चिंतन बापू और शास्त्री को जीवन में उतारना October 2, 2012 / October 2, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 1 Comment on बापू और शास्त्री को जीवन में उतारना याद करने से ज्यादा जरूरी है बापू और शास्त्री को जीवन में उतारना डॉ. दीपक आचार्य आज का दिन राष्ट्रपति महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुरशास्त्री के नाम समर्पित है। हम दशकों से कई सारे कार्यक्रमों का आयोजन कर एक दिन इन्हें भरपूर याद कर लिया करते हैं। इस एक दिन में हम दोनों को […] Read more »
चिंतन धर्म-अध्यात्म हम धार्मिक हैं कहां, धर्म का केवल ढोंग ही तो करते हैं! September 15, 2012 / September 15, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इक़बाल हिंदुस्तानी भगवान का डर होता तो क्या उसके बताये रास्ते पर नहीं चलते? तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा ने हम भारतीयों पर बड़ा सामयिक सवाल उठाया है कि जब हम लोग धार्मिक हैं और भगवान से डरते हैं तो फिर कैसे पूजापाठ के साथ भ्रष्टाचार भी करते हैं? यह बात धर्मगुरू ने लद्दाख़ दौरे के […] Read more » धर्म का केवल ढोंग
चिंतन कर्मधारा में स्पीड ब्रेकर न बनें September 13, 2012 / September 13, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment कर्मधारा में स्पीड ब्रेकर न बनें खुद करें या औरों को करने दें डॉ. दीपक आचार्य आजकल कर्मयोग की धाराएं प्रदूषित होती जा रही हैं। कार्यसंस्कृति का जबर्दस्त ह्रास होता जा रहा है और ज्यादातर लोग धन के मोह में न अपने कर्म से खुश हैं, न संतोषी। सभी को लगता है कि जो मिल […] Read more »
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म महत्वपूर्ण लेख साहित्य 300 रामायण : कथ्य और तथ्य September 11, 2012 / September 12, 2012 by डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री | 1 Comment on 300 रामायण : कथ्य और तथ्य डॉ. रवीन्द्र अग्निहोत्री राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है , कोई कवि बन जाए सहज संभाव्य है . – राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त कुछ समय पहले अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो के प्रोफ़ेसर , ए के रामानुजन ( 1929 – 1993 ) के ‘ 300 Ramayanas ‘ शीर्षक लेख की चर्चा समाचारों में रही […] Read more » 300 ramayans 300 रामायण
चिंतन शिक्षा-दीक्षा की आदर्श परंपराएं संस्कारहीनता के आगे बौनी हो गई हैं September 10, 2012 / September 9, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 2 Comments on शिक्षा-दीक्षा की आदर्श परंपराएं संस्कारहीनता के आगे बौनी हो गई हैं डॉ. दीपक आचार्य शिक्षा-दीक्षा और संस्कार ये जीवन निर्माण के वे बुनियादी तत्व हैं जो व्यक्तित्व के विकास के लिए नितान्त अनिवार्य हैं और इनके संतुलन के बगैर न शिक्षा का महत्त्व है न संस्कारों का। अकेली शिक्षा-दीक्षा और अकेले संस्कारों से व्यक्तित्व के निर्माण और जीवन निर्वाह की बातें केवल दिवा स्वप्न ही हैं। […] Read more » शिक्षा-दीक्षा की आदर्श परंपराएं
चिंतन जो किसी के नहीं हो सकते,वे हो जाते हैं कभी इनके, कभी उनके September 1, 2012 / September 1, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉं. दीपक आचार्य आज सबसे ज्यादा भरोसा जिस पर से उठने लगा है वह है आदमी। पहले का आदमी नीयत का जितना साफ-सुथरा, सहज और शुद्ध-बुद्ध होता था, उतना आज का आदमी नहीं। उस जमाने का आदमी मन-वचन और कर्म से एकदम स्पष्ट था, उसकी वाणी और आचरण में साम्यता थी और वो जो कहता […] Read more »
