कविता आप तो गुलाब है,कभी बबूल न बनिए। May 4, 2022 / May 4, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आप तो गुलाब है,कभी बबूल न बनिए।दुनिया में आप,कभी बे असूल न बनिए।। अच्छा रास्ता,सभी को दिखाओ तुम।किसी के रास्ते का,तुम सूल न बनिए।। निमटा लो हर बात को ,तुम ख़ुद ही।किसी बात के लिए,तुम तूल न बनिए।। रक्खे याद तुम्हे,ये दुनिया अब सारी।किसी के लिए भी,तुम भूल न बनिए।। रोको किसी को मत,जो कही […] Read more » आप तो गुलाब है कभी बबूल न बनिए।
कविता सच में खुदा का सौवां नाम है नेक इंसान May 4, 2022 / May 4, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकनहीं हिन्दू बनो ना हीं मुसलमान बनो,ना किसी अनदेखे परखे को खुदा कहो! न राम को खोजो मंदिर के भगवान में,तुमसे अच्छा कोई राम हो सकता नहीं! खुदा अगर कोई है, तो खुद तुम ही हो,तुमसे अच्छा कोई खुदा हो सकता नहीं! अगर कोई राम हो सकता है तो बंधुओं,तुमसे अच्छा राम बन […] Read more » Truly the hundredth name of God is a noble person सच में खुदा का सौवां नाम है नेक इंसान
कविता ईद का चांद तो तुम्हे दिखाना ही पड़ेगा। May 3, 2022 / May 3, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment ईद का चांद तो तुम्हे दिखाना ही पड़ेगा।आस्मां को ज़मीं पर तो झुकाना पड़ेगा।। कब तक रखोगे तुम दो दिलो को अलग।कभी न कभी तो उनको मिलाना पड़ेगा।। कब तक रखोगे खूबसूरत चेहरा छिपाकर।कभी न कभी तो उसको दिखाना पड़ेगा।। ईद आई है तो उसे गले लगाना ही होगा।कुछ न कुछ तो उसे हमे दिलाना […] Read more » You will have to show the moon of Eid. ईद का चांद तो तुम्हे दिखाना ही पड़ेगा।
कविता भारत की गुलामी का कारण क्षत्रिय के सिवा सभी थे रणछोड़ May 3, 2022 / May 3, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकभारत में वर्ण व्यवस्था बंद घेरा,बंद घेरे से निकल पाने में फेरा!वर्ण और वर्ग में बहुत हीं अंतर,वर्ग में वर्ग परिवर्तन के अवसर! आज का गरीब कल होता अमीरअमीरी गरीबी में बदलाव निरंतर!प्रयत्न कर्म सश्रम के बलबूते पर,वर्ग बदलना,नहीं भाग्य पे निर्भर! वर्ण में कोई बदलाव चुनाव नहीं,वर्ण व्यवस्था में ब्राह्मण, क्षत्रिय,वैश्य, शूद्र […] Read more » भारत की गुलामी का कारण क्षत्रिय के सिवा सभी थे रणछोड़
कविता मजदूर दिवस May 1, 2022 / May 1, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मना रहे है हर वर्ष मजदूर दिवस,फिर भी मजदूर आज भी विवश।बदल नही पाए उसकी विवशता,चाहे मना लो तुम कितने दिवस।। जो बनाता है मकान दुसरो के लिए,नही बना सका मकान खुद के लिए।वह मर रहा है आज भी देश के लिए,बताओ कौन मर रहा है उसके लिए।। कितने ही दशक आज बीत चुके है,उसका […] Read more » Labour Day मजदूर दिवस
कविता छीन लिए है जब हक़ सारे तुमने May 1, 2022 / May 1, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment छीन लिए है जब हक़ सारे तुमने,फिर बार बार क्यों तुम आते हो।दरवाजे सारे बंद हो चुके है अब,फिर बार बार क्यों खटकाते हो।। होता है प्रेम जिंदगी में एक बार,ये बार बार जिंदगी में न होता है।प्रेम कोई गुड्डे गुड़ियों का खेल नहीये जिंदगी में मुश्किल से होता है।। मांग भर दी जब तुमने […] Read more » छीन लिए है जब हक़ सारे तुमने
