कविता साहित्य सुकमा और कुपवाड़ा में शहीद हुए अमर शहीदों को श्रद्धांजलि April 30, 2017 by हेमंत कुमावत 'हेमू ' | 2 Comments on सुकमा और कुपवाड़ा में शहीद हुए अमर शहीदों को श्रद्धांजलि व्यथित है मेरी भारत माँ, कैसे छंद प्यार के गाऊँ कैसे मैं श्रृंगार लिखुँ, कैसे तुमको आज हँसाऊ कलम हुई आक्रोशित, शोणित आखर ही लिख पाऊँ वीर शहीदों की शहादत को , शत शत शीश झुकाऊँ सिंदूर उजड़ गया माथे का, कंगना चूर चूर टूटे शहीद की विधवा के, पायल बिंदिया काजल छूटे हृदय […] Read more » कुपवाड़ा में शहीद हुए अमर शहीदों को श्रद्धांजलि शहीद हुए अमर शहीदों को श्रद्धांजलि सुकमा और कुपवाड़ा में शहीद हुए अमर शहीदों को श्रद्धांजलि सुकमा में शहीद हुए अमर शहीदों को श्रद्धांजलि
लेख साहित्य सबके आदर्श हैं भगवान परशुराम April 28, 2017 by डाॅ. कृष्णगोपाल मिश्र | Leave a Comment राष्ट्रकवि दिनकर ने सन् 1962 ई. में चीनी आक्रमण के समय देश को ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ शीर्षक से ओजस्वी काव्यकृति देकर सही रास्ता चुनने की प्रेरणा दी थी। युगचारण ने अपने दायित्व का सही-सही निर्वाह किया, किन्तु राजसत्ता की कुटिल और अंधी स्वार्थपूर्ण लालसा ने हमारे तत्कालीन नेतृत्व के बहरे कानों में उसकी पुकार ही नहीं आने दी। पाँच दशक बीत गये। इस बीच एक ओर साहित्य में परशुराम के प्रतीकार्थ को लेकर समय≤ पर प्रेरणाप्रद रचनायें प्रकाश में आती रहीं और दूसरी ओर सहस्रबाहु की तरह विलासिता में डूबा हमारा नेतृत्व राष्ट्र-विरोधी षडयन्त्रों को देश के भीतर और बाहर--दोनों ओर पनपने का अवसर देता रहा। परशुराम पर केन्द्रित साहित्यिक रचनाओं के संदेश को व्यावहारिक स्तर पर स्वीकार करके हम साधारण जनजीवन और राष्ट्रीय गौरव की रक्षा कर सकते हैं। Read more » भगवान परशुराम
कला-संस्कृति लेख साहित्य अयोध्या से दक्षिण कोरिया का अटूट पौराणिक सम्बन्ध April 28, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति किम देई जुंग और पूर्व प्रधानमंत्री हियो जियोंग और जोंग पिल किम कारक वंश से ही संबंध रखते थे। कारक वंश के लोगों ने उस पत्थर को भी सहेज कर रखा है जिसके विषय में यह कहा जाता है कि अयोध्या की राजकुमारी सुरीरत्ना अपनी समुद्र यात्रा के दौरान नाव का संतुलन बनाए रखने के लिए उसे रखकर लाई थी। किमहये शहर में राजकुमारी हौ की प्रतिमा भी है। कोरिया में रहने वाले कारक वंश के लोगों का एक समूह हर साल फरवरी-मार्च के दौरान राजकुमारी सुरीरत्ना की मातृभूमि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने अयोध्या आता है। Read more » अयोध्या दक्षिण कोरिया राजकुमारी सुरीरत्ना
कविता साहित्य किलकि चहकि खिलत जात ! April 27, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment किलकि चहकि खिलत जात ! किलकि चहकि खिलत जात, हर डालन कलिका; बागन में फागुन में, पुलक देत कहका ! केका कूँ टेरि चलत, कलरव सुनि मन चाहत; मौन रहन ना चहवत, सैनन सब थिरकावत ! चेतन जब ह्वै जावत, उर पाँखुड़ि खुलि पावत; अन्दर ना रहि पावत, बाहर झाँकन चाहत ! मोहत मोहिनी होवत, […] Read more » किलकि चहकि खिलत जात
