लेख साहित्य लछिराम भट्ट : बस्ती के छन्द परम्परा के जनक April 15, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment लछिराम की प्रसादगुणयुक्त ब्रजभाषा में रचनाएँ है। कुछ के नाम ये हैं - मुनीश्वर कल्पतरु, महेंद्र प्रतापरस भूषण, रघुबीर विलास, लक्ष्मीश्वर रत्नाकर, प्रतापरत्नाकर, रामचंद्रभूषण, हनुमंतशतक, सरयूलहरी, कमलानंद कल्पतरु, मानसिंह जंगाष्टक, , सियाराम चरण चंद्रिका, करुणाभरण नाटक, प्रेम रत्नाकर, राम रत्नाकर, लक्ष्मीश्वर रत्नाकर, रावणेश्वर कल्पतरु ,महेश्वर विलास ,नायिका भेद, देवकाली शतक, राम कल्पतरु, गंगा लहरी और नखशिख परम्परा आदि उनकी उत्कृष्ट रचनायें है। Read more » लछिराम भट्ट
लेख साहित्य मुगल वंश से पहले ही हो गया था कश्मीर का पीड़ादायक धर्मांतरण April 14, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment हैदरशाह का विश्वास पात्र भ्रत्यपूर्ण नामक एक नापित था। वह लोगों का अंग विच्छेद करवा देता था, यह उसके लिए एक साधारण बात हो गयी थी। उसने ठक्कुर आदि जैनुल आबेदीन के विश्वासपात्रों को आरों से चिरवा दिया था। राह चलते लोगों को अनायास पकडक़र पांच-पांच, छह-छह को एक साथ सूली पर चढ़वा दिया। वैदूर्य और भिषग को दूषक तथा परपथगामी जानकर हाथ, नाक और ओष्ठ पल्लव कटवा दिये। शिख, नोनक आदि संभ्रांत पांच छह व्यक्तियों की जीभ, नाक व हाथ कटवा दिये। लोग इतने आतंकित हो गये थे कि भय से स्वयं वितस्ता व झेलम में डूबकर भीम व जज्ज के समान प्राण विसर्जन कर देते थे। (भीम एवं जज्ज इन दोनों लब्धप्रतिष्ठित पंडितों ने नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या की थी) राजा स्वयं भी इन क्रूर हत्याओं के लिए प्रेरणा देता था। Read more » conversion of hindus to muslims in Kashmir Featured कश्मीर का धर्मांतरण मुगल वंश
कविता बच्चों का पन्ना साहित्य सुबह सुबह से ही रोजाना April 13, 2017 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment सुबह सुबह से ही रोजाना Read more » Featured सुबह सुबह से ही रोजाना
व्यंग्य लिबरल्स की दुखती रग पर देशभक्ति के पग April 12, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment अक्षय कुमार को अपनी फ़िल्म “रुस्तम” के लिए नेशनल अवार्ड क्या मिला लिबरल खेमे में रुदाली शुरू हो गई। वैसे लिबरल खेमे के लिए दुःख की बात ये है कि अक्षय कुमार को नेशनल अवार्ड देने का निर्णय अप्रैल में लिया गया, अगर यही निर्णय मार्च में ले लिया जाता तो सारे लिबरल्स “मार्च-एंडिंग” में […] Read more » देशभक्ति
व्यंग्य साहित्य सुबह लाठी, शाम चपाती …!! April 11, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment बिल्कुल बचपन में देखी गई उन फिल्मों की तरह कि जब मार - कुटाई की औपचारिकता पूरी हो जाए और हीरो पक्ष के लोग एक - दूसरे के गले मिल रहे होते तभी सायरन बजाती पुलिस की जीप वहां पहुंचती। अक्सर ऐसा होताा भी था। कभी किसी के पीछे हाथ धो कर पड़ जाते और जब बेचारा शिकार की तरह आरोपी बुरी तरह फंस जाता तो खुद ही वकील बन कर उसे बचाने भी पहुंच जाते। Read more »
व्यंग्य जनकल्याणकारी क्रोध से रचनात्मक हवाई चिंतन पर बैन April 10, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment बैन के दौरान, सांसद महोदय को जो मानसिक संताप झेलना पड़ा और कष्टपूर्ण रेल यात्रा करनी पड़ी उसकी ज़िम्मेदारी लोकतंत्र का कौनसा खंभा उठाएगा ? इस बैन की वजह से सांसद जी के रचनात्मक हवाई चिंतन में जो व्यवधान आया इसके लिए संसद के कौन से सदन में शून्यकाल के दौरान निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा? क्या सबसे बड़े लोकतंत्र के जनप्रतिनिधि अब इतने निःसहाय कर दिए जाएंगे की उन्हें मूड फ्रेश करने के लिए की गई मारपीट और हाथापाई के बाद कानूनी कार्यवाही और प्रतिबंध झेलना पड़ेगा? Read more » Featured हवाई चिंतन पर बैन
गजल साहित्य उर के उफानों में ! April 10, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment सकल सिकुड़न गात अकड़न, छोड़ सब संकोच जाती; मानसिक परिधि परे जा, वृत्तियाँ मृदु मधुर होती ! Read more » उर के उफानों में !
