आर्थिकी लेख साहित्य पंजाब सरकार के गले की फांस बनी कृषि ऋण माफ़ी योजना August 18, 2017 by जगमोहन ठाकन | Leave a Comment पंजाब विधान सभा चुनावों में सभी पार्टियों ने अपने अपने लुभावने वायदे जनता के बीच परोसे थे ,परन्तु कामयाबी कांग्रेस को ही मिली, चाहे इसके लिए उसे कोई भी घोषणा क्यों ना करनी पड़ी हो . उसने किसानों की कर्जा माफ़ी की घोषणा करी , तो युवाओं के लिए फ्री स्मार्ट फ़ोन देने का वायदा […] Read more » agriculture loan waiver Featured Punjab कृषि ऋण माफ़ी योजना
कविता साहित्य तुम याद आते हो August 18, 2017 by अनुप्रिया अंशुमान | Leave a Comment मेरे गाँव,मेरे देश,तुम बहुत याद आते हो जब ढूँढना पड़ता है, एक छांव वो नल, जो बिन पैसे की ही प्यास बुझाती है तब मेरे गाँव, तुम बहुत याद आते हो निगाहें टिक गयी ,उन आते जाते लोगों देखकर पर हृदय में कोई रुदन करता है कि क्यूँ … मैं भी आज इसका किस्सा हूँ […] Read more » तुम याद आते हो
व्यंग्य साहित्य सस्ता घुटना बदल August 18, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment भारत सरकार ने दिल के बाद अब घुटनों की सर्जरी भी सस्ती कर दी है। इससे उन लाखों बुजुर्गों को लाभ होगा, जो कई साल से घुटना बदलवाना चाहते थे; पर शर्मा जी को लग रहा है कि इसके पीछे सरकार का कोई छिपा एजेंडा जरूर है। कल जब मैं उनके साथ चाय पी रहा […] Read more » easy knee surgery Featured सस्ता घुटना बदल
व्यंग्य साहित्य वो दाल-दाल, ये साग-साग August 17, 2017 / August 18, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment मैं साहित्यप्रेमी तो हूं, पर साहित्यकार नहीं। इसलिए किसी कहावत में संशोधन या तोड़फोड़ करने का मुझे कोई हक नहीं है; पर हमारे प्रिय शर्मा जी परसों अखबार में छपी एक पुरानी कहावत ‘तुम डाल-डाल, हम पात-पात’के नये संस्करण ‘वो दाल-दाल, ये साग-साग’के बारे में मुझसे चर्चा करने लगे। – वर्मा, ये दाल और साग […] Read more » ये साग-साग वो दाल-दाल
लेख साहित्य मानव शरीर की सार्थकता August 17, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी एक जीव के लिये मनुष्य शरीर एक अलभ्य अवसर होता है! इस का सदुपयोग करने से वह जीवन लक्ष्य को प्राप्त करता हुआ परम शान्ति का अधिकारी बन सकता है, किन्तु यदि वह इस अवसर को व्यर्थ गँवाता है अथवा दुरुपयोग करता है तो फिर नरक की यातनायें मिलती हैं और चौरासी […] Read more » the importance of human body मानव शरीर
लेख साहित्य देशभक्ति और कृष्णभक्ति के पर्व हैं स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी August 14, 2017 / August 18, 2017 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment (71वें स्वतंत्रता दिवस और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष आलेख) इस साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी दोनों साथ-साथ पडे हैं, दोनों पर्वों का अपना-अपना महत्व है। एक पर्व स्वतंत्रता दिवस है जो कि हमारा राष्ट्रीय पर्व है, इसी दिन हमारा हिन्दुस्तान आज से 70 साल पहले 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से […] Read more » कृष्णभक्ति जन्माष्टमी देशभक्ति स्वतंत्रता दिवस
