धर्म-अध्यात्म लेख मेरे मानस के राम – अध्याय 14 July 21, 2024 / July 22, 2024 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment सुग्रीव और राम की मित्रता बालि वध के पश्चात सुग्रीव का राज्याभिषेक किया गया। तब श्री राम ने सुग्रीव से कह दिया कि इस समय चौमासा पूरे देश में फैल गया है। इस समय बीहड़ जंगलों में जाकर सीता जी की खोज करना संभव नहीं है । चौमासा व्यतीत होने के उपरांत सीता जी के […] Read more » सुग्रीव और राम की मित्रता
धर्म-अध्यात्म लेख मेरे मानस के राम – अध्याय 13 July 20, 2024 / July 22, 2024 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment सुग्रीव का राजतिलक जब बाली का अंत हो गया तो उसकी मृत्यु की सूचना उसकी पत्नी तारा को प्राप्त हुई। तब वह विलाप करती हुई अपने पति के शव के पास आ पहुंची। तारा बहुत ही विदुषी महिला थी। उसे राजनीति का गहरा ज्ञान था। कूटनीति की वह महान पंडिता थी।उसने अपने पति को अपने […] Read more » सुग्रीव का राजतिलक
धर्म-अध्यात्म लेख ईश्वर-तुल्य गुरु जीवन को नया घाट देते हैं July 19, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment गुरु पूर्णिमा- 21 जुलाई 2024 पर विशेष-ललित गर्ग- गुरु पूर्णिमा का भारतीय संस्कृति सर्वोपरि महत्व है, यह गुरु-पूजन का पर्व है। सन्मार्ग एवं सत-मार्ग पर ले जाने वाले महापुरुषों के पूजन का पर्व, जिन्होंने अपने त्याग, तपस्या, ज्ञान एवं साधना से न केवल व्यक्ति को बल्कि समाज, देश और दुनिया को भवसागर से पार उतारने […] Read more » गुरु पूर्णिमा- 21 जुलाई 2024
धर्म-अध्यात्म मीडिया लेख चातुर्मास है संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर July 16, 2024 / July 16, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment चातुर्मास शुभारंभ-17 जुलाई 2024 पर विशेष-ललित गर्ग- भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में चातुर्मास का विशेष महत्व है। विशेषकर वर्षाकालीन चातुर्मास का। हमारे यहां मुख्य रूप से तीन ऋतुएँ होती हैं- ग्रीष्म, वर्षा और शरद। वर्ष के बारह महीनों को इनमें बॉंट दें, तो प्रत्येक ऋतु चार-चार महीने की हो जाती है। वर्षा ऋतु के […] Read more » चातुर्मास
धर्म-अध्यात्म लेख मेरे मानस के राम – अध्याय 12 : सुग्रीव से मित्रता और बालि वध July 14, 2024 / July 12, 2024 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment कबंध ने अपनी पराजय के पश्चात श्री राम और लक्ष्मण जी को यह बताया था कि यदि वह अपने मनोरथ में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो उन्हें सुग्रीव नाम के वानर के साथ मित्रता करनी चाहिए। इंद्र पुत्र बाली ने क्रुद्ध होकर अपमानजनक ढंग से उसे राज्य से निकाल दिया है। वह वानर पंपा […] Read more » Friendship with Sugriva and Bali slaying Ram of my mind – Chapter 12: Friendship with Sugriva and Bali slaying
धर्म-अध्यात्म लेख मेरे मानस के राम- अध्याय 11 : जटायु , अयोमुखी और कबंध July 13, 2024 / July 12, 2024 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment जिस समय लंका का राजा रावण सीता जी को वायु मार्ग से अपहरण करके ले जा रहा था उस समय सीता जी विलाप करुण चीत्कार करती हुई जा रही थीं। वह मार्ग में अपना कोई कीमती आभूषण या कोई वस्त्र भी नीचे डाल रही थीं। जिससे रामचंद्र जी और लक्ष्मण जी जब उन्हें खोजते हुए […] Read more » अयोमुखी और कबंध मेरे मानस के राम- अध्याय 11 : जटायु
धर्म-अध्यात्म लेख मेरे मानस के राम – अध्याय 10 : शूर्पनखा की नाक काटना और सीता हरण July 12, 2024 / July 12, 2024 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment इसी वन में रहते हुए लंका के रावण की बहन शूर्पनखा से श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण जी का सामना होता है। एक दिन वह राक्षसिन स्वयं ही उनके आश्रम में आ पहुंचती है। वह श्री राम और लक्ष्मण को देखते ही उन पर आसक्त हो गई। तब वह काम भावना से प्रेरित होकर […] Read more » शूर्पनखा की नाक काटना और सीता हरण
धर्म-अध्यात्म लेख मेरे मानस के राम -अध्याय 9 July 11, 2024 / July 11, 2024 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment ऋषि अगस्त्य और जटायु से भेंट ऋषि शरभंग के आश्रम के पश्चात श्री राम सुतीक्ष्ण ऋषि के आश्रम में पहुंचे। सायं काल को श्री राम ने संध्योपासन किया। तब महात्मा सुतीक्ष्ण ने सीता सहित राम लक्ष्मण को रात्रि में खाने योग्य पवित्र फल, मूल तथा अन्न आदि सत्कार पूर्वक स्वयं लाकर दिए। श्री राम ने […] Read more »
धर्म-अध्यात्म लेख मेरे मानस के राम – अध्याय 8 July 10, 2024 / July 10, 2024 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment महर्षि अत्रि और शरभंग के आश्रम में श्री राम वन में रहते हुए सीता जी और लक्ष्मण जी के साथ चित्रकूट से आगे के लिए प्रस्थान करते हैं। वाल्मीकि जी कहते हैं कि चित्रकूट में रहते हुए श्री राम जी इस बात का अनुभव रह रहकर कर रहे थे कि इस स्थान पर मेरा भाई […] Read more » Ram of my mind - Chapter 8
धर्म-अध्यात्म लेख मेरे मानस के राम – अध्याय 6 July 8, 2024 / July 8, 2024 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment भरत का वन के लिए प्रस्थान अगले दिन भरत जी के राज्याभिषेक की तैयारी का आदेश वशिष्ठ जी की ओर से जारी हुआ। विधि के अनुसार विद्वानों ने भरत जी का मंगल गान करना आरंभ कर दिया। जब भरत की को इसकी जानकारी मिली तो वह अत्यंत दु:खी हुए । उन्होंने स्वयं ने उस मंगलगान […] Read more »
धर्म-अध्यात्म लेख मेरे मानस के राम – अध्याय 5 July 7, 2024 / July 8, 2024 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राम का वन गमन और भरत जब रानी कैकेई ने हठ करते हुए अपने निर्णय से राजा दशरथ को अवगत कराया तो वह हतप्रभ रह गए। उन्हें जिस बात की आशंका थी, वही उनके सामने आ चुकी थी। इसके उपरांत भी कहीं ना कहीं वह मान रहे थे कि रानी इतनी निष्ठुर नहीं हो सकती, […] Read more » मेरे मानस के राम
धर्म-अध्यात्म लेख मेरे मानस के राम – अध्याय 4 July 6, 2024 / July 8, 2024 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राम को युवराज बनाने की तैयारी जिस समय रामचंद्र जी को युवराज बनाने का संकल्प उनके पिता दशरथ ने लिया, उस समय भरत अपने ननिहाल में थे।कई लोगों ने इस बात पर शंका व्यक्त की है कि जिस समय भरत ननिहाल में थे ,उसी समय राजा ने रामचंद्र जी को युवराज बनाने का संकल्प क्यों […] Read more »