विश्ववार्ता

बराक हुसैन ओबामा भी इंडियन स्टाइल सेकुलरिज़्म की चपेट में?

यदि बराक हुसैन ओबामा वाकई इस्लामिक कट्टरपंथियों से निपटना चाहते हैं तो उन्हें बहुसंख्यक उदारवादी मुस्लिमों को बढ़ावा देना चाहिये, उदारवादी मुस्लिम निश्चित रूप से संख्या में बहुत ज्यादा हैं, लेकिन चूंकि उन्हें सरकारों का नैतिक समर्थन नहीं मिलता इसलिये कट्टरपंथियों द्वारा वे पीछे धकेल दिये जाते हैं। ज़रा कल्पना कीजिये कि यदि तीन-चौथाई बहुमत से जीते हुए राजीव गाँधी, शाहबानो मामले में आरिफ़ मोहम्मद खान के समर्थन में डटकर खड़े हो जाते तो न सिर्फ़ मुस्लिम महिलाओं के दिल में उनके प्रति छवि मजबूत होती, बल्कि कट्टरपंथियों के हौसले भी पस्त हो जाते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।