धर्म-अध्यात्म दवा के नाम पर ज़हर बन चुकी थी हज सब्सिडी/इक़बाल हिंदुस्तानी May 11, 2012 / May 11, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 1 Comment on दवा के नाम पर ज़हर बन चुकी थी हज सब्सिडी/इक़बाल हिंदुस्तानी 0 मुसलमानों को नहीं सरकारी कारिंदों को फायदा पहुंच रहा था! सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह दस साल के भीतर मुसलमानों को हजयात्रा के दौरान दी जाने वाली सब्सिडी ख़त्म करे। यह संभवतया पहला मौका है कि किसी वर्ग की सब्सिडी ख़त्म होने का उसी वर्ग द्वारा न केवल स्वागत […] Read more » हज सब्सिडी
धर्म-अध्यात्म इस्लाम और ज़िहाद May 10, 2012 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment विपिन किशोर सिन्हा अपने आरंभिक दिनों में इस्लाम धर्म एक उदारवादी, सुधारवादी, मानवतावादी और प्रगतिशील धर्म के रूप में दुनिया के सामने आया। यही कारण था कि अत्यन्त अल्प समय में यह विश्वव्यापी हो गया। यह सत्य है कि इसके विस्तार के लिए सत्ता और तलवार का सहारा लिया गया लेकिन यह भी सत्य है […] Read more » इस्लाम जेहाद
धर्म-अध्यात्म अजब बाबाओं का गजब धर्मयुद्ध April 30, 2012 by डॉ0 शशि तिवारी | 1 Comment on अजब बाबाओं का गजब धर्मयुद्ध डॉ. शशि तिवारी भारत प्रारंभ से ही साधु-संत फकीर, ऋषि मुनियों की भूमि रहा है! अध्यात्म-ज्ञान के क्षेत्र में भारत का पूरे विश्व में एक अलग ही स्थान है, फिर बात चाहे भगवान राम, कृष्ण महावीर ही क्यो न हो, पूरे विश्व में हर एक शांति की खोज में लगा हुआ है! निःसंदेह आत्मिक शांति […] Read more » अंधविश्वास
चिंतन पालतू होकर आका बदलते रहें April 29, 2012 / April 29, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य मस्ती चाहें तो स्वाभिमान से रहें वरना पालतु होकर आका बदलते रहें जीवन का सबसे बड़ा दर्शन है आनंद से जीवनयापन और मानवीय लक्ष्यों की पूर्णता। इसके लिए विभिन्न मार्ग हैं जिन पर चलकर आनंदमय जीवन जीया जा सकता है। एक मार्ग परम्परा से चला आ रहा है और वह है ईश्वरीय […] Read more » पालतु होकर आका बदलते रहें स्वाभिमान से रहें
चिंतन परायेपन का अहसास April 26, 2012 / April 26, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य परायी सामग्री देती है परायेपन का अहसास जो अपना है वही दे सकता है अपनेपन का अहसास। जो पराया है उसे अपनाने पर जीवन के हर क्षण में परायेपन का अहसास होता है। यहाँ बात किसी व्यक्ति के बारे में नहीं बल्कि सामग्री के बारे में की जा रही है। पुरुषार्थ से […] Read more » परायेपन का अहसास
चिंतन वर्तमान को प्रसन्नता से स्वीकारें April 26, 2012 / April 26, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 1 Comment on वर्तमान को प्रसन्नता से स्वीकारें डॉ. दीपक आचार्य वर्तमान को प्रसन्नता से स्वीकारें भविष्य की आशंकाओं से मुक्त रहे जो लोग आज को सामने रखकर प्रसन्नता का भाव रखते हैं वे जीवन में भविष्य की समस्याओं से मुक्त रहते हैं। जिसका वर्तमान अच्छा होता है उसका भविष्य अपने आप अच्छा होता चला जाता है। इसलिए वर्तमान की प्रत्येक घटना को […] Read more » be happy in present वर्तमान को प्रसन्नता से स्वीकारें
