कविता पिया की प्रतीक्षा में जगती रही July 10, 2018 / July 10, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment पिया की प्रतीक्षा में जगती रही रात भर करवटे बदलती रही स्वप्न भी हो गये अब स्वप्न जैसे कोई हो गया हो दफन कब आओगे मेरे प्यारे सजन ? पूछ रहे है ये मेरे भीगे नयन मन मेरा रात भर मचलता रहा तन मेरा अग्न से जलता रहा ये अग्न कैसे बुझेगी सनम ? ये […] Read more » अब तो दिन में पिया की प्रतीक्षा में जगती रही बैचेन होने लगी हूँ रोते रोते सूज
कविता आए रहे थे कोई यहाँ ! July 10, 2018 / July 10, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | 2 Comments on आए रहे थे कोई यहाँ ! (मधुगीति १८०७०३ स) आए रहे थे कोई यहाँ, पथिक अजाने; गाए रहे थे वे ही जहान, अजब तराने ! बूझे थे कुछ न समझे, भाव उनके जो रहे; त्रैलोक्य की तरज़ के, नज़ारे थे वे रहे ! हर हिय को हूक दिए हुए, प्राय वे रहे; थे खुले चक्र जिनके रहे, वे ही पर सुने ! टेरे वे हेरे सबको रहे, बुलाना चहे; सब आन पाए मिल न पाए, परेखे रहे ! जो भाए पाए भव्य हुए, भव को वे जाने; ‘मधु’ उनसे मिल के जाने रहे, कैसे अजाने ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’ Read more » आए रहे थे कोई यहाँ ! टेरे वे हेरे सबको रहे मधु वे ही पर सुने
कविता एक हास्य व व्यंग कविता July 9, 2018 / July 9, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment पेट्रोल के दाम बढ़ रहे फिर भी वाहन चल रहे महंगाई भी रोजना बढ़ रही फिर भी लोग होटल में खा रहे सत्ता के सब लालची हो रहे देश को भाड में झोक रहे नेता आपस में लड़ रहे जनता को एकता का सबक दे रहे जो कभी आपस में दुश्मन थे आज वे आपस […] Read more » एक हास्य व व्यंग कविता पेट्रोल के दाम बढ़ रहे फिर भी लोग होटल में खा रहे महंगाई भी रोजना बढ़ रही
कविता अब तो आ जाओ सनम July 9, 2018 / July 9, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment दिन ढल चूका है,शाम हो गई है चिराग जल चुके है,रात हो गई है मिटाने जा रहे है, वे अपने गम न जाने कहाँ हो तुम ? अब तो आ जाओ सनम तेल जल चूका है,बाति कम हो गई है चिराग की लो भी अब कम हो गई है बुझ रहा है वह,निकल रहा उसका […] Read more » अब तो आ जाओ सनम चाँद जा चूका है चाँदनी अब सो गई है तितलियाँ
व्यंग्य दूसरों की कमाई , हमें क्यों बताते हो भाई ….!! July 7, 2018 / July 7, 2018 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा उस विवादास्पद अभिनेता पर बनी फिल्म की चर्चा चैनलों पर शुरू होते ही मुझे अंदाजा हो गया कि अगले दो एक – महीने हमें किसी न किसी बहाने से इस फिल्म और इससे जुड़े लोगों की घुट्टी लगातार पिलाई जाती रहेगी। हुआ भी काफी कुछ वैसा ही। कभी खांसी के सिरप तो […] Read more » Featured क्रिकेटर गरीबी - बेरोजगारी दूसरों की कमाई बाढ़ - सूखा बायोपिक फिल्म हमें क्यों बताते हो भाई
कविता एक गजल बेटा बाप को नहीं देखता July 7, 2018 / July 7, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जीता हूँ अपनी धुन में,इस दुनिया का कायदा नहीं देखता रिश्ते निभाता हूँ दिल से कभी अपना फायदा नहीं देखता लिखता हूँ अपने दिल से, कभी किसी का दिल नहीं दखाता शब्दों की माला पिरोता हूँ कभी किसी की कविता नहीं चुराता आँखे सभी की दो दो है,पर वह अपने पापो को नहीं देखता अँधा […] Read more » एक गजल बेटा काबिलियत बाप को नहीं देखता मोदी देश