व्यंग्य चोटी से नाक तक, वो काटा… August 13, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment इन दिनों महिलाओं की चोटी काटने या कटने की चर्चा से अखबार भरे हैं। यह सच है या झूठ, अफवाह है या मानसिक रोग, घरेलू झगड़ा है या कुछ और, ये शायद कभी पता न लगे। कोई समय था जब मोटी और लम्बी चोटी फैशन में थी। तभी तो माता यशोदा बार-बार कान्हा को […] Read more » choti katwa चोटी महिलाओं की चोटी काटने या कटने
कविता साहित्य जीवन की ताल August 13, 2017 / August 14, 2017 by बीनू भटनागर | Leave a Comment जीवन की हर ताल पे कोई , गीत नया होगा हँसते – गाते जी लेंगे जो , होगा सो होगा नए राग में एक नयी धुन , हमने बनायी है उस धुन में जो शब्द भरे वो , सच्चा कवि होगा भक्ति – भाव श्रृंगार हो चाहे , चाहे हो नवगीत साज़ नया , अंदाज़ नया हो , गीत,ग़ज़ल होगा अलग रागिनी,अलग ताल हो,सुर लय की बंदिश गूँजेंगे जब गीत सुरीले , रंग अलग होगा वीणा बंसी और मृदंग की,संगत जब होगी गीत सुरीला कानों मे,अमृत सा घु ला होगा कवि के शब्द सुरों में बंधकर,ता लबद्ध होंगे, भाव बहेंगें शब्द मिलेंगे,जादुइ असर होगा Read more » जीवन की ताल
कहानी साहित्य औरत, औरत की दुश्मन.. August 10, 2017 / August 10, 2017 by अमन कौशिक | Leave a Comment हर शाम की तरह आज भी ऑफिस से आने के बाद घर का वही माहौल था। सब बैठ कर, एक टीम बना कर इधर उधर की बातें कम और चुगलियां ज्यादा कर रहे थे, और मम्मी हमेशा की तरह टीम की कप्तान थी। शायद वो सही कहता है, कि तुम्हारी माँ सब को अपने उंगली […] Read more » औरत औरत की दुश्मन
लेख साहित्य ग्रामीण पत्रकारिता में जनक एक स्वतंत्रता सेनानी पं.गोपालकृष्ण पुराणिक August 9, 2017 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव मैं जब पोहरी के आदर्श विद्यालय में कक्षा पांच से नवीं तक पढ़ा, तब पत्रकारिता में मेरा ज्ञान शून्य था। जबकि मैं उस महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और ग्रामीण पत्रकारिता के प्रमुख जनकों में एक पं गोपालकृष्ण पुराणिक द्वारा स्थापित विघालय में पढ़ता था। यह कालखंड 1964 से 1969 के बीच का रहा […] Read more » Featured पं.गोपालकृष्ण पुराणिक स्वतंत्रता सेनानी स्वतंत्रता सेनानी पं.गोपालकृष्ण पुराणिक
व्यंग्य माले मुफ्त दिले बेरहम August 8, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment इसे पढ़कर आप कोई गलतफहमी न पालें। मैं कोई मुफ्त चीज बांटने नहीं जा रहा हूं। इस कहावत का अर्थ है कि यदि कोई चीज मुफ्त में मिल रही हो, तो फिर उसके लिए हाथ, जेब और झोली के साथ ही दिल भी बेरहम हो जाता है। भले ही वो हमारे काम की हो या […] Read more » Featured माले मुफ्त दिले बेरहम मुफ्तखोरी
लेख कर्मण्येवाधिकारस्ते August 6, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment आचार्य राधेश्याम द्विवेदी कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ॥ श्रीमद् भगवत गीता के अध्याय दो के 47वें श्लोक का अर्थ होता है कि कर्तव्य कर्म करने में ही तेरा अधिकार है फलों में कभी नहीं. अतः तू कर्मफल का हेतु भी मत बन और तेरी अकर्मण्यता में भी आसक्ति न हो. इस […] Read more » कर्मण्येवाधिकारस्ते