व्यंग्य आहत होने की चाहत March 24, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment राजनीती, खेल, बॉलीवुड,धर्म या अन्य किसी भी क्षेत्र से जुडी कोई भी घटना हो या इन से जुड़े किसी भी सेलेब्रिटी या किसी व्यक्ति का कोई भी बयान हो वो रोज़ सोशल मीडिया की भट्टी में ईंधन रूपी कच्चे माल के रूप में झोंक दिया जाता है जो "ट्रेंड"की शक्ल में बाहर निकल कर लोगो को कोमल भावनाए आहत करने का अपना क़र्ज़ और फ़र्ज़ अदा करता है। Read more » wish to get hurted आहत आहत होने की चाहत
कविता साहित्य भगवा और हरा March 23, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment राष्ट्रीय ध्वज के शीर्ष में लगा, भगवा को आदर हमने दिया। विदेशी हमले से ही आकरके, हरा रंग यहां फहराती है ।। भारत का मूल स्वरूप चेतना, औ गरिमा को गिरा दिया। हरा को बढ़ाचढ़ा करके, सभ्यता संस्कार धुलवाती है ।।4।। Read more »
कविता साहित्य मोदी विश्व का नेता बन, योगी गुरु जगत कहायेगा।। March 23, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment यूपी में ना शासन था, सब हाथ पर हाथ धरे रहे। योगीजी के आते ही, सब द्रुत गति से बदल रहे।। वह वक्त एक दिन आयेगा, योगी मोदी बन जाएगा। मोदी विश्व का नेता बन, योगी गुरु जगत कहायेगा।। Read more » उत्तम प्रदेश मोदी विश्व का नेता योगी गुरु जगत
व्यंग्य कुछ दिन तो गुजारो ; गुजरात ( माडल ) में March 23, 2017 by जगमोहन ठाकन | Leave a Comment मित्रों , अब तो अमिताभ बच्चन का कहा मानकर कुछ दिन तो गुजारो गुजरात (माडल) में । हाँ , पर चीख चीख कर यू पी चुनाव में ई वी एम मशीन पर सवाल उठाने वाली मायावती जी की बात भी सुन लो, कहीं वहाँ भी गुजराती माडल का प्रयोग तो नहीं किया गया है । क्योकि गुजराती माडल देता है परीक्षा में 100 % सफलता की गारंटी Read more »
लेख साहित्य धर्म का सत्य —- विज्ञान का सत्य March 22, 2017 by गंगानन्द झा | Leave a Comment सबसे सुन्दर और गम्भीर अनुभूतियाँ, जिनका हम अनुभव कर सकते हैं, अध्यात्म की सिहरन है। यह विज्ञान की शक्ति है। — एलबर्ट आइंस्टिन भगवान और भूत तमाम मानव सभ्यताओं में प्रारम्भ से मौजूद रहे हैं। इनके जरिए आदमी अपनी प्रासंगिकता समझता रहा है। प्राचीन सभ्यताएँ जीवों के साथ नदी, पर्वत, तथा हवा जैसी निर्जीव वस्तुओं […] Read more » dharam and science religion and science धर्म का सत्य विज्ञान का सत्य
आलोचना साहित्य मोदी राज में कितनी बदली भारतीय रेल …!! March 22, 2017 / March 22, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment इस साल मार्च में होली के दौरान उत्तर प्रदेश जाने का अवसर मिला। संयोग से इसी दौरान प्रदेश में चुनावी बुखार चरम पर था।वाराणसी से इलाहाबाद जाने के लिए ट्रेन को करीब पांच घंटे इंतजार करना पड़ा। वाराणसी से ही खुलने वाली कामायिनी एक्सप्रेस इस सीमित दूरी की यात्रा में करीब घंटे भर विलंबित हो गई। वापसी में भी कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ। प्लेटफार्मों पर किसी ट्रेन की बार - बार उद्घोषणा हो रही थी, तो कुछ ट्रेनों के मामलों में उद्घोषणा कक्ष की अजीब खामोशी थी। Read more » कितनी बदली भारतीय रेल