चिंतन औरों पर न थोपें अपनी कार्यशैली दूसरों की मौलिकता को भी दें आदर April 24, 2012 / April 24, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment – डॉ. दीपक आचार्य जब से आत्म मूल्यांकन, चिंतन और विश्लेषण की प्रवृत्तियाँ समाप्त हो चली हैं, हमारे यहाँ हर क्षेत्र में स्वयं को महानतम बुद्धिमान और योग्यतम समझने का शौक दूर-दूर तक अपने पाँव पसार चुका है। कहीं भी आदमी की योग्यता की कोई कसौटी नहीं रही। व्यक्तित्व की ऊँचाइयों को दर्शाने वाले मानदण्ड […] Read more » conclusion चिंतन मूल्यांकन विश्लेषण
चिंतन दुर्भाग्य के साये में जीते हैं पेढ़ियों पर बैठने वाले April 24, 2012 / April 24, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment – डॉ. दीपक आचार्य हमारा बैठना-उठना भी हमारे व्यक्तित्व और भविष्य का संकेत देता है। आम तौर पर मनुष्य को निरन्तर कर्मशील रहना चाहिए और जो ऐसा नहीं कर पाते हैं और समय गुजारने के लिए अवसर और स्थान तलाशते रहते हैं वे अपने जीवन के अमूल्य क्षणों को खो देते हैं और टाईमपास जिन्दगी […] Read more » badluck दुर्भाग्य
चिंतन समस्याओं के वक्त स्नेह का सम्बल दें, उपेक्षा और प्रताड़ना का भाव त्यागें April 24, 2012 / April 24, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 1 Comment on समस्याओं के वक्त स्नेह का सम्बल दें, उपेक्षा और प्रताड़ना का भाव त्यागें – डॉ. दीपक आचार्य समस्याएँ हर किसी के जीवन में सामने आती हैं। मनुष्य के जीवन में समस्याओं और इच्छाओं का कोई अंत नहीं है ये सागर की तरह गहरी और आसमान की तरह विराट व्यापक हैं। कई पीड़ाएं और समस्याएं पूर्व जन्मों के कर्मों का परिणाम होती हैं तो कुछ वर्तमान जन्म के असंयम […] Read more » problems wishes इच्छाओं समस्याओं
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म वर्तमान समय में राम की प्रासांगिकता April 23, 2012 by राजीव गुप्ता | 2 Comments on वर्तमान समय में राम की प्रासांगिकता राजीव गुप्ता विश्व गुरु बनने का सपना संजोने वाली अधिकांश भारतीय संततियों का ध्येय जब अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए राष्ट्र हितों के मानक मूल्यों से समझौता करने तक की तरफ अग्रसर होने लगे तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या हमने अब अपने पुरखों की दी हुए विरासत को नीलाम करना शुरू कर […] Read more » importance of ram in present scenario राम की प्रासांगिकता
धर्म-अध्यात्म कट्टरपंथी अपने ही संप्रदाय के दुश्मन ! April 22, 2012 by तनवीर जाफरी | 1 Comment on कट्टरपंथी अपने ही संप्रदाय के दुश्मन ! तनवीर जाफरी पूरी दुनिया में इन दिनों उदारवाद बनाम कट्टरपंथ रूपी एक विश्वव्यापी बहस छिड़ी हुई है। तमाम कट्टरपंथी व रूढ़ीवादी अपने अपने स प्रदायों (धर्मों)को सर्वोच्च या सर्वोपरि बताने की होड़ में लगे हैं। वैसे तो इस बात में कोई हर्ज भी नहीं है यदि कोई व्यक्ति अपने धर्म, विश्वास अथवा संप्रदाय को उत्तम […] Read more » कट्टरपंथी
चिंतन शांत चित्त ही दे सकता है सुकून April 22, 2012 / April 22, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य शोरगुल में रमना पागलपन से कम नहीं, आज का सफर कई जोखिमों से भरा हो चला है। जोखिम बाहर के भी हैं और भीतर के भी। कई जोखिम दुर्भाग्यजनित हैं तो कई मानवजनित। अनायास आ टपकने वाले जोखिमों के बारे में कोई कुछ नहीं कर सकता मगर मानवजनित हरकतें खतरनाक से कम […] Read more » be quiet and peaceful