व्यंग्य सेल्फी सेल्फी सेल्फी April 9, 2017 by आरिफा एविस | Leave a Comment एक महाशय सुबह से इसी बात पे नाराज थे कि जिसे देखो वो सेल्फी खींच कर डालने पर अड़ा है, पड़ा है सड़ा है . सेल्फी देख देखकर कुढा रहे थे.’ मैंने भी पूछ ही लिया -“क्या हुआ भाई क्यों बडबडा रहे हो… बैठे बैठे.’ ‘क्या बताएं मैडम जिसे देखो वो सेल्फी लेकर फेसबुक और […] Read more » सेल्फी
व्यंग्य टांग खींचने की बीमारी April 9, 2017 by अशोक गौतम | Leave a Comment तभी साहब ने सचिव को बीच में रूकने का इशारा कर गंभीर हो कहा,‘ पर हां! एक बात का जयपुर से टांगें लाते हुए विशेश ख्याल रखा जाए। जो भी वहां टांगें खरीदने जाए वह असली का आभास देने वाली टांगें ही लाए ताकि सभी असली सी टांगें खींचने का समान रूप से मजा ले सकें। और हां! इसके बाद असली टांगें खींचना गैर कानूनी माना जाएगा। फिर मत कहना मैंने किसीकी एसीआर में रेड एंट्री कर दी । शर्मा जी! आपसे और आपके सहयोगियों से तब तक खास निवेदन है कि......’कह साहब ने उनकी ओर हाथ जोड़े। Read more » Featured the disease of leg pulling टांग खींचने की बीमारी
लेख साहित्य वैद्यराज श्री भट्ट के प्रयासों से कश्मीर फिर से बन गया था स्वर्ग April 9, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment ‘‘सामान्य रूप से यही समझा जाता है कि जौहर की प्रथा केवल राजपूतों में ही विद्यमान थी। परंतु ग्रीक सैनिकों ने भारतीय वीरों के इस आत्मोत्सर्ग से अभिभूत होकर उसका जो वर्णन किया है, उससे स्पष्ट है कि राजपूतों से पूर्व भी अपने देश में भारतीय वीरों में जौहर की तेजस्वी परंपरा कायम थी। जौहर शब्द की उत्पत्ति भी संभवत: जयहर शब्द से हुई हो। समरांगण में जीवन और मृत्यु का सौदा करने वाले भारतीय वीरों के अधिदेव थे-हर अर्थात महादेव। इसीलिए जयहर का घोष करती हुई भारतीय वीरों की वाहिनियां समरांगण में शत्रु सैन्य पर टूट पड़ती थीं। आगे चलकर मराठों का भी रणघोष ‘हर-हर महादेव’ ही प्रचलित हुआ। Read more » Featured कश्मीर फिर से बन गया स्वर्ग वैद्यराज श्री भट्ट
व्यंग्य हम और अहम April 8, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment हम "अहम" के बिना अधूरे है। गुरुर का सुरूर बहुत मुश्किल से उतरता है। हम हिंदुस्तानी, "ज़िंदगी झंड बा, फिर भी घमंड बा" की सनातन परंपरा के वाहक है और इस परंपरा को हमने अनादिकाल से जीवित रखा है जो परंपराओ के प्रति हमारे समर्पण और बिना शोषित हुए उन्हें पोषित करने की कला को दर्शाती है। Read more » हम और अहम
पुस्तक समीक्षा अपना आसमान तराशना April 7, 2017 by गंगानन्द झा | Leave a Comment जीवन में वृद्धि प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है, निश्चित पराजय के सामने रहते हुए भी वृद्धि में अवरोध नहीं आता। । अपनी पसन्द और नापसन्दी के कारण हम चीजों को उनके सही परिप्रेक्ष्य में नहीं देख पाते, क्योंकि हमारी समझ हमेशा लगाव और विमुखता से रंजित रहती है। सम्यक सफाई की जाने की जरूरत होती है ताकि चीजें वैसी ही नजर आएँ जैसी वे होती हैं। Read more » अपना आसमान तराशना