साहित्‍य

व्यंग्य/सशक्त उम्मीदवार का बायोडाटा

कल सुबह ही मैं हाथ से मिली दाल को हाथी के दूध से बने घी का तड़का लगाने की तैयारी कर ही रहा था कि दरवाजे पर जोर-जोर की ठक-ठक हुई। साला तड़के का तड़के ही सारा मजा किरकिरा कर दिया।

व्यंग्य /गंगा में चुनावी दंगा

हाथ और हाथी चुनाव के वक्त सौभाग्य से एक साथ कहीं और डुबकी लगती न देख गंगा में डुबकी लगाने पधारे। गंगा ने बहुत रोका, पर नहीं माने तो नहीं माने। दोनों के जनता से झूठे वादे करके बुरे हाल। वोटरों को पटाते पटाते खुद पटे ठगे हुए से।

पानी से बिजली बनाने पर सवाल

प्रसिध्द अर्थशास्त्री डा भरत झुनझुनवाला की शोध-पुस्तिका ‘जल विद्युत का सच’ उत्तराखण्ड के श्रीनगर’ और ‘कोटलीभेल’ परियोजना पर कुछ तथ्य और सवाल रखती है। साथ ही यह ऐसी…

सफर का सफरी सूटकेस – ब्रजेश झा

हाल ही में सफर (गैरसरकारी संस्था) ने राजधानी के दो-तीन जगहों पर इंडिया अनट्च्ड (लघु फिल्म) का पुनः प्रदर्शन किया। इसकी जानकारी मेरे पास थी। हालांकि स्टालिन..

मेट्रो पर भी ब्‍लूलाईन का रंग चढ़ रहा है

मेरे मित्र पवन चंदन ने आज सुबह वेलेंटाईन डे आने से पहले और रोज डे यानी गुलाब दिन जाने के बाद जो किस्‍सा सुनाया, उससे मेरे नथुने फड़कने लगे

23 साहित्यकार साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित

राष्ट्रीय राजधानी स्थित रविंद्र भवन में मंगलवार को विभिन्न भाषाओं के 23 साहित्यकारों को साहित्य अकादमी पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। हिन्दी भाषा में यह पुरस्कार गोविंद मिश्र को प्रदान किया गया।

जारी है हिन्दी की सहजता को नष्ट करने की साजिश – चिन्मय मिश्र

यह लेख उस प्रवृत्ति पर चोट है जो कि हिंदी को एक दोयम दर्जे की नई भाषा मानती है और हिंदी की शब्दावली विकसित करने के लिए अंग्रेजी को आधार बनाना चाहती है।

अजित कुमार यानि हिन्दी सहित्य का बेहद पहचाना हुआ नाम – ब्रजेश झा

सहित्य से अलग अजित कुमार को आम पाठक एक जमाने में धर्मयुग पत्रिका में खूब पढ़ा करते थे। अब नए जमाने के आम पाठकों में कम ही लोग धर्मयुग और अजित बाबु के बारे में नाम से ज्यादा कुछ जानते हैं।