कविता एक राशि वालों की नियति एक नहीं होती January 31, 2022 / January 31, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकएक राशि वालों की नियति एक नहीं होती,राम ने रावण को संहारा,कृष्ण ने कंस को,गोडसे ने गांधी को मारा रहस्य को समझो,राशिफल देखके क्या फायदा कर्मफल देखो! जैसी करनी वैसी भरनी कहावत कैसे बनी?गीता को छूकर सिर्फ कसम मत लो, पढ़ो,जैसा कर्म करते हैं लोग वैसा फल मिलता,कोई राम रावण, कोई गोडसे गांधी […] Read more » Destiny of same zodiac is not same एक राशि वालों की नियति एक नहीं होती
कविता याद मेरी,तुम्हे आती तो होगी January 31, 2022 / January 31, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment याद मेरी तुम्हे आती तो होगीआकर तुम्हे सताती तो होगी।। सुबह जब तुम उठती तो होगी,नींद तुम्हारी खुलती तो होगी।पास न पाती जब तुम मुझको,दिल में बैचैनी होती तो होगी।।याद मेरी,तुम्हे,,,,,,,,,,,,,,,, ठंडी हवा सुबह चलती तो होगी,मेरा संदेश तुम्हे देती तो होगी।मिलता न जब संदेश तुम्हे मेरा,दिल में तडपन होती तो होगी।।याद मेरी,तुम्हे,,,,,,,,,,,,, नहाने जब […] Read more » तुम्हे आती तो होगी याद मेरी याद मेरी तुम्हे आती तो होगी
कविता डोली व अर्थी में वार्तालाप January 31, 2022 / January 31, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment एक डोली चली, एक अर्थी चली,दोनो में इस तरह कुछ बाते चली। अर्थी बोली डोली से,तू पिया के घर चली,मै प्रभु के घर चली।तू डोली में बैठ चली,मै चार कंधो पर चली।फर्क इतना है दोनो में सखि,तू अपने जहां में चलीमै अपने जहां से चली।”एक डोली चली, एक अर्थी चली,दोनो में इस तरह कुछ बाते […] Read more » conversation between doli and earth
कविता कर्ण रहे न रहे कर्ण की बची रहेगी कथा January 29, 2022 / January 29, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकवो एक कर्ण था अवांछित जाति वर्ण का,कर्ण अब नहीं पर जस की तस है व्यथा,कर्ण रहे न रहे कर्ण की बची रहेगी कथा! कर्ण मिथकीय या यथार्थ पात्र हो सकता,मगर कर्ण कथा की आज भी प्रासंगिकता,कर्ण असवर्ण,कर्ण हो सकता नहीं लापता! वो तलाश में थे एक गुरु के जो ज्ञान दे,शिष्य का […] Read more » कर्ण रहे न रहे कर्ण की बची रहेगी कथा
कविता कैसा चुनाव ? January 28, 2022 / January 29, 2022 by शिवम् श्रोत्रिय | Leave a Comment Read more » poem on election कैसा चुनाव
कविता कृष्ण ने क्यों कहा मैं शस्त्रधारियों में राम हूं January 25, 2022 / January 25, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककृष्ण ने क्यों कहामैं शस्त्रधारियों में राम हूंइसलिए कि बिना शस्त्र बिखर जाती सत्ताबुद्ध की अहिंसा नेअशोक को किया था निहत्थाबुद्ध की अहिंसा ने आमंत्रित कियाविदेशी आक्रांताओं को भारत मेंकाश कि परवर्ती शासकों ने धम्म के बजायगीता को अहमियत दिया होतातो भारत की स्थिति कुछ अलग होतीशस्त्र धारण से पाशविकता नियंत्रित होतीपशु के […] Read more » Why did Krishna say that I am Rama among the armed forces?]
