कविता हिंदी की मुहावरे,बड़े ही बावरे है September 25, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment हिन्दी के मुहावरे,बड़े ही खरे है खाने पीने की चीजो से भरे है कही पर फल है कही पर आटा दाले है कही पर मिठाई है तो कही मसाले है चलो फलो से शुरू कर देते है उनका ही स्वाद चख लेते है कही आम के आम गुठली के दाम होते है जब अँगूर मिलते […] Read more » गुलगुले दूध नमक मुहावरे
कविता जीवन के कुछ कटु अनुभव September 25, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment पैर की मोच और छोटी सोच हमे आगे बढ़ने नहीं देती टूटी कलम दूसरो से जलन खुद को लिखने नहीं देती आलस्य और पैसो का लालच हमे महान बनने नहीं देता हम है उच्च दूसरे है नीच ये हमे इंसान नहीं बनने देता मिल जाती है दुनिया की सब चीजे पर अपनी गलती नहीं मिलती […] Read more » जीवन के कुछ कटु अनुभव शरीर साँसों
कविता एक दिन तो मुस्कुरा ले September 24, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment राकेश कुमार पटेल एक दिन तो मुस्कुरा ले कब तक याद रखेगा। इस गम को, कभी तो भुला ले एक दिन तो मुस्कुरा ले। देखी है ,कभी तूने दुनिया कितनी खुबसूरत है। कभी तो अपने आखों को जगा ले एक दिन तो मुस्कुरा ले। भटकता रहता है प्यार की चाह में तेरे अंदर ही प्यार […] Read more » इस गम को एक दिन तो मुस्कुरा ले कभी तो भुला ले
कविता जिन्दगी की कुछ सच्चाईयां September 22, 2018 / September 22, 2018 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on जिन्दगी की कुछ सच्चाईयां तू कल की फिकर में ऐ बन्दे ! आज की हंसी बर्बाद न कर हंस मरते हुए भी गाता है मोर नाचते हुए भी रोता है ये जिन्दगी का फंडा है दोस्त ! इसको हमेशा तू याद रखना दुखों वाली रात को भी नींद नहीं आती सुखो वाली रात को भी नींद नहीं आती ईश्वर […] Read more » आँख में आँसू ईश्वर जिन्दगी की कुछ सच्चाईयां फकीरों
कविता कब तक तुम भारत माँ के सपूतो के सिर कटवाते जाओगे September 21, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कब तक तुम भारत माँ के सपूतो के सिर कटवाते जाओगे कब तक तुम दुल्हनो की मांग के सिन्दूर पुछ्वाते जाओगे उठो जवानो अब तुमको गोली का जबाब गोली से देना होगा वर्ना तुमको खून के आँसुओ को पीकर भारत में रहना होगा कब तक तुम कितनी माँओ की गोदी सूनी करवाते जाओगे कब तक […] Read more » पाक भारत माँ राखी के धागो सिन्दूर
कविता अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आयेगा September 20, 2018 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आयेगा बंद कर दिया है सांपों को सपेरे ने यह कह कर अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आयेगा पल्ला झाड़ लेती है पुलिस जनता को यह कह कर अब गुंडा ही गुंडों को पकड़ने के काम आयेगा तोड़ लिये जाते है कच्चे फ्लो को यह कह कर कोई केमिकल ही उनके पकने के […] Read more » अब इंसान ही इंसान डसने के काम आयेगा
कविता एक गजल कशिश ए मोहब्बत पर September 19, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी कशिश ए मोहब्बत में हर एक चोट खाई हमने हुए जो तुमसे दूर तो सब दूरियां मिटाई हमने करीब थे इतने कि निकाल लें जान भी हंसकर एक बेरहम के लिए अपनी जान गवाई हमने मीठी यादो से हमारी भीग जाती पलकें हर रोज़ जलते चिरागों तले हर रात तनहा बिताई हमने […] Read more » कशिश दुआ मीठी यादो मोहब्बत
कविता अखिलता की विकल उड़ानों में ! September 19, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’ अखिलता की विकल उड़ानों में, तटस्थित होने की तरन्नुम में; उपस्थित सृष्टा सामने होता, दृष्टि आ जाता कभी ना आता ! किसी आयाम वह रहा होता, झिलमिला द्रश्य को कभी देता; ख़ुमारी में कभी वो मन रखता, चेतना चित्त दे कभी चलता ! कभी चितवन में प्रकट लख जाता, घुले सुर […] Read more » अखिलता की विकल उड़ानों में ! झिलमिला द्रश्य पंखुड़ी
कविता जिन्दगी की कुछ सच्चाईयां September 18, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी जो चाहा कभी पाया नहीं जो पाया कभी चाहा नहीं जो सोचा कभी मिला नहीं जो मिला कभी पाया नहीं जो मिला कभी रास आया नहीं जो रास आया कभी मिला नहीं जो पाया कभी वो सभाला नहीं जो संभाला कभी वो खोया नहीं अजीब सी पहेली ये जिन्दगी काटने से […] Read more » खुशी ग़म जिन्दगी की कुछ सच्चाईयां
कविता हवेली को दुख है September 17, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment विनोद सिल्ला मेरे पङौस की हवेली खाली पङी है अब तो शायद चूहों ने भी ठिकाना बदल लिया कभी यहाँ चहल-पहल रहती थी उत्सव सा रहता था लेकिन आज इसके वारिश कई हैं जो आपस में लङते रहते हैं संयुक्त परिवार टूटने का दुख इस हवेली को भी है Read more » हवेली को दुख है
कविता मोदी जी को जन्म दिवस की बधाई September 17, 2018 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on मोदी जी को जन्म दिवस की बधाई ते है बधाई हम सब भारतवासी मोदी जी जन्म दिवस की तुमको उन्नीस में जीत मिलेगी तुमको तब ख़ुशी मिलेगी हम सब को करते दुआ तुम जियो ह्जारो साल लिखे भारत का एक नया इतिहास जिससे जन जन हो अब विकास विश्व में भारत का फैले प्रकाश कैसे दे जन्म दिवस की बधाई ये भारत […] Read more » जाति धर्म मोदी जी को जन्म दिवस की बधाई
कविता नाज़ है हिंद पर September 15, 2018 by भारत भूषण | Leave a Comment भारत भूषण नाज़ है हिंद पर साज़ लोकतंत्र है ये चित्र चंचला बहुत धरा का प्रतिबिम्ब है नील नभ नई किरण आशा सी भोर ये शक्ति सी भर रही कुछ कह रही सुनो इसे खेत है हरा भरा हरियाली चहुंओर है उम्मीद से भरी बंधी ऐसे राजा का देश है बालिका इतरा रहीं लेगी जन्म […] Read more » नाज़ है हिंद पर प्रधान सेवक युगपुरूष लोकतंत्र