कविता दादाजी अब हँस देते April 1, 2019 / April 1, 2019 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment खीर पुड़ी के गए जमाने, अब दिन पिज्जा बरगर के। लगे बताने दादाजी को, बच्चे सारे ही घर के। हम बच्चों की फरमाइश पर, दादाजी अब हँस देते। पिज्जा बर्गर चाऊमीन झट, ऑन लाइन बुक कर देते। Read more »
व्यंग्य समरथ को नहिं दोष गुसाईं April 1, 2019 / April 1, 2019 by विजय कुमार | Leave a Comment कहावतों का संसार अजब-गजब है। बड़ी से बड़ी बात को छोटे में कहना हो, तो कहावत का सहारा लिया जाता है। हर भाषा में ये कहावतें विद्यमान हैं। इनसे किसी भी लेख, व्यंग्य, निबंध या भाषण की सुंदरता बढ़ जाती है। भाषा की तरह हर क्षेत्र और जाति-बिरादरी के लिए भी कहावतें बनी हैं। इनमें […] Read more »
कविता बहत्तर हजार रुपए क्या,बहत्तर पैसे नहीं दे पायेगा | April 1, 2019 / April 1, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बहत्तर हजार रुपए क्या,बहत्तर पैसे नहीं दे पायेगा | अपने फैलाये मकड जाल में,वह स्वयं ही फस जायेगा || बहत्तर साल होने को आजादी,वह ऐसे ही बहकायेगा | पांच पुश्ते वादा कर चुकी है,वह कब गरीबी को हटायेगा || बहत्तर को आधा कर दो,छत्तीस का आकड़ा हो जायेगा | छत्तीस का आकड़ा कभी भी उसका […] Read more » बहत्तर हजार रुपए क्या
प्रवक्ता न्यूज़ लेख मोदी सरकार में शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने का एक सार्थक प्रयास March 28, 2019 / March 28, 2019 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment संसद में २०१७ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम में संसोधन विधेयक पारित कराकर ये लक्ष्य निर्धारित किया गया कि ३१ मार्च, २०१९ से पूर्व पूरे देश के सभी प्राथमिक विद्यालयों (सरकारी और निजी दोनों) में कार्यरत शिक्षकों को आधुनिक तकनीकी की मदद से गुणवत्तापूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण पूर्ण कराया जायेगा. भारत में जब भी शिक्षा की […] Read more » right to education in modi rule मोदी सरकार मोदी सरकार में शिक्षा के अधिकार शिक्षा के अधिकार
कविता तब हर पल होली हो जाता है… March 27, 2019 / March 27, 2019 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on तब हर पल होली हो जाता है… अरुण तिवारी जब घुप्प अमावस के द्वारे कुछ किरणें दस्तक देती हैं, सब संग मिल लोहा लेती हैं, कुछ शब्द, सूरज बन जाते हैं, तब नई सुबह हो जाती है, नन्ही कलियां मुसकाती हैं, हर पल नूतन हो जाता है, हर पल उत्कर्ष मनाता है, तब मेरे मन की कुंज गलिन में इक भौंरा रसिया […] Read more »
कविता होली है March 27, 2019 / March 27, 2019 by अजय एहसास | Leave a Comment मेरे दिल का कोई कमरा तेरे रहने की खोली है, कहीं रहता मेरा बचपन कहीं बच्चों की टोली है। मचलते हैं कहीं बूढ़े गुलाबी खुश्बुएं लेकर मचलता है मेरा मन और कहता आज होली है। सजे हैं गीत रंगो में सजी है धरती हरियाली, है लगता गुड़ से मीठा भी जो भाभी आज बोली है, […] Read more »
