चुनाव

चुनाव, election

चुनाव विश्लेषण : तथ्य जो नज़रअंदाज किये गए

अभी -अभी हमारे गणतंत्र या लोकतंत्र अथवा प्रजातंत्र जो भी कहें , क्योंकि वो बस कहने भर को हमारा है बाद बाकि इसकी आत्मा अर्थात संविधान तो आयातित ही है ना , का कुम्भ समाप्त हुआ है । वैसे तो यह कुम्भ मेला कम अखाडा ज्यादा लगता है पर अखाड़े की धुल मिटटी की जगह यहाँ भ्रष्टाचार के कीचड़ उछाले जाते हैं । आशंकाओं के विपरीत कांग्रेस का २०० सीटों पर जीत कर आना और यूपीए द्वारा बहुमत से सरकार बनाये जाने पर लोग खुश नजर आ रहे है।

लोकसभा चुनावों के बारे में तथ्य

चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या में महत्वपूर्ण वृद्धि नज़र आई है। 1952 के पहले आम चुनावों में 489 सीटों के लिए 1,864 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे जिनकी संख्या 1971 के आम चनावों में 2,784 तथा 1980 में यह संख्या बढ़कर 4,620 हो गई।

पीलीभीत की जनता देगी मेरी मां के आंसुओं का जवाब: वरुण गांधी

भावुक होते हुए वरुण गांधी ने कहा कि 29 साल के जीवन में मैंने पहली बार अपनी मां को रोते हुए देखा, जब वह मुझसे मिलने एटा जेल आई थीं। उन्‍होंने कहा कि मेरी मां के आंसुओं का जवाब पीलीभीत की जनता देगी।

गुजरात में जोर पकड रहा है भ्रष्टाचार और काला धन का मुद्दा

‘देश के बाहर गये काले धन की पाई-पाई हम वापस लेकर आयेंगे’ मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की इस उद्धोषणा के आगे कांग्रेस आक्रामक होकर भाजपा को भ्रष्टाचार में लिप्त और काले धन की पोषक पार्टी के उपमे से नवाजती है।