कविता साहित्य आज मेरे देश की ज़मीं जी भर के रोई है, April 26, 2017 / April 26, 2017 by हिमांशु तिवारी आत्मीय | Leave a Comment हिमांशु तिवारी आत्मीय अपने लाल की फिक्र में वो न रात सोई है, हौले से उठाती है वो अपना आंचल, सूखे हुए आंसुओं से भी तलाश लेती है हर दर्द उसका, वो उंगलियां थामकर चलता था, हर तकलीफ में उसे मां याद आती थी, नींद न आती तो मां उसे लोरियां सुनाती थी, कई […] Read more » आज मेरे देश की ज़मीं जी भर के रोई है
लेख साहित्य राष्ट्रभाषा ही आत्मीय संस्कृति की अस्मिता की जनक । April 25, 2017 / April 25, 2017 by प्रो. पुष्पिता अवस्थी | Leave a Comment यूरोप के किसी देश में, यह फ्रांस हो या जर्मनी, स्पेन हो या पुर्तगाल, नीदरलैंड हो या पोलैंड । इन देशों में भारतवंशी जब आपस में मिलेंगे तो हिंदुस्तानी में वैसेही बातें करेंगे जिस तरह फ्रेंच से फ्रेंच और जर्मन से जर्मन बिना किसी हीनता ग्रंथि के आपस में संवाद करते हैं । भारतवंशियों को हिंदी भाषा परिवार की बोलियां उसी कोटि की हैं । जैसे फ्रेंच- जर्मन और डच भाषा परिवार की बोलियां । लेकिन यूरोप सहित विश्व के किसी भी देश में यदि कोई 15 - 20 वर्ष से रह रहा भारतीय किसी दूसरे भारतीय से मिलेगा तो वह अंग्रेजी में बातें करेगा। यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि यूरोप सहित अन्य देशों में भारतीयों के कारण हीअंग्रेजी बसर कर रही है ,उस देश के आम नागरिकों के कारण नहीं। Read more » Featured आत्मीय संस्कृति की अस्मिता की जनक । राष्ट्रभाषा
व्यंग्य लालबत्ती का फ्यूज हो जाना April 24, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment लालबत्ती हटाकर सरकार न केवल उस महान वीआईपी परंपरा ,जिसे कई नेताओ और अधिकारियों ने अपनी कार और अहंकार से सजाकर इस मुकाम तक पहुँचाया है, को लांछित करने का प्रयास कर रही है बल्कि आम आदमी की छवि को धूमिल करने का प्रयास भी कर रही है। क्योंकि जब तक समाज में वीआईपी रहेंगे तब तक आम आदमी उनको देखकर अपने को छोटा महसूस करता रहेगा और सरकारे उसके उत्थान हेतु कदम उठाती रहेगी। अगर समाज से वीआईपी सभ्यता ख़त्म होकर सभी आम आदमी हो गए तो सरकारे आम आदमी के कल्याण के लिए कहाँ से प्रेरणा लेगी। असली समाजवाद लाने के लिए देश में विशिष्ट और विशिष्टता का रहना अत्यंत आवश्यक है। विशिष्टता का शिष्टता में बदल जाना लोकतांत्रिक और सामाजिक मूल्यों के लिए खतरा है। Read more » लालबत्ती
