चुटकुले शुगर फ्री March 12, 2013 / March 12, 2013 by बीनू भटनागर | 2 Comments on शुगर फ्री हम हाल ही मे केरल यात्रा पर गये थे।वहाँ अक्सर रैस्टोरैंट मे क्या चाहिये समझाने मे दिक्कत होती थी टूटी फूटी हिन्दी और टूटी फूटी इंगलिश मे एक एक शब्द अलग अलग करके समझाना पड़ता था।चाय और कौफी मे हम चीनी कम पीते हैं, दूध भी कम डालते हैं । एक जगह हमने कहा टी, […] Read more » शुगर फ्री
चुटकुले आर यू रैड्डी ? February 21, 2013 / February 21, 2013 by बीनू भटनागर | 3 Comments on आर यू रैड्डी ? बीनू भटनगर श्री माथुर और श्री राचनद्रन पड़ौसी थे। एक ही समय एक ही दफ़्तर मे जाना होता था। काफ़ी दिनो से दोनों एक ही कार मे जाने लगे थे।रास्ता अच्छा कट जाता था ,पैट्रोल की बचत के साथ पर्यावरण सुरक्षा की ओर बढ़ाया एक क़दम भी था। श्री राचनद्रन का रोज़ का नियम था […] Read more » आर यू रैड्डी ?
सिनेमा अभिव्यक्ति की आज़ादी को वोटबैंक से तोल रही है सरकारें ? February 7, 2013 / February 7, 2013 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 3 Comments on अभिव्यक्ति की आज़ादी को वोटबैंक से तोल रही है सरकारें ? इक़बाल हिंदुस्तानी खाप पंचायतों और मज़हबी कट्टरपंथियों को कानून का डर नहीं! फिल्म कलाकार कमल हासन की विवादित फिल्म विश्वरूपम हालांकि कुछ दिन विवाद के बाद तमिलनाडु में भी रिलीज़ हो गयी लेकिन फिल्म संेसर बोर्ड से पास होने के बावजूद जिस तरह से कट्टरपंथियों के दबाव में खुद जयललिता सरकार ने हाईकोर्ट में कानून […] Read more » अभिव्यक्ति की आज़ादी को वोटबैंक से तोल रही है सरकारें ?
जन-जागरण सिनेमा विश्वरूपम का विरोध February 7, 2013 by विपिन किशोर सिन्हा | 1 Comment on विश्वरूपम का विरोध अमूमन मैं नई फिल्में नहीं देखता। बेटे की अनुशंसा पर मैंने आमिर खान की दो फिल्में – ‘थ्री इडियट्स’ और ‘तारे जमीं पर’ देखी थी। दोनों फिल्में बहुत अच्छी थीं। आमिर खान के बारे में मेरे मन में अच्छी धारणा बनी। मुझे ऐसा लगा कि राज कपूर के बाद हिन्दी फिल्म उद्योग में एक ऐसा […] Read more » विश्वरूपम का विरोध
महिला-जगत सिनेमा धार्मिक पाखंडों और रुढ़ियों पर चोट करती फ़िल्म ‘ओ माइ गॉड’ – सारदा बनर्जी February 6, 2013 / February 6, 2013 by सारदा बनर्जी | 2 Comments on धार्मिक पाखंडों और रुढ़ियों पर चोट करती फ़िल्म ‘ओ माइ गॉड’ – सारदा बनर्जी स्त्रियों का एक बड़ा सेक्शन है जिनका धार्मिक रुढ़ियों और आडम्बरों से बहुत आत्मीयता का संबंध है। खासकर बुज़ुर्ग महिलाओं का विभिन्न तरह के धार्मिक पाखंडों से रागात्मक संबंध आज भी बना हुआ है। इन धार्मिक छल-कपटों में बेइंतिहा भरोसा रखने वाली स्त्रियों को ज़रुर ‘ओ माइ गॉड’ फ़िल्म देखनी चाहिए। ‘ओ माइ गॉड’ विभिन्न […] Read more »
सिनेमा विश्वरूपम को लेकर उठा विवाद – कुलदीप चंद अग्निहोत्री February 2, 2013 / February 2, 2013 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | 4 Comments on विश्वरूपम को लेकर उठा विवाद – कुलदीप चंद अग्निहोत्री कमल हासन ने अपनी सारी जमा पूँजी लगा कर एक फ़िल्म बनाई विश्वरूपम । एक मोटे अनुमान के अनुसार भी इस फ़िल्म के निर्माण में उनका लगभग सौ करोड़ रुपया लग गया । फ़िल्म आतंकवाद को लेकर एक जासूसी कहानी है , इसलिये इसमें अफ़ग़ानिस्तान भी आता है । अफ़ग़ानिस्तान पिछले लम्बे अरसे से […] Read more »