कविता सुभाष चन्द्र बोस जयंती January 25, 2022 / January 25, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment तुम मुझको दो खून अपना ,मै तुमको दे दूंगा आजादी |यही सुनकर देश वासियों ने,अपनी जान की बाजी लगा दी || यही सुभाष का नारा था ,जिसने धूम मच दी थी |इसी विश्वास के कारण हीउसने हिन्द फ़ौज बना दी थी || याद करो 23 जनवरी 1897 कोजब सुभाष कटक में जन्मे थे |स्वर इन्कलाब […] Read more » Subhash Chandra Bose Jayanti सुभाष चन्द्र बोस जयंती
कविता राष्टीय बालिका दिवस पर January 24, 2022 / January 24, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment क्यो समझते लड़की है पराया धनऔर लड़का है अपने घर का धन,जबकि दोनो ही लेते है एक कोख से जन्म। दोनो की एक धरती,दोनो का एक गगन,दोनो का एक माली,दोनो का एक चमन।दोनो का एक घर है,दोनो का एक आंगन,फिर भी कहते है लड़की है पराया धन।और लड़का है अपने ही घर का धन।। दोनो […] Read more » on National Girl Child Day poem on National Girl Child Day राष्टीय बालिका दिवस पर
कविता लहर लहर लहराए तिरंगा January 24, 2022 / January 24, 2022 by प्रभात पाण्डेय | Leave a Comment यह तिरंगा तो ,हमारी आन बान हैयह दुनिया में रखता ,अजब शान हैयह राष्ट्र का ईमान है ,गर्व और सम्मान हैस्वतन्त्रता और अस्मिता की ,यह एक पहचान हैक्रान्तिकारियों की गर्जन हुंकार हैविभिन्नता में एकता की मिसाल हैएकता सम्प्रभुता का कराता ज्ञान हैधर्म है निरपेक्ष इसका ,जाति एक समान हैयह तिरंगा तो ,हमारी आन बान हैयह […] Read more » poem on tiranga लहर लहर लहराए तिरंगा
कविता सुन सुन सुन रे भाई सुन सुन सुन। January 24, 2022 / January 24, 2022 by अजय एहसास | 1 Comment on सुन सुन सुन रे भाई सुन सुन सुन। सुन सुन सुन रे भाई सुन सुन सुनऊपर से ना अंदर से,नेताओं के समंदर से,अच्छे मोती चुनसुन सुन सुन रे भाई सुन सुन सुन। ये वोटिंग अधिकार हमारा,जिसने तुझे पुकारा, ये हक है तेरागिरने वाले को जो उठाए,जो दे तुझे सहारा कहो हमारा,झूठ में और सच्चाई मेंअच्छाई और बुराई मेंअपना रास्ता चुनसुन सुन सुन रे […] Read more » poem on national voters day सुन सुन सुन रे भाई सुन सुन सुन।
कविता दो-दो हिन्दुस्तान January 24, 2022 / January 24, 2022 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment ●●●लाज तिरंगें की रहे, बस इतना अरमान ।मरते दम तक मैं रखूँ, दिल में हिन्दुस्तान ।।●●●बच पाए कैसे भला, अपना हिन्दुस्तान ।बेच रहे हैं खेत को, आये रोज किसान ।।●●●आधा भूखा है मरे, आधा ले पकवान ।एक देश में देखिये, दो-दो हिन्दुस्तान ।।●●●सरहद पर जांबाज़ जब, जागे सारी रात ।सो पाते हम चैन से, रह […] Read more » दो-दो हिन्दुस्तान
कविता बदले बदले दल बदलू नज़र आते हैं January 20, 2022 / January 20, 2022 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on बदले बदले दल बदलू नज़र आते हैं बदले बदले दल बदलू नज़र आते है।एक पार्टी छोड़,दूसरी में नजर आते है।। मिल गया टिकट हम देश को बदल देगे।मिला नही टिकट हम पार्टी ही बदल देंगे।। दलबदलु है नाम हमारा इसे चरितार्थ कर देंगे।बात नही बनी तो पार्टी का नाम ही बदल देंगे।। रहती नही बदले की भावना खुद ही बदल जाते है।मिलता […] Read more » Change teams seem to change