लेख साहित्य जनक की पाती उर्मिला के नाम June 7, 2016 / June 7, 2016 by कीर्ति दीक्षित | Leave a Comment कीर्ति दीक्षित मेरी प्राणजा, मैथिली, जनकदुलारी, वैदेही, जानकी प्रिय उर्मिले, ये पत्र तो सीता जीजी के लिए है, मेरे इन उद्बोधनों को पढ़कर यही विचारा होगा न तुमने, मेरी तनया! ये पाती मैनें मेरी उर्मिला के लिए लिखी है, श्री राम सीता, और सौमित्र के वनगमन के पश्चात् मैं तुझे लेने आया था इस आशा […] Read more » Featured urmila जनक की पाती उर्मिला के नाम
लेख साहित्य हर युग में महाभारत May 19, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment महाभारत के समय भी दो वर्ग थे — एक निपट भौतिकवादी, जो शरीर के अतिरिक्त कुछ भी स्वीकार नहीं करता था और जिसकी दृष्टि मात्र भोग पर थी। आत्मा के होने, न होने से कोई मतलब न था। जिन्दगी का अर्थ था भोग और लूट, खसोट। उसी वर्ग के खिलाफ कृष्ण को युद्ध करवाना पड़ा। […] Read more » हर युग में महाभारत
लेख साहित्य काश! यह इतना आसान होता May 14, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment गीता के छठे अध्याय में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि ऐसा नहीं है कि यह गीता रहस्य मैं तुम्हें पहली बार बता रहा हूँ। सृष्टि के आरंभ में मैंने यह रहस्य सूर्य को बताया था, सूर्य ने इसे मनु को बताया और मनु ने इक्ष्वाकु को। कालान्तर में यह ज्ञान लुप्त हो गया। इसीलिए […] Read more » काश! यह इतना आसान होता
लेख शख्सियत साहित्य कृष्णभक्ति के महाकवि सूरदास May 11, 2016 / May 11, 2016 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment 11 मई पर विशेषः- मृत्युंजय दीक्षित महाकवि सूरदास का हिंदी जगत के साहित्य में अप्रतिम स्थान है। सूरदास के जन्मतिथि स्थान व उनके जन्मांध होने पर विद्वानों मे मतभेद हैं। लेकिन उनकी महानता व कृष्णभक्ति को लेकर सभी विद्वानों में एकरूपता है। सूरदास की साहित्यिक रचनाएं हिंदी जगत के लिए मील का पत्थर साबित हुई […] Read more » Featured कृष्णभक्ति महाकवि सूरदास
लेख साहित्य भोजन के लिए दुर्योधन का श्रीकृष्ण को आमंत्रण May 9, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment महाभारत का युद्ध टालने और दुर्योधन को समझाने के लिए अन्तिम प्रयास के रूप में श्रीकॄष्ण को हस्तिनापुर की राजसभा में युधिष्ठिर के दूत के रूप में भेजने का निर्णय लिया गया। श्रीकृष्ण ने भी इसे सहर्ष स्वीकार किया। हस्तिनापुर के मुख्य द्वार पर श्रीकृष्ण का भव्य स्वागत किया गया। सबसे औपचारिक मुलाकात के बाद […] Read more » दुर्योधन भोजन भोजन के लिए दुर्योधन का श्रीकृष्ण को आमंत्रण श्रीकृष्ण को आमंत्रण
लेख साहित्य द्रौपदी की हँसी May 8, 2016 / May 8, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। हस्तिनापुर के सिंहासन पर युधिष्ठिर का अभिषेक भी संपन्न हो चुका था। कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भीष्म पितामह सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा में शर-शैया पर यातना सहते हुए लेटे हुए थे। उस युग में श्रीकृष्ण और विदुर के बाद भीष्म पितामह ही राजनीति, धर्म और शास्त्र […] Read more » Featured द्रौपदी की हँसी