कविता चाहे किसी धर्म की हो माता सबकी मुखाकृति मां श्रद्धा सरीखी April 29, 2022 / April 29, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजीवों का जन्म माता से होता,पिता बीजों का विसर्जन करता,मां से मैं को अस्तित्व मिलता,जीवों को पहचान देता है पिता! माता से ममत्व का संज्ञान होता,पिता जीव को जातीय नाम देता,पिता से ही अहम का भान होता,माता भूमि उगाती बीज पिता का,मां से मिले मम में होती ममता! पितृत्व अहम से अहंकार में […] Read more » चाहे किसी धर्म की हो माता सबकी मुखाकृति मां श्रद्धा सरीखी
कविता साहित्य आ लौट कर आजा मेरे हसबैंड, नही तो तेरा वही बैंड बजा दूंगी। April 21, 2022 / April 21, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आ लौट कर आजा मेरे हसबैंड,नही तो तेरा वही बैंड बजा दूंगी। तूने समझा मुझे होगा कमजोर,ऐसी गलती न करना कोई औरनही तो वही आकर मैतेरा बैंड बजा दूंगी।आ लौट कर आजा मेरे हसबैंड,,, तूने साड़ी अभी तक मुझे दिलाई,उसकी मैचिंग सैंडल भी न दिलाईनही तो वही आकर मैपुराने सैंडल से बजा दूंगी।आ लौट कर […] Read more »
कविता चंदा मामा का झिंगोला April 20, 2022 / April 20, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment चंदा मामा पहन पायजामा,पहुंचे एक दिन वे सुसराल।बड़ी साली ने पलंग बिछाया,डाला उस पर मखमली शाल।। छोटी साली नमकीन है लाई,सलज मिठाई लेकर है आई।सासू मां ने तुलसी चाय बनामेज पर है उसे खूब सजाई।। चंदा मामा बड़े ही खुश थे,देखा कर अपनी ये अगुवाई।फूले वे समा नही रहे थे,ले रहे थे वे खूब अंगड़ाई।। […] Read more »
कविता महावीर ने कहा आत्मा समय स्थान की जीवंत स्थिति April 19, 2022 / April 19, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकवर्धमान महावीर ने कहा थाआत्मा समय स्थान की जीवंत स्थितिआत्मा समयबद्ध सम्यकस्थानीय टाइम स्पेस की सक्रिय अवस्थाआत्मा की किसी समय मेंखाली स्थान में होती सशरीर उपस्थितिआज यहां कल वहांआत्मा की अवस्थिति बदलती रहतीसमय के साथ आत्मा की स्थिति जहां नहीं होतीवहां आत्मवान जीव जन्तु नहींनिष्प्राण और शरीरी वस्तु जड़वत मृतप्राय होतीभगवान महावीर का […] Read more » Mahavir said the living condition of soul time space महावीर ने कहा आत्मा समय स्थान की जीवंत स्थिति
कविता कब गीता ने ये कहा, बोली कहाँ कुरान । – April 17, 2022 / April 17, 2022 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment जातिवाद और धर्म का, ये कैसा है दौर ।जय भारत,जय हिन्द में, गूँज रहा कुछ और ।। कब गीता ने ये कहा, बोली कहाँ कुरान ।करो धर्म के नाम पर, धरती लहूलुहान ।। गैया हिन्दू हो गई, औ’ बकरा इस्लाम ।पशुओं के भी हो गए, जाति-धर्म से नाम ।। जात-धर्म की फूट कर, बदल दिया […] Read more » When Geeta said this where did the Qur'an speak? कब गीता ने ये कहा बोली कहाँ कुरान । -
कविता चलो गांव की ओर April 17, 2022 / April 17, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment चलते है शहर छोड़ अपने गांवों की हम ओर।यहां न मिलेगा शहरों जैसा उच्चा हमको शोर।। मिलेगी ठंडी स्वच्छ हवा गांवों में ही हमको।कोई भी डर न होगा प्रदूषण का यहां हमको।। मिलेगा पूरा बिग बाजार गांवों में भी हमको।दर्जी,मोची,लुहार सब मिलेगा यहां हमको।। खाने की कमी नही,पेट भर कर यहां खायेंगे।आम अनार संतरा जी […] Read more » let's go to the village चलो गांव की ओर