कविता
कविता-समय
/ by बीनू भटनागर
समय का, न आदि है न अंत, भ्रम होता है कभी, जैसे समय रुक गया हो, भ्रम होता है कभी, जैसे समय दौड़ता हो, पर समय, न रुकता है,न दौड़ता है, बस एक गति से चलता है। टिक टिक टिक टिक, एक ही लय मे, एक ही ताल, साठ मात्राये, बारह के अंक पर, सम […]
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