कला-संस्कृति लेख साहित्य साहित्य और समाज May 7, 2016 by डॉ. सौरभ मालवीय | Leave a Comment डॊ. सौरभ मालवीय साहित्य समाज का दर्पण है, समाज का प्रतिबिम्ब है, समाज का मार्गदर्शक है तथा समाज का लेखा-जोखा है. किसी भी राष्ट्र या सभ्यता की जानकारी उसके साहित्य से प्राप्त होती है. साहित्य लोकजीवन का अभिन्न अंग है. किसी भी काल के साहित्य से उस समय की परिस्थितियों, जनमानस के रहन-सहन, खान-पान व […] Read more » Featured साहित्य और समाज
लेख विविधा साहित्य भक्ति रस से उपजा वीर रस April 22, 2016 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | Leave a Comment डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री भारत पर विदेशी हमलों की शोकगाथा बहुत पुरानी है । उतनी ही पुरानी इसकी संघर्ष गाथा है । लेकिन संघर्ष और शत्रु से मुक़ाबला कितना ही शौर्यपूर्ण क्यों न रहा हो , अन्ततः भारत के भाग्य में परवश होना ही वदा था । शायद इसीलिए आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ,भारतीय साहित्य, ख़ासकर […] Read more » Featured Guru Arjun Dev भक्ति रस वीर रस श्री अर्जुन देव श्री गोविन्द सिंह श्री तेगबहादुर
कला-संस्कृति जन-जागरण लेख साहित्य विश्व का सबसे बड़ा कोहिनूर हीरा April 19, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा राधेश्याम द्विवेदी 1.परी कथाओं सा रोमांचक कहानी:- कोहिनूर फारसी का शब्द है, जिसका अर्थ है : आभा या रोशनी का पर्वत । कोहिनूर (फ़ारसी: कूह-ए-नूर) एक 105 कैरेट (21.6 ग्राम) का हीरा है जो किसी समय विश्व का सबसे बड़ा ज्ञात हीरा रह चुका है। कोहिनूर दुनिया के सभी हीरों का राजा है । […] Read more » Featured history of kohinoor hira कोहिनूर हीरा
लेख साहित्य सूखा April 16, 2016 / April 17, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment डॉ.अमित प्रताप सिंह सुबह अचानक घबराकर आँख खुली, झटके से उठकर बिस्तर पर बैठ गए, माथे पर पसीना छलक रहा था, दिल की धड़कन किसी सुपरफास्ट ट्रेन के इंजन की तरह बहुत जोर की आवाज कर रही थी. तेज़ी से उठकर खिड़की से बाहर झांककर देखा, माली बगीचे में पौधों को पानी दे रहा […] Read more » drought in India Featured सूखा
महत्वपूर्ण लेख लेख समाज साहित्य देश का वास्तविक गद्दार कौन ? भाग-14 April 15, 2016 by राकेश कुमार आर्य | 4 Comments on देश का वास्तविक गद्दार कौन ? भाग-14 गांधीजी से चार गुणा अधिक जेल में रहे सावरकरजी हमारे क्रांतिकारियों ने हर वर्ष की भांति 1933 के प्रारंभ से ही कई स्थानों पर बम विस्फोट कर करके सरकार की नाक में दम कर दिया था। सरकार का उन दिनों वश चलता तो वह एक क्रांतिकारी को भी छोड़ती नही। परंतु क्रांतिकारियों के पीछे जनता […] Read more » Featured who is the real traitor of India देश का वास्तविक गद्दार कौन
महत्वपूर्ण लेख राजनीति लेख समाज साहित्य देश का वास्तविक गद्दार कौन? भाग-13 April 14, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment गांधीजी और सावरकरजी की कार्य शैली में था मौलिक मतभेद अब हम देखेंगे कि गांधीजी और वीर सावरकरजी की कार्यशैली व चिंतनशैली में कितना मौलिक मतभेद था? सावरकर जी ने उन मुस्लिम लीगी और अलगाववादी मुस्लिम नेताओं को लताड़ते हुए कहा था, जो देश के बंटवारे की कीमत पर ही स्वतंत्रता आंदोलन में सहयोग करने […] Read more » Featured real traitor of India देश का वास्तविक गद्दार कौन