व्यंग्य साहित्य सफ़र के हमसफ़र April 23, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment माता-पिता और गुरुओ के बाद मुझे बस कंडक्टर ही सबसे प्रेरणास्पद व्यक्तित्व लगता है क्योंकि वो भी तमाम कठिनाईयो के बावजूद आपको हमेशा "आगे बढ़ने" की प्रेरणा देता है। मुझे हमेशा से ही कंडक्टर नाम का व्यक्तित्व असामान्य और अद्भुत लगता रहा है क्योंकि जब रजनीकांत जैसा "महामानव असल ज़िंदगी में "कंडक्टर" की भूमिका निभा चुका हो तो कंडक्टर एक सामान्य व्यक्ति भला कैसे हो सकता है! मेरी राय में कंडक्टर किसी पार्टी हाई-कमान से कम हैसियत नहीं रखता है क्योंकि पार्टी हाई-कमान के बाद कंडक्टर ही एक ऐसा ऐसा व्यक्ति है जो "टिकट"देने में सबसे ज़्यादा आनाकानी करता है। विज्ञान के लिए टच-स्क्रीन पद्धति भले ही नई हो लेकिन कंडक्टर तो सदियो से "टच-पद्धति" का उपयोग कर खचाखच भरी बस में भी किसी भी कोने सेे किसी भी कोने तक पहुँचते रहे है। कंडक्टर के पास समय और "छुट्टे" की हमेशा किल्लत रहती है। Read more » Featured सफ़र के हमसफ़र
लेख साहित्य सिकंदर लोदी बारादरी पर मरियम उज-जमानी का मकबरा April 23, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment शाहजहां ने अपनी प्रेमिका मुमताज के लिए ताजमहल बनवाया, तो वहीं शाहजहां के पिता जहांगीर ने अपनी मां की याद में एक भव्य स्मारक बनवाया। नेशनल हाईवे दो पर अकबर टॉम्ब से महज 500 मीटर की दूरी पर यह मथुरा सड़क पर बायीं ओर तथा अकबर का मकबरा, सिकंदरा से पश्चिम की ओर मरियम का मकबरा स्थित है। मरियम उज-जमानी की मृत्यु 1622 में हुई और उसके बेटे जहांगीर ने उनके नाम पर इस महल का निर्माण करवाया था। यह महल अकबर के मकबरे के करीब ज्योति नगर में तंतपुर रोड पर स्थित है। पहले इस महल का निर्माण पर्दे में रहने वाली शाही औरतों के आवास के रूप में किया गया था। इस महल के प्रांगण के चारों ओर कई सारे कमरे बने हुए हैं। Read more » मरियम उज-जमानी का मकबरा
कला-संस्कृति लेख आगरा का इकलौता राजपूत सती स्मारक जसवंत की छतरी April 23, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी अमर इतिहास:- अमर सिंह राठौर जोधपुर के राजा गजसिंह के बड़े बेटे थे। मतभेद के बाद उन्होंने पिता का घर छोड़ दिया। अमर सिंह उस वक्त वीर योद्धाओं में गिने जाते थे और मुगल शहंशाह शाहजहां के दरबार में खास अहमियत रखते थे। सन् 1644 में अन्य दरबारियों ने उन पर जुर्माना […] Read more » सती स्मारक जसवंत की छतरी
कविता साहित्य धरती बेहद उदास है.. April 22, 2017 by अरुण तिवारी | Leave a Comment २२ अप्रैल – पृथ्वी दिवस पर विशेष कहते हैं, इन दिनों धरती बेहद उदास है इसके रंजो-गम के कारण कुछ खास हैं। कहते हैं, धरती को बुखार है; फेफङें बीमार हैं। कहीं काली, कहीं लाल, पीली, तो कहीं भूरी पङ गईं हैं नीली धमनियां। कहते हैं, इन दिनों…. कहीं चटके… कहीं गादों से भरे हैं […] Read more » धरती बेहद उदास है पृथ्वी दिवस
कविता साहित्य उठे कहाँ मन अब तक ! April 22, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment शब्द परश रूप गंध, रस हैं तन्मात्रा; छाता जब श्याम भाव, होता मधु-छत्ता ! राधा भव-बाधा हर, मिल जाती भूमा; अणिमा महिमा गरिमा, भा जाती लघिमा ! तनिमा तरती जड़ता, सुरभित कर उर कलिका; झंकृत तन्त्रित झलका, सुर आता रस छलका ! Read more » उठे कहाँ मन अब त