कहानी वरदान March 22, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment दूसरे ही दिन आशा के पिताजी का फोन आया और फिर वे अपनी पत्नी के साथ हमारे घर आ गये। प्रारम्भिक बात के बाद उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति और विवाह का बजट साफ-साफ हमें बता दिया। उन्होंने कहा कि यदि इसके बाद भी आप हमारी बेटी लेंगे, तो यह उनके लिए बहुत खुशी की बात होगी। आपके घर की बहू बनना आशा के लिए सौभाग्य की बात है। हम तो सोचते थे कि वह नर्स है, तो अस्पताल के किसी कर्मचारी से ही उसका विवाह कर देंगे; पर वह इतने अच्छे और सम्पन्न परिवार में जाएगी, यह तो हमने कभी सोचा ही नहीं था। Read more » वरदान
लेख साहित्य यकीऩ मानिए, आपके शब्द आपको महान बना देंगे March 22, 2017 by शालिनी तिवारी | 1 Comment on यकीऩ मानिए, आपके शब्द आपको महान बना देंगे यकीनन् यह हमें मानना ही होगा कि हम सब कुछ विशेष कार्य के निमित्त जन्में हैं. जीवन को व्यसनों, कुविचारों और अन्धकार में बिताने से तो ठीक ही है कि अपने मनो-मस्तिष्क एवं शब्दों को पवित्र रखें. हाँ कुछ लोग आज यह जरूर बोलते हैं कि अब इमानदारी का जमाना नहीं रहा. वह शायद आज यह भूल चुके हैं कि दुनियाँ को चलाने वाला सर्वशक्तिमान पहले भी वही था और आज भी वही है. Read more » Featured शब्द शब्द आपको महान बना देंगे
लेख साहित्य विश्वकाव्य दिवस के अवसर पर हिन्दी के कवियों का स्मरण भी आवश्यक March 22, 2017 / March 22, 2017 by डाॅ. कृष्णगोपाल मिश्र | Leave a Comment सुयश मिश्र 21 मार्च विश्वकाव्य दिवस के अवसर पर हिन्दी के एक बड़े अखबार (दैनिक भास्कर) जो कि स्वयं को देश का सबसे विश्वसनीय और नंबर-1 अखबार’ घोषित करता है, ने ‘ये हैं दुनियाँ की अब तक की सर्वश्रेष्ठ रचनाएं’ शीर्षक से बड़ा समाचार प्रकाशित किया। इस समाचार में विलियमशेक्सपियर कृत ‘सानेट-18’, जानडन कृत डेथ, […] Read more » विश्वकाव्य दिवस
लेख साहित्य एक बार फिर … March 20, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on एक बार फिर … तुम्हारा वक्तव्य पढ़ कर (चूँकि स्त्रियाँ इस मार्ग पर आ गयी हैं इसलिये ब्रह्मचर्य चिरजीवी नहीं होगा और सद्धर्म केवल पाँच सौ वर्षों तक चलेगा.“)पहले तो मैं यह समझने का यत्न करती रही कि इसके लिये दोषी किसे मानें -स्त्रियों को, सद्धर्म में दीक्षित ब्रह्मचर्य निभानेवाले को , या मानव की स्वाभाविक वृत्तियाँ को ? Read more »
व्यंग्य नेता वही जो वोट दिलाये March 19, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment होली आते ही मौसम सुहावना हो जाता है। हर तरफ बसंती उल्लास। नाचते-गाते लोग। मस्ती करते पशु और चहचहाते पक्षी। स्वच्छ धरती और मुक्त आकाश। डालियों पर हंसते फूल और कलियां। शीतल और गुनगुनी हवा में अठखेलियां करती गेहूं की बालियां। ऐसा लगता है मानो अल्हड़ नवयौवनाएं एक दूसरे के गले में हाथ डाले पनघट […] Read more » नेता वही जो वोट दिलाये
व्यंग्य छेड़छाड़ : हमारा राष्ट्रीय स्वभाव March 19, 2017 by अमित शर्मा (CA) | 1 Comment on छेड़छाड़ : हमारा राष्ट्रीय स्वभाव हम छेड़छाड़ के परंपरागत तरीको से आगे बढ़ चुके है, साइबर फ्रॉड, क्रेडिट कार्ड क्लोनिंग, हैकिंग जैसे नए "हथियारो" ने छेड़छाड़ का "मेकओवर" कर दिया है। छेड़छाड़ के लिए हाई-टेक और डिजिटल साधनो का प्रयोग हो रहा है जिससे कम समय में अधिक परिणाम आ रहे है और हमने प्रति घंटा छेड़छाड़ करने के अपने पिछले औसत को काफी पीछे छोड़ दिया। तकनीक ने हर चीज़ को बदल कर रख दिया लेकिन तकनीक हर जगह अंगुली करने की हमारी आदत को नहीं बदल पाई, अंतर केवल इतना आया है कि अब हम हर जगह अंगुली, टच-स्क्रीन के माध्यम से करते है। Read more » छेड़छाड़ हमारा राष्ट्रीय स्वभाव