कविता साहित्य कुछ और उठो सत्यार्थी November 27, 2017 by बीनू भटनागर | Leave a Comment इंसान ज्वालामुखी बन चुके थे, पहले ही, इंसानो के बच्चे भी मासूमियत छोड़कर, ज्वालामुखी बनने लगे हैं, जो कभी भी फट कर सब कुछ जला सकते हैं। कोई चार साल की उम्र में हैवानियत कर गया, किसी किशोर ने बच्चे को मार दिया, इमतिहान के डर ने गुनाह करवा डाला! दोष किसे दूँ सीखा तो […] Read more » सत्यार्थी
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-10 November 27, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment गीता के दूसरे अध्याय का सार और संसार हमारे देश में लोगों की मान्यता रही है कि शत्रु वह है जो समाज की और राष्ट्र की व्यवस्था को बाधित करता है। ऐसा व्यक्ति ही अधर्मी माना गया है। धर्म विरूद्घ आचरण करने वाला व्यक्ति समाज, राष्ट्र और जन-जन का शत्रु होता है। ऐसे व्यक्ति का […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta Shri Krishna गीता गीता का कर्मयोग विश्व
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-9 November 27, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता के दूसरे अध्याय का सार और संसार अर्जुन समझता था कि दुर्योधन और उसके भाई, उसका मित्र कर्ण और उसका मामा शकुनि युद्घ क्षेत्र में उसके हाथों मारे जा सकते हैं, इसके लिए तो वह मानसिक रूप से पहले से ही तैयार था। वह यह भी जानता था कि […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta Shri Krishna गीता गीता का कर्मयोग विश्व
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-8 November 25, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment गीता का पहला अध्याय और विश्व समाज गीता के विषय के संक्षिप्त या विस्तृत होने की सभी शंका आशंकाओं, सम्भावना और असम्भावना के रहते भी गीता का पहला अध्याय गीताकार के उच्च बौद्घिक चिन्तन और विश्व समाज के प्रति भारत की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करता है। गीताकार ने जो कुछ भी व्यवस्था पहले अध्याय में […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta गीता गीता का कर्मयोग विश्व
कविता साहित्य तेरी आँखों में कहीं, खो गए हैं, जागती आँखों में, सो गए हैं। November 25, 2017 by रवि श्रीवास्तव | Leave a Comment देखकर तुझको मुझे, कुछ ऐसा लगा। बात दिल की तुझसे, मैं कह न सका। आसमां से जैसे ,कोई उतरी हो परी। मेरी धड़कन में बसी, तेरी तस्वीर अधूरी। चलती है जब तू, दिल में उठती है लहर, रूका,रूका सा दिखे, मुझे पूरा तो शहर। पूरी महफिल है यहां, फिर भी बेगाने से […] Read more » तेरी आँखों में
कविता साहित्य यमुना मइया की कामना November 25, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी मेरे पद पंकज का वंदन चाहे मत एक बार करो । गाल बजाने वालो के सब ढोंगो का प्रतिकार करो । भाव सुमन के नहीं दिखावटी माला मुझे चढ़ाते हो । सड़ी गली बदबुओं से मेरी पवित्रता मिटाते हो ।। मुझको चुनरी नहीं चढ़ाओ मत दीपो का दान करो । दीन हीन […] Read more » यमुना मइया की कामना
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-7 November 23, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य  इसके पश्चात सफेद घोड़ों से जुते हुए विशाल रथ में बैठे हुए श्रीकृष्ण और अर्जुन ने भी अपने दिव्य शंख बजाये, जिससे कि सभी को यह सूचना मिल जाए कि यदि कौरव युद्घ का शंखनाद कर चुके हैं तो पाण्डव भी अब युद्घ के लिए तैयार हैं। संजय धृतराष्ट्र को बता […] Read more » Featured karma yog of geeta आज का विश्व गीता का कर्मयोग
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-6 November 21, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment वैदिक गीता-सार सत्य गीता ज्ञान व्यक्ति को भी परिमार्जित करता है और समाज को भी परिमार्जित करता है। उसका परिमार्जनवाद उसे हर व्यक्ति के लिए उपयोगी और संग्रहणीय बनाता है। अपने इस प्रकार के गुणों के कारण ही गीता सम्पूर्ण संसार का मार्गदर्शन हजारों वर्षों से करती आ रही है। विश्व के अन्य ग्रन्थों में […] Read more » Featured गीता गीता का कर्मयोग विश्व
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-5 November 21, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment वैदिक गीता-सार सत्य हम अपनों को अपना मानकर उधर से किसी हमला की या विश्वासघात की अपेक्षा नहीं करते। अपनों की ओर से हम पीठ फेरकर खड़े हो जाते हैं। यह मानकर कि इधर से तो मैं पूर्णत: सुरक्षित हूं। कुछ समय बाद पता चलता है कि हमारी पीठ पर तीर आकर लगता है और […] Read more » Featured geeta गीता गीता का कर्मयोग विश्व
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-4 November 18, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment वैदिक गीता-सार सत्य डा. देसाई को अपने लक्ष्य की खोज थी और वह अपने लक्ष्य पर पहुंच भी गये थे, परन्तु अभी वास्तविक लक्ष्य (पण्डा और राजा से मिलना) कुछ दूर था। उन्होंने अपने साथ एक मुसलमान पथप्रदर्शक रख लिया था। यह पथप्रदर्शक वहां के लोगों को यह भी बताता जा रहा था कि देखो […] Read more » Featured karmayoga of geeta आज का विश्व कर्मयोग गीता गीता का कर्मयोग
लेख साहित्य तुलसीदास की रचना “दोहाशतक” में श्रीराम जन्मभूमि विध्वंस का वर्णन November 18, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 2 Comments on तुलसीदास की रचना “दोहाशतक” में श्रीराम जन्मभूमि विध्वंस का वर्णन डा. राधेश्याम द्विवेदी गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने साहित्य व रचनाओं में अपने समय की प्रमुख घटनाओं का, राम जन्म भूमि पर हुए अत्याचार तथा बाबरी मस्जिद के बनाये जाने का उल्लेख किया है।आम तौर पर हिंदुस्तान में ऐसे परिस्थितियां कई बार उत्पन्न हुई जब राम -मंदिर और बाबरी मस्जिद (ढांचा ) एक विचार-विमर्श का […] Read more » तुलसीदास दोहाशतक श्रीराम जन्मभूमि विध्वंस का वर्णन
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-3 November 16, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment वैदिक गीता-सार सत्य : मानव जीवन की ऊहापोह हमारा सारा जीवन इस ऊहापोह में व्यतीत हो जाता है कि मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए? मेरे लिए क्या उचित है? और क्या अनुचित है? महाभारत के युद्ध के समय अर्जुन के समक्ष भी यही प्रश्न आ उपस्थित हुआ था। तब उसे कृष्णजी ने […] Read more » Featured गीता गीता का कर्मयोग मानव जीवन की ऊहापोह विश्व वैदिक गीता-सार सत्य