लेख ज़हरीली होती यमुना आचमन योग्य नहीं April 21, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी यमुना की त्रासद व्यथा:- कालिंदी का कल-कल निनाद शांत होता जा रहा है। उसकी धारा सिकुड़ती जा रही है । उसका पवित्र जल आचमन योग्य नहीं रहा है । जिससे यमुना प्रेमियों का मन आहत है। यमुना से कृष्ण का अटूट नाता रहा है और इसकी पवित्रता को बरकरार रखने के लिए […] Read more » Featured ज़हरीली होती यमुना यमुना यमुना आचमन योग्य नहीं
लेख साहित्य सिकन्दर लोदी ने बसाया था सिकन्दरा April 21, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment अकबर टॉम्ब में रहने वाले ब्लैक बक तकरीबन सवा सौ साल से भी अधिक समय से रह रहे हैं। अकबर टॉम्ब के अंदर का एरिया ब्लैक बक के लिए लम्बे समय से नेचुरल हैबिटेट बना हुआ है। ब्लैक बक के साथ ही साथ बीते समय में यह मॉन्युमेंट लंगूरों की उपस्थिति के लिए भी खासा फेमस रहा है। सिकन्दरा में अकबर के मकबरे के परिसर में घूमने आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण के केन्द्र दुर्लभ ब्लैक बक (हिरन) के संरक्षण की एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की जा रही है। Read more » अकबर का मकबरा सिकन्दर लोदी सिकन्दरा
व्यंग्य साहित्य #लाल_बत्ती_भाई_को_मेरा_ख़त April 21, 2017 by अश्वनी कुमार, पटना | Leave a Comment #लाल_बत्ती भाई, इतने दिनों तक नेताओं, अफसरों और अमीरों के सर पर चढ़े रहने के बावजूद भी तुम्हें देश याद नहीं करता था| जो देश की सवारी करता था तुम उसकी सवारी करते थे, इसलिए हम तुम्हें याद कर रहे हैं, देश याद कर रहा है| क्योंकि तुम 1 मई से किसी कबाड़ख़ाने में पड़े […] Read more » #लाल_बत्ती
कविता नन्हीं जी April 21, 2017 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment आज हमारी नन्हीं जी ने, रोटी सुन्दर गोल बनाई। कई दिनों से सीख रही थी, रोटी गोल बनेगी कैसे। बन जाता आकार चीन सा, कभी बना रशिया के जैसे। बहुत दिनों के बाद अधूरी, साध आज पूरी हो पाई। हँसा गैस का चूल्हा,काला, गूँगा ,गोल तवा मुस्काया। पटा और बेलन ने उससे, हलो कहा और […] Read more » नन्हीं जी
व्यंग्य साहित्य नींद क्यों रात भर नहीं आती April 18, 2017 / April 18, 2017 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment ड़ोस में नई नई उसारी गई मस्जिदों से लाउड स्पीकरों से 'आज़ान ' अल्लाहो अकबर के कर्कश आगाज़ से जगा देती है ..... पी जी आई के सबसे बड़े ख्याति प्राप्त न्यूरो डाक्टर हैरान हैं ..... कि यह शख्स सोता क्यों नहीं ..... इस बार तो डाक्टर साहेब ने दुखी हो कर मेरा केस 'पागलों 'के एक्सपर्ट को रैफर कर दिया है .... मैं सोचता हूँ 'वह ' भी क्या करेगा ..... फिर से ग़ालिब की याद ! ...... मौत का एक दिन मय्यन है ...नींद क्यों रात भर नहीं आती। Read more » Featured
कविता साहित्य पूरा हिमालय मेरा घर April 17, 2017 / April 17, 2017 by आशुतोष माधव | 1 Comment on पूरा हिमालय मेरा घर बाहें फैलाए मिलता है नगाधिराज अपने पूरे मन से अब हिमालय आपका है शतद्रु की दूधधारा और लाल दहकते बुरांश सब, आपके हैं Read more » मेरा घर हिमालय