खेल जगत किस दिशा में जा रही है टीम इंडिया January 11, 2013 / January 11, 2013 by देवेन्द्र शर्मा | Leave a Comment देवेन्द्र शर्मा इंग्लैण्ड से टेस्ट सीरीज हारने के बाद इंडिया अपने चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान से वन डे सीरीज भी हार गया। इंडिया ने भले ही तीसरा और अंतिम वन डे जीत अपनी लाज बचा ली हो लेकिन इतना तो तय है कि भारतीय टीम का सितारा इस समय डूबा हुआ है। इंडिया टीम अपनी दिशा […] Read more »
खेल जगत खेल जगत की खट्टी-मीठी यादों के साथ बिदा हुआ 2012 December 31, 2012 / December 31, 2012 by देवेन्द्र शर्मा | Leave a Comment देवेन्द्र शर्मा साल 2012 अलविदा कह रहा है और नया साल 2013 शुरू होने ही वाला है। साल 2012 भारत के लिए खेल के लिहाज से खास रहा। इस साल भारत में कई नई क्रिकेट खिलाडिय़ों का उदय हुआ वहीं कुछ पुराने क्रिकेट खिलाडिय़ों ने इस साल खेल को अलविदा कहा। इसी साल लंदन में […] Read more » articlesrelated to games
खेल जगत सचिन ने लिया वन डे से संन्यास December 25, 2012 / December 25, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment देवेन्द्र शर्मा दो दशक से भी ज्यदा क्रिकेट जगत पर राज करने वाले क्रिकेट के भगवान ने अंतत: वन डे क्रिकेट को अलविदा कह दिया। सचिन तेंदुलकर के एक दिवसीय क्रिकेट से संन्यास लेने से निश्चित तौर पर दुनिया भर के गेंदबाजों ने राहत की सांस ली होगी जो कभी सचिन को गेंद करने से […] Read more »
खेल जगत सचिन की नीयत पर सवाल उठाने वाले मूर्ख December 15, 2012 / December 15, 2012 by बी.पी. गौतम | 1 Comment on सचिन की नीयत पर सवाल उठाने वाले मूर्ख -बी.पी. गौतम दुनिया को रंगमंच की तरह देखा जाए, तो यहाँ प्रत्येक इंसान रंगमंच की तरह ही भूमिका निभाता नज़र आता है। प्रत्येक इंसान के ऊपर अपनी भूमिका को बेहतर ढंग से निभाने का स्वाभाविक दबाव रहता है। जानबूझ कर कोई असफल नहीं होना चाहता, फिर भी कुछ लोग कुछ भूमिकाओं को बेहतर ढंग से […] Read more » सचिन की नीयत पर सवाल उठाने वाले मूर्ख
सिनेमा सिनेमा और जनमानस का मनोविज्ञान – डॉ. प्रेरणा चतुर्वेदी December 15, 2012 / December 15, 2012 by डॉ.प्रेरणा चतुर्वेदी | Leave a Comment सिनेमा वर्तमान युग में समस्त कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यमों में सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। किसी भी जाति, धर्म ,वर्ग , संस्कृति के लोगों को सीधे प्रभावित करने में यह समर्थ है। दृश्य एवं श्रव्य माध्यम के साथ ही कथा, अभिनय , संवाद, संगति, वातावरण सबके सहयोग से यह दर्शकों तक कोई भी संदेश […] Read more » जनमानस का मनोविज्ञान सिनेमा
सिनेमा महात्मा गांधी और सिनेमा -डॉ. मनोज चतुर्वेदी December 15, 2012 / December 15, 2012 by डॉ. मनोज चतुर्वेदी | Leave a Comment एक ऐसे व्यक्ति का नाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी है जिन्होंने भारत की मुक्ति का मंत्र ही नही दिया था बल्कि भारत के द्वारा संपूर्ण विश्व में स्वतंत्रता ,समानता ,अपरिग्रह, भ्रातृत्व ,सत्य, आहिंसा, सत्याग्रह, एवं मानव-मूल्यों पर स्थापित एक ऐसे समाज का स्वरूप दिया था जिसमें किसी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म , भाषा और नस्ल […] Read more » महात्मा गांधी और सिनेमा