कविता रेप के समस्या का समाधान July 6, 2018 / July 6, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment रोज रोज रेप होते हुये, एक वैश्या दुखी होकर बोली आ जाओ हवस की दरिंदो,मैंने रेप की दुकान खोली मेरे भी एक औरत है,एक औरत का दर्द समझती हूँ पेट की भूख के कारण, कोठो पर हर पल सजती हूँ मैंने इन दरिंदो के लिये, यहाँ फ्री सेल लगा रक्खी है मिटा ले अपनी हवस […] Read more » दरिंदो पुलिस बच्चियों रेप के समस्या का समाधान संसद कानून
कविता मोक्ष के लिये बुरारी मौत-कांड July 5, 2018 / July 5, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मोक्ष के लिये मौत को गले लगाया सभी तुमने एक नहीं पूरे परिवार को मौत में सुलाया तुमने पढ़-लिख कर भी,ना समझ बन गये थे क्यों तुम ? अंध विश्वासी,रुढ़िवादी अधर्मी बन गये थे तब तुम क्यों उकसाया परिवार को तुमने आत्महत्या के लिये ? क्या मजबूरी थी,उनको मजबूर किया मरने के लिये ? मोक्ष […] Read more » पढ़-लिख बुद्ध और महावीर मोक्ष के लिये बुरारी मौत-कांड मौत हिन्दू शास्त्रों
गजल कश्मीर समस्या समाधान पर एक गजल July 5, 2018 / July 5, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment 370 धारा क्या मिली कश्मीर को हिंदुस्तान से वह अपने आप को अलग समझने लगा हिंदुस्तान से कश्मीर पर ज्यादा खर्च करना अब मुनासिब नहीं दोस्तों गीत गाता है पाकिस्तान का,खाता है वह हिंदुस्तान से कश्मीर एक ऐसी बेवफा औरत है अपने आप में नैन मैटटके करने लगी है वह अब पाकिस्तान से कश्मीर छिनाल […] Read more » 370 धारा कश्मीर समस्या कश्मीरी पंडितो पाकिस्तान समाधान पर एक गजल
कविता नारी की पीड़ा July 4, 2018 / July 4, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment नारी तुझको कोई अबला कहता,कोई सबला भी कहता है पुरुष तुझको सबला कहकर,फिर भी वह प्रताड़ित करता है तूही द्वापर में,तूही त्रेता में,तूही कलयुग में आई है कही तुझे जुए में हारा,कही तूने अग्नि परीक्षा पाई है जो नारी का करे अपमान,वह मर्द कभी नहीं हो सकता है जो बहन का करे न सुरक्षा,वह भाई […] Read more » तूही कलयुग तूही त्रेता में तूही द्वापर में नारी की पीड़ा
कहानी स्विस बैंकों के रहस्य July 4, 2018 / July 4, 2018 by विजय कुमार | Leave a Comment विजय कुमार, शर्मा जी बड़े आदमी हैं। इसलिए वे दूसरों के यहां नहीं जाते। उनकी मान्यता है कि बड़ा आदमी कहीं क्यों जाए ? अगर वो हर किसी के पास जाने लगा, तो फिर वह भी अरविंद केजरीवाल की तरह आम आदमी हो जाएगा। इसलिए वे सुबह दस बजे खा-पीकर लोगों से मिलने के […] Read more » Featured टैक्स चोरी मोदी सरकार लोकसभा के चुनाव शर्मा जी स्विस बैंकों के रहस्य
कविता बारिश का मौसम है,आओ भीगे सनम July 3, 2018 / July 3, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बारिश का मौसम है,आओ भीगे सनम तन की तपन को शीतल कर ले सजन ये जीवन धीरे से ऐसे ही कट जाएगा आशाओ के सहारे ऐसे ही कट जाएगा निराशा न देना तुम मेरे प्यारे सनम आओ बारिश में भीगे हम तुम सजन बारिस का मौसम है, ………… मन को न मसोसे कभी हम और […] Read more » आओ भीगे सनम घनघोर घटाये बारिस का मौसम है सावन हरियाली