कविता साहित्य कुलभूषण जाधव की फाँसी पर सवाल करती कविता April 17, 2017 / April 17, 2017 by हेमंत कुमावत 'हेमू ' | 4 Comments on कुलभूषण जाधव की फाँसी पर सवाल करती कविता ना मानेगा धूर्त पड़ौसी , शांति की वार्ताओं से अब हल नहीं निकलेगा , सिर्फ कड़ी निंदाओ से कुलभूषण की फाँसी पर ,क्यों मौन साधना साधे हो अफजल के चाचाओं ,क्या सिर्फ दुश्मन के प्यादे हो सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर , रतजागा सा कर डाला एक आतंकी की फांसी पर , रोये थे जो […] Read more » Featured कुलभूषण जाधव कुलभूषण जाधव को मौत की सजा
लेख शख्सियत रंग नारायण पाल जूदेव वीरेश ‘रंगपाल’ April 16, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी कवियित्री मां से मिली प्रेरणा :- रंगपाल नाम से विख्यात महाकवि रंग नारायण पाल जूदेश वीरेश पाल का जन्म नगर पंचायत हरिहरपुर में फागुन कृष्ण 10 संवत 1921 विक्रमी को हुआ था। उनके पिता का नाम विश्वेश्वर वत्स पाल तथा माता का नाम श्रीमती सुशीला देवी था । उनके पिता जी राजा […] Read more » रंग नारायण पाल जूदेव वीरेश ‘रंगपाल’
लेख शख्सियत साहित्य मानवीय चेतना और राष्ट्रीयता के कवि : पंडित बलराम प्रसाद मिश्र ‘द्विजेश’ April 16, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधे श्याम द्विवेदी ‘नवीन’ पारिवारिक परिचय:-बस्ती जिले का मिश्रौलिया गांव में हर दयाल मिश्र का एक अच्छा खाता पीता घराना था। वह एक जमीदार थे। वे अपनी पालकी के साथ बस्ती राजा के यहाँ भी आया जाया करते थे। उन पर राजा साहब की कृपा दृष्टि बनी रहती थी। उनके पुत्र का नाम उदित […] Read more » Featured पंडित बलराम प्रसाद मिश्र ‘द्विजेश’
कविता साहित्य कोई मिल पल में चल देता ! April 16, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment कोई मिल पल में चल देता, कोई कुछ वर्ष संग देता; जाना सबको ही है होता, मिलन संस्कार वश होता ! विदा क्षण क्षण दिये चलना, अलविदा कभी कह देना; यही कर्त्तव्य रह जाता, मुस्करा भाव भव देना ! चले सब जाते अपनी धुन, झाँकते चलते दे चितवन; नज़र में रखे निज मंज़िल, कभी उर्मिल […] Read more » कोई मिल पल में चल देता !
व्यंग्य दिमागीन सर्विस सेंटर April 15, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment बचपन में एक कहावत सुनी थी, ‘सिर बड़े सरदारों के, पैर बड़े कहारों के।’ बुजुर्ग बताते थे कि सरदार यानि सिख पगड़ी बांधते हैं, इसलिए उनका सिर बड़ा दिखायी देता है। दूसरी ओर कहार दिन भर सामान उठाकर इधर-उधर भागता रहता है। पैरों पर अधिक बोझ पड़ने के कारण उसके पैर बड़े हो जाते हैं। […] Read more » दिमागीन सर्विस सेंटर
दोहे बाबा तेरी ज्योति से ज्योति April 15, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी ‘नवीन’ आचार्य पं. मोहन प्यारे द्विवेदी ‘मोहन’ (01.04.1909-15.04.1989) स्मृति पखवारा 29वी पुण्य तिथि पर सादर श्रद्धांजलि बाबा तेरी ज्योति से ज्योति, हर पल जलती जाती है । दुनिया की झंझावातों से वह, कभी नहीं बुझ पाती है ।। जब एक भी दीया जलता है, सारी दुनिया प्रकाशित होती है। जब एक बुद्धत्व […] Read more » बाबा तेरी ज्योति से ज्योति