कविता साहित्य कौन मिलेगा खाक में,और कौन आबाद। March 27, 2019 / March 27, 2019 by पीयूष पंत | Leave a Comment कौन मिलेगा खाक में,और कौन आबाद। होगा इसका फैसला,थोड़े दिन के बाद।। किससे जनता खुश हुई,किससे है नाशाद। होगा इसका फैसला,थोड़े दिन के बाद॥ चमचों की चाँदी हुई,मिलती झूठी दाद। वोटर जाएगा ठगा,थोड़े दिन के बाद।। मुर्दे उखड़ेंगे गड़े,और जिन्न आजाद। होंगी बहस मसान पर,थोड़े दिन के बाद।। गीदड़ बनते शेर जब,शेर छोड़ते मांद। आने […] Read more » कौन मिलेगा खाक में
दोहे साहित्य संस्कार की शुभ गति निरखि ! March 26, 2019 / March 27, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment संस्कार की शुभ गति निरखि, आभोग को कबहू परखि; मम मन गया सहसा चहकि, कबहुक रहा था जो दहकि ! झिझके झुके झिड़के जगत, भिड़के भयानक युद्ध रत; हो गए जब संयत सतत, भव बहावों से हुए च्युत ! बाधा व्यथा तब ना रही, धुनि समर्पण की नित रही; चाहत कहाँ तब कोई रही, जो मिल गया भाया वही ! भावों में भुवनेश्वर रमा, ईशत्व में स्वर को समा; ऐश्वर्य में उर प्रस्फुरा, आलोक लख लुप्तित धरा ! घन-श्याम में हर लहर तकि, ब्रज धाम गोपी रस थिरकि; ‘मधु’ परसि प्राणों की झलक, प्रभु की धरा पाए कुहक ! Read more »
दोहे विश्वास ना निज स्वत्व में ! March 26, 2019 / March 27, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment विश्वास ना निज स्वत्व में, अस्तित्व के गन्तव्य में; ना भरोसा जाया है जो, ले जाएगा ले दिया जो ! बुद्धि वृथा ही लगा कर, आत्मा की बिन पहचान कर; ना नियंता को जानते, ना सृष्टि की गति चीन्हते ! आखेट वे करते फिरे, आक्रोश में झुलसे रहे; बिन बात दूजों को हने, वे स्वयं के भी कब रहे ! राहों को वे मुश्किल किए, राहत किसी को कब दिए; चाहत किसी की कहँ लखे, व्याहत हुए बिन रब तके ! ‘मधु’ की महक औ ठुमक में, रचना के रस की ललक में; वे सहज हो पाए नहीं, आ स्वयम्भू की गोद में ! Read more »
कविता होली में क्या क्या होना चाहिए March 26, 2019 / March 27, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment होली में जब तक हलवाई ना हो |देशी घी की मिठाई बनाई ना हो ||गर्म गर्म भांग के पकोड़े ना हो |उन पर चटनी की लाग लगाई ना हो ||तब तक होली क्या होली है ?वर्ना रंगों के साथ ठठोली है || होली में जब तक रंग गुलाल ना हो |खेलने वालो के दिल में […] Read more » Poem on Holi होली
व्यंग्य इलेक्शन की माउथ स्ट्राइक March 26, 2019 / March 26, 2019 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल होली रंग और मन मिजाज का त्यौहार है। क्योंकि अपना देश भी रंगीला है। यहां की हर बात निराली है। होली और चुनाव में चोली-दामन का साथ है। दोनों उमंग, उन्माद, उत्साह, उम्मीद, रंग-भंग, दबंग, मृदंग और हुड़दंग के महामिश्रण से निर्मित हैं। होली में छेड़छाड़ के एक सौ एक गुनाह माफ है। गुलाल लगाने के बहाने कुछ […] Read more » माउथ स्ट्राइक
लेख है अंधेरी रात, पर दीवा जलाना कब मनाना है March 24, 2019 / March 24, 2019 by अरुण तिवारी | 1 Comment on है अंधेरी रात, पर दीवा जलाना कब मनाना है अरुण तिवारीकरोङों हिंदुस्तानियों की तरह नाना ने भी सूखे का संत्रास देखा; आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवार वालों के दर्द भरे साक्षात्कार सुने। मैने भी सुने। मेरी हमदर्दी कलम तक सीमित रही, किंतु नाना ने कहा कि टेलीविजन पर देखे दृश्यों से उनका दम घुटने लगा; उनकी नींद उङ गई। उन्होने सोचा – ”जो […] Read more »