कला-संस्कृति पर्व - त्यौहार विविधा आस्था और नहान की कार्तिक पूर्णिमा November 25, 2015 / November 25, 2015 by अरुण तिवारी | Leave a Comment कार्तिक पूर्णिमा (25 नवंबर, 2015) पर विशेष कार्तिक पूर्णिमा – कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि! मौसमी बदलाव का एक खास बिंदु! शरद गई, हेमंत आई। पित्त गया, अब कफ बढ़ेगा। मार्गशीषर्, ठंड लेकर आयेगी। गौर कीजिए, साल के 12 महीनों में कार्तिक, सर्वाधिक पवित्र उत्सव माह है। पूरे माह तुलसी की पूजा-अर्चना […] Read more » Featured कार्तिक पूर्णिमा
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म पारसी धर्मः आर्य धर्म से अनुप्राणित November 25, 2015 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी पारसी या फारसी धर्म के प्र्रवर्तक या पैगम्बर का नाम जरथुस्त्र या जोरास्टर था। यह धर्म फारस या प्राचीन ईरान में आर्यों के वैदिक धर्म से अनुप्राणित होकर निकला है। परम्परागत रुप में इसका समय 6000 ई.पू. कहा जाता है। इतिहास में सिकन्दर की विजय ( 330 ई.पू.) से 258 साल पहले […] Read more » Featured आर्य धर्म से अनुप्राणित पारसी धर्म
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म विविधा हिंद स्वराज कपिलवस्तु का एक प्रमुख बौद्ध महाविहार-स्तूप November 20, 2015 / November 20, 2015 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 2 Comments on कपिलवस्तु का एक प्रमुख बौद्ध महाविहार-स्तूप सालारगढ़ डा. राधेश्याम द्विवेदी भारतीय संस्कृति एवं इतिहास में अध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक महापुरुषों का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महात्मा बुद्ध और तीर्थंकर महाबीर के प्रादुर्भाव से एक नये युग का सूत्रपात हुआ है।1 धर्म दर्शन तथा ललित कलाओ के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन दिखलाई पड़ने लगे हें। उत्तर प्रदेश के नेपाल की सीमा […] Read more » Featured कपिलवस्तु कपिलवस्तु का एक प्रमुख बौद्ध महाविहार-स्तूप प्रमुख बौद्ध महाविहार-स्तूप सा ला र ग ढ़
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म विविधा ऋषि श्रृंगी की कहानी एवं उनका आश्रम November 18, 2015 / November 18, 2015 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 25 Comments on ऋषि श्रृंगी की कहानी एवं उनका आश्रम उन दिनों देवता व अप्सरायें पृथ्वी लोक में आते-जाते रहते थे। बस्ती मण्डल में हिमालय का जंगल दूर-दूर तक फैला हुआ करता था। जहां ऋषियों व मुनियों के आश्रम हुआ करते थे। आबादी बहुत ही कम थी। आश्रमों के आस-पास सभी हिंसक पशु-पक्षी हिंसक वृत्ति और वैर-भाव भूलकर एक साथ रहते थे। परम पिता ब्रहमा […] Read more » Featured story of shringi rishi ऋषि श्रृंगी की कहानी
कला-संस्कृति महत्वपूर्ण लेख लेख साहित्य हिंद स्वराज हिन्दू धर्म ही नहीं जीवन दर्शन है November 18, 2015 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 3 Comments on हिन्दू धर्म ही नहीं जीवन दर्शन है डा राधेश्याम द्विवेदी हिन्दू राष्ट्र और हिन्दू धर्म को लेकर पूरे देश में कुछ लोगों ने एक मुहिम चला रखी है । अनेक राजनेता एवं धार्मिक जन इसका उल्टा.सीधा अर्थ निकालकर देश की भोली भाली जनता को दिग्भ्रमित कर रहे हैं । वे अपनी पूर्वाग्रहयुक्त बातों को समाज एवं राष्ट्र पर थोपने का प्रयास कर […] Read more » Featured hindu Hinduism हिन्दू धर्म जीवन दर्शन है हिन्दू धर्म है
कला-संस्कृति लेख विविधा शातिर मैकाले का मोहरा – हिन्दू धर्म का महान शत्रु “मैक्स मूलर” October 29, 2015 by हरिहर शर्मा | Leave a Comment फ्रेडरिक मैक्समूलर एक ऐसा नाम है जिसे ब्रिटिश शासनकाल में ब्रिटिश राजनीतिज्ञों, प्रशासकों और कूटनीतिज्ञों ने एक सदी (१८४६-१९४७) तक लगातार हिन्दुओं का एक अभिन्न मित्र और वेदों के महान विद्वान के रूप में प्रस्तुत किया ! परन्तु क्या यह सत्य है ? जी नहीं सत्य ऐसे बिलकुल विपरीत है ! वास्तव में मैक्स मूलर […] Read more » Featured मैक्स मूलर शातिर मैकाले का मोहरा हिन्दू धर्म का महान शत्रु
कला-संस्कृति कविता ए नये भारत के दिन बता.. October 27, 2015 / October 28, 2015 by अरुण तिवारी | Leave a Comment ए नये भारत के दिन बता…… ए नदिया जी के कुंभ बता, उजरे-कारे सब मन बता, क्या गंगदीप जलाना याद हमें या कुंभ जगाना भूल गये ? या भूल गये कि कुंभ सिर्फ नहान नहीं, ग्ंागा यूं ही थी महान नहीं । नदी सभ्यतायें तो खूब जनी, पर संस्कृति गंग ही परवान चढी। नदियों में […] Read more » Featured ए नये भारत के दिन बता..
