कविता सच व झूठ में अन्तर September 11, 2020 / September 11, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment सच सच ही रहेगा,एक दिन अवश्य आयेगा।झूठ झूठ ही रहेगा,वह कभी भी न आयेगा।।झूठ के पैर होते नहीं,वह कभी न चल पायेगा लगता हैं समय सच को साबित करने के लिए।झूठ लेता है झूठ का सहारा कदम चलने के लिए।बोलने पड़ते हैं सौ झूठ,एक झूठ छिपाने के लिए।। सच को साक्ष्य की जरूरत नहीं खुद […] Read more »
कविता यह अचानक…… September 10, 2020 / September 10, 2020 by मनु शर्मा | Leave a Comment यह अचानक हुआ क्याविकास की इस तेज की दौड़ मेंहमने क्या खोया और क्या पायासमझ ही न पायेसुविधाओं को विकास मान करचल पड़े नयी राह परकब जाने किस मोड़ पर बदल गया सब कुछजाने कब धड़े और सुराही का पानी पीते पीतेबोतल का पानी पीना सीख गये यह अचानक हुआ क्याविकास की इस तेज होती […] Read more » यह अचानक
कविता बरगद की छांव ….!! September 10, 2020 / September 10, 2020 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा बुलाती है गलियों की यादें मगर ,अब अपनेपन से कोई नहीं बुलाता ।इमारतें तो बुलंद हैं अब भी लेकिन ,छत पर सोने को कोई बिस्तर नहीं लगाता ।बेरौनक नहीं है चौक – चौराहेपर अब कहां लगता है दोस्तों का जमावड़ा ।मिलते – मिलाते तो कई हैं मगरहाथ के साथ दिल भी मिले […] Read more » Banyan shade बरगद की छांव
कविता कंगना के मन की पीड़ा September 10, 2020 / September 10, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आहत है आज सारा संसार तेरी करतूतों से,पता लगेगा तुझको,जब स्वागत होगा जूतों से। वर्षों लग जाते है एक आशियाना बनाने में,तुझे चंद घंटे लगे मेरा आशियाना तुड़वाने में। क्या मिला तुझको एक नारी को करके बेदखल,पता लगे तुझको जब सत्ता से होगा तू बेदखल। बदले की भावना थी उसे तुम क्यो छिपाते हो,सत्ता से […] Read more » कंगना के मन की पीड़ा
कविता विभिन्न पत्नियों के विभिन्न वार्तालाप अपने पतियों से September 7, 2020 / September 7, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment पायलट की पत्नी बोली अपने पति से,ज्यादा हवा में मत उडो,मै तुम्हे तो ही उड़ा दूंगीज्यादा तीन दो पांच मत करोतुम्हे तो मुंह से सीटी बजाकरहवा में उड़ा दूंगी। अध्यापक की पत्नी बोलीमुझे ज्यादा मत पढ़ाओ,मै तो पढ़ी पढ़ाई आईं हूंतुम जैसे मास्टरों की तोहेड मास्टरनी बनकर आई हूं। पेंटर की बीबी बोलीज्यादा रंग मत […] Read more » poem on husband and wife talks वार्तालाप
कविता शिक्षा दिवस September 5, 2020 / September 5, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment रहे न अशिक्षित भारत में कोई,ऐसी योजनाएं हमे बनाना है।घर घर शिक्षा का दीपक भी,देश के हर कोने में जलाना है।। शिक्षा दिवस भी एक पर्व है,इसे भी और पर्वो की तरह मनाना है।रहे ने कोई देश में अशिक्षित,भारत को अब महान बनाना है।। होती जा रही महंगी शिक्षा,इसको अब सस्ती करनी है।पढ़ सके हर […] Read more » शिक्षा दिवस
कविता बच्चों का पन्ना चीटा है यह September 5, 2020 / September 5, 2020 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment प्रभुदयाल श्रीवास्तव Read more »
कविता साहित्य सिर पर मेरे हाथ धर,यूं ही बढ़ाते रहना मान September 4, 2020 / September 4, 2020 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment चरण वंदन करता आज मैं, कर गुरु गुणगान, सिर पर मेरे हाथ धर,यूं ही बढ़ाते रहना मान। क्या वर्ण और क्या वर्णमाला, रह जाता मैं अनजान, ‘अ’ से अनार,’ए’ से एपल की न हो पाती पहचान। गिनती, पहाड़े, जोड़-घटा, न कभी हो पाती गुणा-भाग, एक-एक क्यों बनें अनेक, बोध न हो पाता कभी ये ज्ञान। […] Read more » poem on teachers day गुरु
कविता आओ भारत को आत्मनिर्भर बनाए September 3, 2020 / September 3, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आओ भारत को आत्मनिर्भर बनाए,हर दृष्टि से इसे शक्तिशाली बनाए,जों इसके विकास में रोड़ा अटकाए,उसे हर तरीके से हम उसे समझाए। आओ भारत को ऐसा देश बनाए,सुंदर,सजग,सशक्त व सरल बनाए,जो देखे इस देश को कुदृष्टि से,उसको सब मिलकर दृष्टिहीन बनाए। आओ हिंदी को सबकी भाषा बनाए,इसे बोलचाल की हम भाषा बनाए,जिनको नहीं आती हो हिंदी […] Read more » Come make India self-reliant आत्मनिर्भर भारत
कविता बच्चों का पन्ना पैदल मेरे साथ चलो September 2, 2020 / September 2, 2020 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment Read more » पैदल मेरे साथ चलो
कविता तीन लोग September 1, 2020 / September 1, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment तीन लोगसंसद के बाहरप्रदर्शन कर रहे थेऔर नारे लगा रहे थे एक कह रहा थाहमें मंदिर चाहिएदूसरा कह रहा थाहमें मस्जिद चाहिएऔर तीसरा कह रहा थाहमें रोटी चाहिए कुछ वर्षों के बादमंदिर वाला और मस्जिद वालासंसद के भीतर दिखने लगाऔर रोटी वालासंघर्ष करता हुआअपनी रोटी के लिए Read more » तीन लोग
कविता सुबह से शाम तक September 1, 2020 / September 1, 2020 by पंडित विनय कुमार | Leave a Comment सुबह से शाम तकसूर्य की रक्ताभ किरणेंफैली -पसरी रही धरा परजीवन का सुख- दुखहर क्षण हम आत्मसात करते रहेकेवल नहीं मिली हमें प्रेम कलिकाएं…वह प्रेमजिसको पाने के लिए भ्रमर दिन भर गुंजार करता हैचातक देखता रहता है चंद्रमा के आने की राह…वह प्रेम, जो नश्वर है सचमुचजो बिंथा है /बिंधा है स्वार्थ के सांसारिक डोर […] Read more » sunrise to sunset सुबह से शाम तक