चिंतन पीढ़ियाँ करती हैं जयगान सृजन के इतिहास का August 31, 2012 / August 31, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ . दीपक आचार्य रचनात्मक प्रवृत्तियाँ और सृजन धर्म हमेशा सर्वोपरि महत्त्व रखता है और यही वह कारण है जो समाज और परिवेश को युगों और सदियों तक जीवन्त बनाये रखते हुए यादगार रहता है। बात चाहे बुनियादी जरूरतों की सहज उपलब्धता की हो या सुख-सुविधाओं और स्वाभिमानी जीवन निर्वाह के लिए जरूरी संसाधनों की। […] Read more »
धर्म-अध्यात्म कहाँ गया देश का धर्मनिरपेक्ष चरित्र? August 30, 2012 by हिमकर श्याम | 2 Comments on कहाँ गया देश का धर्मनिरपेक्ष चरित्र? हिमकर श्याम देश की एकता और अखंडता के सामने आज जितनी बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है, उतनी इसके पहले कभी नहीं थी। सत्ता की राजनीति ने एकता के सूत्रों को न सिर्फ कमजोर किया है बल्कि उसे अपने फायदे के लिए तहस-नहस भी किया है। सहिष्णुता का झीना आवरण उतरता और धर्मनिरेपक्ष भारत का […] Read more » धर्मनिरपेक्षता
धर्म-अध्यात्म साहित्य द्रोपदी के पांच पति थे या एक: क्या कहती है महाभारत? August 30, 2012 / August 30, 2012 by राकेश कुमार आर्य | 12 Comments on द्रोपदी के पांच पति थे या एक: क्या कहती है महाभारत? -राकेश कुमार आर्य द्रोपदी महाभारत की एक आदर्श पात्र है। लेकिन द्रोपदी जैसी विदुषी नारी के साथ हमने बहुत अन्याय किया है। सुनी सुनाई बातों के आधार पर हमने उस पर कई ऐसे लांछन लगाये हैं जिससे वह अत्यंत पथभ्रष्ट और धर्म भ्रष्ट नारी सिद्घ होती है। एक ओर धर्मराज युधिष्ठर जैसा परमज्ञानी उसका पति […] Read more » द्रोपदी के पांच पति थे
चिंतन न करें उत्सवी परम्पराओं की हत्या August 29, 2012 / August 29, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य न करें उत्सवी परम्पराओं की हत्या सामाजिक सांस्कृतिक हों या परिवेशीय भारतीय संस्कृति की तमाम परंपराएं वैज्ञानिकता की कसौटी पर इतनी खरी और ऋषि-मुनियों द्वारा परखी हुई हैं कि जब तक उनका अवलम्बन होता रहेगा, तब तक मानवी सृष्टि को किसी भी बाहरी आपदाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। बात धार्मिक, आध्यात्मिक, […] Read more »
चिंतन पराभव के दिनों का आगमन August 25, 2012 / August 27, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य सज्जनों से दूरी का मतलब है पराभव के दिनों का आगमन हमारा जीवन सिर्फ अपनी आत्मा और शरीर से ही संबंध नहीं रखता है बल्कि हमारे आस-पास रहने वाले लोग और परिवेशीय हलचलें भी हमारे जीवन से जुड़े कई महत्त्वपूर्ण पहलुओं में निर्णायक साबित होती हैं और इन्हीं के आधार पर हमारे […] Read more »
धर्म-अध्यात्म महत्वपूर्ण लेख हिंदू-मुस्लिम साझी विरासत August 22, 2012 / August 24, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 7 Comments on हिंदू-मुस्लिम साझी विरासत क्या आप हमारी इस साझी विरासत के बारे में जानते हैं जिसमें हिन्दू धर्म व इस्लाम में सांस्कृतिक समावेश और मेलजोल के कुछ अनोखे उदाहरण मिलते हैं जैसे: 1. अवध के नवाब तेरह दिनों तक होली मनाते थे। नवाब वाजिद अली शाह के दरबार में कृष्ण रासलीला खेली जाती थी। भगवान हनुमान के सम्मान के […] Read more » हिंदू-मुस्लिम साझी विरासत