कविता सरस्वती वंदना January 13, 2020 / January 13, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment हम मानुष जड़मति तू मां हमारी भारती आशीष से अपने प्रज्ञा संतति का संवारती तिमिर अज्ञान का दूर करो मां वागीश्वरी आत्मा संगीत की निहित तुझमें रागेश्वरी वाणी तू ही तू ही चक्षु मां वीणा-पुस्तक-धारिणी तू ही चित्त बुद्धि तू ही कृपा करो जगतारिणी विराजो जिह्वा पे धात्री हे देवी श्वेतपद्मासना क्षमा करो अपराधों को […] Read more » सरस्वती वंदना
कविता साहित्य काश हर घर आँगन हो January 10, 2020 / January 10, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment कितना अच्छा था जब हम बच्चे थे तब घर के आँगन में इकट्ठा हो जाता था पूरा परिवार। कैलाश,शंकर, विनिया चन्दा आँगन में खूब मस्ती करते थे तब आँगन किसी खेल के मैदान से कमतर नहीं था जिसमें समा जाता था सारा मोहल्ला घर-द्वार। मकान से जुड़ा हुआ आँगन आँगन से बाहर तक घर का […] Read more »
कविता जीवन का अधूरापन January 10, 2020 / January 10, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment मुझे याद है प्रिय शादी के बाद तुम दूर-बहुत दूर थी मैं तुम्हारे वियोग में दो साल तक अकेला रहा हॅू। बड़ी शिद्दत के बाद तुम आयी थी तुम्हारे साथ रहते तब दिशायें मुझे काॅटती थी और तुम अपनी धुन में मुझसे विलग थी। तुम्हारा पास होना अक्सर मुझे बताता जैसे जमीन-आसमान गले मिलने को […] Read more »
कविता नवा साल मंगल होय, दुइ हजार बीस।। January 9, 2020 / January 9, 2020 by अजय एहसास | Leave a Comment जे कबहू ना बोलत रहा, रहा दूरि अउ चाहे नियर आज ऊहै कहत बाटै, हैप्पी न्यू इयर ह्वाटस्अप पै मैसेज देय, हाथ जोड़ि सिम्बल दुइ हजार उन्निस मा, बन्द रहा बोलचल बिटवा कहै बाप से तू बाटा उन्नीस ता हम बाटी बीस नवा साल मंगल होय, दुइ हजार बीस।। केहू रहै भूखा नंगा, फटेहाल भीखमंगा […] Read more » नवा साल मंगल होय
कविता समय की मार।। January 9, 2020 / January 9, 2020 by अजय एहसास | Leave a Comment जिस्म मेरा यूं समय से लड़ रहा है सांसों को भी आजमाना पड़ रहा है आजमाना चाहूं गर जीवन को मैं स्वयं को भी भूल जाना पड़ रहा है। जिनकी आंखों मे भरी है नफरतें उनसे भी आँखें मिलाना पड़ रहा है दूसरों को सौंपता हूं खुद को जब तब स्वयं से दूर जाना पड़ […] Read more »
कविता साहित्य अब तो पुरानी यादे रह गयी January 9, 2020 / January 9, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मिस्सी रोटी मक्खन वाली,छाछ मलाई चली गयी | खाट खटोला पटरा पटरी,दरी चटाई चली गयी || भाई बहन की धमाचौकड़ी,मार पिटाई चली गयी | ढोलक घुंघरू गीत ठठोली,रोती बिदाई चली गयी || इन्तजार इकरार लुकाछिपी,प्रेम पत्र लिखाई चली गयी | सिर पर चुन्नी नीची नजरे,अब वे कहाँ ये चली गयी || कलम स्लेट पैन होल्डर,दवात […] Read more »
कविता ईश्वर को नौकर रख सकता है इंसान January 3, 2020 / January 3, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment जिस दिन ईश्वर ने अपना वसीयतनामा इंसान के नाम लिख दिया इंसान ने खोद डाली सारी खदानें सोना,चान्दी, हीरे-मौती निकाल कर अपनी तिजौरी भर ली। धरती की सारी सुरंगे स्वार्थी इंसान ने खोज ली और सारी तिजौरियों को बहुमूल्य रत्न भण्डारों से भर ली। उसने पहले नदियों के पानी को बेचा नदियों के किनारों की […] Read more » ईश्वर को नौकर रख सकता है इंसान
कविता छेदवाली नाव पर सवार पत्रकार January 3, 2020 / January 3, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment मुद्दत से चली आ रही पत्रकारिता की पुरानी कई छिद्रवाली नाव पर सवार है मेरे शहर के तमाम पत्रकार इस पुरानी नाव में कुछ छेद पार कर चुके लोगों ने तो कुछ छेद इस नाव पर सवार लोगों ने किये है। इस पुरानी नाव को चट्टानों के बीच भयंकर तूफानों को भी झेलना होता है […] Read more » पत्रकार
कविता नववर्ष का अभिनन्दन January 3, 2020 / January 3, 2020 by शकुन्तला बहादुर | Leave a Comment Read more » नववर्ष का अभिनन्दन
कविता कुछ ऐसा करो इस नूतन वर्ष January 2, 2020 / January 2, 2020 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment शिक्षा से रहे ना कोई वंचित संग सभी के व्यवहार उचित रहे ना किसी से कोई कर्ष कुछ ऐसा करो इस नूतन वर्ष भले भरत को दिलवा दो सिंहासन किंतु राम भी वन ना जायें सीता संग सबको समान समझो सहर्ष कुछ ऐसा करो इस नूतन वर्ष मिलें पुत्रियों को उनके अधिकार पर ना हों […] Read more » नूतन वर्ष
कविता क्यों हुये डाक्टर लुटेरा एक समान January 2, 2020 / January 2, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment ओ नाच जमूरे छमा-छम, सुना बात पते की एकदम हाथपैर में हड़कन होती है, सर में गोले फूटे धमा-धम आं छी जुकाम हुआ या सीने में दर्द करे धड़ाधड़क, छींकें गरजे तोपों सी या खून नसों में फुदकें फुदकफुदक मेरा जमूरा बतायेगा, क्यों डाक्टर लूटेरा नहीं किसी से कम सुन मेरे प्यारे सुकुमार जमूरे तेरी […] Read more » doctors have become looters क्यों हुये डाक्टर लुटेरा एक समान डाक्टर लुटेरा एक समान
कविता काल व्यूह से लड़ना होगा ! December 31, 2019 / December 31, 2019 by आलोक पाण्डेय | Leave a Comment यह पुण्य भूमि है ऋषियों की,जहां अभूतपूर्व वीरता त्याग की धारखंडित भारत आज खंड खंड ,दे रही चुनौती कर सहर्ष स्वीकार !दग्ध ज्वाल विकराल फैला,कर विस्तीर्ण विराट दिगंत पुकार,पुण्य भूमि से नीले वितान तकशत्रु दल में हो हा-हाकार !सभ्यता-संस्कृति प्रशस्त बिन्दु खातिर ,हर क्षण धधकती हो असिधार ,दृढ़ बलवती स्नायु भुजदंड अभय हो ,हाथों में […] Read more » काल व्यूह से लड़ना होगा !