कला-संस्कृति विविधा गोरक्षा-आन्दोलन और गोपालन का महत्व October 26, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment आर्य विद्वान और नेता लौह पुरूष पं. नरेन्द्र जी, हैदराबाद की आत्मकथा ‘जीवन की धूप-छांव’ से गोरक्षा आन्दोलन विषयक उनका एक संस्मरण प्रस्तुत कर रहे हैं। वह लिखते हैं कि ‘सन् 1966 ईस्वी में पुरी के जगद्गुरु शंकराचार्य के नेतृत्व में गोरक्षा आन्दोलन चलाया गया था। पांच लाख हिन्दुओं का एक ऐतिहासिक जुलूस लोकसभा तक […] Read more » Featured गोपालन का महत्व गोरक्षा-आन्दोलन
कला-संस्कृति कविता रामचरित October 23, 2015 / October 23, 2015 by अरुण तिवारी | Leave a Comment धरियो, रामचरित मन धरियो तजियो, जग की तृष्णा तजियो। परहित सरिस धर्म मन धरियो मरियो, मर्यादा पर मरियो।। धरियो, रामचरित…. भाई बने तो स्वारथ तजियो संगिनी बन दुख-सुख सम धरियोे। मात बने तो धीरज धरियो पुत्र बने तो पालन करियो।। धरियो, रामचरित… सेवक सखा समझ मन भजियो ़शरणागत की रक्षा करियो। शत्रु संग मत धोखा […] Read more » रामचरित
कला-संस्कृति बदलते शहर में बस, नाम रह जाएगा October 21, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment कुदसिया बाग नलिन चौहान दिल्ली की ऐतिहासिक विरासतों को सहेजने की ज़िम्मेदारी भले ही उत्तरी दिल्ली के हिस्से ज्यादा नहीं आती हो, लेकिन बहुत कम लोगों को ये पता है कि, यह शहर का सबसे अधिक दिलचस्प इलाका है जो पग-पग पर स्वप्नदर्शी पुरातन स्थलों से भरा हुआ है। इस शहर में पुरानी दिल्ली के […] Read more » कुदसिया बाग नाम रह जाएगा बदलते शहर में बस शहर
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म विविधा शख्सियत रक्ष संस्कृति का नायक था रावण October 21, 2015 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव राम प्रत्येक भारतीय के आराध्य देव हैं और वे भारत के कण-कण में रमें हैं। वे आदर्श पुरूष हैं, मर्यादा पुरूषोत्तम हैं। उनकी तुलना में रावण को राक्षस, कुरूप, अत्याचारी, अतिकाई, आतताई आदि विकृति के विभिन्न प्रतीक रूपों में प्रस्तुत किया जाता है। लेकिन क्या यह संभव है कि समृद्ध, वैभवपूर्ण विशाल राष्ट्र […] Read more » Featured रक्ष संस्कृति का नायक रक्ष संस्कृति का नायक था रावण रावण
कला-संस्कृति विविधा अहिंसा और शान्ति का पैगाम है मोहर्रम October 19, 2015 by शाहिद नकवी | Leave a Comment इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मोहर्रम शुरु होते ही पूरे विश्व में इमाम हुसैन की शहादत की वह दास्तां दोहाराई जाती है जो आज से साढ़े 14 सौ साल पूर्व इराक के करबला शहर में पेश आई थी। यानी पैगम्बर हज़रत मोहम्मद के नाती हज़रत इमाम हुसैन व उनके परिवार के 72 सदस्यों का तत्कालीन […] Read more » Featured अहिंसा और शान्ति का पैगाम है मोहर्रम