनी माता पार्वती शक्ति का शिखर बिन्दु मानी जाती हैं। पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार आत्मा रूपी सत्य और शक्ति के संयोग से ही सृष्टि गतिशील होती है तथा आत्मा […] Read more » स्कन्द षष्ठी व्रत
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म गुरु गोविन्द सिंह : सभ्यता और संस्कृति के प्रतीकपुरुष January 3, 2017 / January 3, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment गुरु गोविन्द सिंह के 350वें प्रकाश उत्सव- 5 जनवरी 2017 – ललित गर्ग- भारत का सौभाग्य है कि यहां की रत्नगर्भा माटी में महापुरुषों को पैदा करने की शोहरत प्राप्त है। जिन्होंने अपने व्यक्तित्व और कर्तृत्व से न सिर्फ स्वयं को प्रतिष्ठित किया वरन् उनके अवतरण से समग्र विश्व मानवता धन्य हुई है। इसी संतपुरुषों, […] Read more » Featured Guru Gobind Singh Prakash parv गुरु गोविन्द सिंह
कला-संस्कृति विविधा जानिए गृह वास्तु पूजन का प्रभाव, वास्तु पूजन का महत्त्व और वास्तु पूजन के लाभ-हानि — January 2, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment वास्तु का अर्थ है एक ऐसा स्थान जहाँ भगवान और मनुष्य एक साथ रहते हैं। हमारा शरीर पांच मुख्य पदार्थों से बना हुआ होता है और वास्तु का सम्बन्ध इन पाँचों ही तत्वों से माना जाता है। कई बार ऐसा होता है कि हमारा घर हमारे शरीर के अनुकूल नहीं होता है तब यह हमें […] Read more » वास्तु देव पूजन के लिए आवश्यक सामग्री इस प्रकार है वास्तु पूजन वास्तु पूजन का प्रभाव वास्तु पूजन का महत्त्व वास्तु पूजन के लाभ-हानि
कला-संस्कृति विविधा हैप्पी न्यू ईयर या नववर्ष, तय कीजिए December 31, 2016 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | Leave a Comment लोकेन्द्र सिंह दृश्य एक। सुबह के पांच बजे का समय है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि यानी वर्ष प्रतिपदा का मौका है। ग्वालियर शहर के लोग शुभ्रवेश में जल विहार की ओर बढ़े जा रहे हैं। जल विहार के द्वार पर धवल वस्त्र पहने युवक-युवती खड़े हैं। उनके हाथ में एक कटोरी […] Read more » Featured Happy new year Nav varsha नववर्ष हैप्पी न्यू ईयर
कला-संस्कृति लेख साहित्य चौसठ योगिनी मंदिर, जिसकी अनुकृति से भारतीय संसद भवन बना है December 29, 2016 / December 29, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी योगाभ्यास करने वाली स्त्री को योगिनी या योगिन कहा जाता है। पुरुषों के लिए इसका समानांतर योगी है। अष्ट या चौंसठ योगिनियां प्रायः आदिशक्ति मां काली का अवतार या अंश होती है। घोर नामक दैत्य के साथ युद्ध करते हुए माता ने उक्त चौंसठ चौंसठ अवतार लिए थे । यह भी माना […] Read more » चौसठ योगिनी मंदिर
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म भगवान परशुराम का समतामूलक एवं क्रांतिकारी समाज सुधारक कार्य December 20, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 1 Comment on भगवान परशुराम का समतामूलक एवं क्रांतिकारी समाज सुधारक कार्य डा.राधेश्याम द्विवेदी हमारे धर्मग्रंथ, कथावाचक ब्राह्मण और दलित राजनीति की रोटी सेकने वाले नेतागण भारत के प्राचीन पराक्रमी महानायकों की संहारपूर्ण हिंसक घटनाओं के आख्यान खूब सुनाते हैं, लेकिन उनके समाज सुधार से जुड़े क्रांतिकारी कार्यों को नजरअंदाज कर जाते हैं। विष्णु के दशावतारों में से छठे अवतार माने जाने वाले भगवान परशुराम के साथ […] Read more » Bhagwan Parshuram Featured भगवान परशुराम
कला-संस्कृति विविधा वैश्विक मंच पर प्राचीन भारतीय शिक्षण-पद्धति की धमक December 19, 2016 by मनोज ज्वाला | 2 Comments on वैश्विक मंच पर प्राचीन भारतीय शिक्षण-पद्धति की धमक मनोज ज्वाला भारत को सदा-सदा के लिए अंग्रेजों का उपनिवेश बनाये रखने की कुटिल मंशा के तहत यहां के नवनिहालों पर अंग्रेजी शिक्षण-पद्धति को थोप देने वाला षड्यंत्रकारी टी०बी० मैकाले अपनी सफलता पर भले ही कभी विहंसता रहा हो , किन्तु अब वह यह जान कर भारी सदमें में है कि उसकी कुटिल बुद्धि से […] Read more » Featured प्राचीन भारतीय शिक्षण-पद्धति भारतीय शिक्षण-पद्धति वैश्विक मंच वैश्विक मंच पर प्राचीन भारतीय शिक्षण-पद्धति की धमक