व्यंग्य “लांच” होने से ज़्यादा रूचि “लंच” करने में February 18, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment इसरो ने अंतरिक्ष में 104 उपग्रह एक साथ छोड़कर उन्हें सफलतापूर्वक अपनी कक्षा में स्थापित कर दिया है,ये पूरे देश के लिए तो गर्व की बात है ही लेकिन मेरे लिए यह गर्व के साथ -साथ प्रेरणास्पद बात भी है क्योंकि बचपन में अपने मम्मी-पापा के कई असफल प्रयासों के बाद भी मैं अपनी स्कूल […] Read more »
व्यंग्य नये इसरो की तलाश February 18, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment इन दिनों हर कोई ‘इसरो’ के गुण गा रहा है। सचमुच उसने काम ही ऐसा किया है। दुनिया में आज तक कोई देश एक साथ 104 उपग्रह सफलतापूर्वक प्रक्षेपित नहीं कर सका है। जो लोग वैज्ञानिक सफलता के नाम पर सुबह उठते ही अमरीका और रात में सोने से पहले रूस की माला जपते हैं, […] Read more » नये इसरो की तलाश
व्यंग्य साहित्य नेता जी के साथ एक दिन February 15, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment ये चुनाव के दिन हैं। जिसे देखो अपनी प्रशंसा और दूसरे की बुराई करने में दिन-रात एक कर रहा है। नेता लोग दूसरे की सबसे अधिक आलोचना जिस मुद्दे पर करते हैं, वह है भ्रष्टाचार। लेकिन चुनाव जीतते ही अधिकांश लोग उसी काम में लग जाते हैं, जिसकी आलोचना कर वे चुनाव जीतते हैं। कई […] Read more » Featured नेता जी के साथ एक दिन
कहानी साहित्य टिया और मैं February 13, 2017 by गंगानन्द झा | Leave a Comment एक मशहूर पौराणिक कथा से बात शुरु होती है। नारद मुनि को हाथ में तेल से लबालब भरा कटोरा लिए राजर्षि जनक के बाग का पूरा चक्कर लगाने को कहा गया था। शर्त थी कि तेल की एक भी बूँद छलकने नहीं पाए। मुनिवर ने सफलतापूर्वक चक्कर लगाया। अब उनसे बाग का वर्णन देने को […] Read more » टिया और मैं
व्यंग्य मफलर के मौसम में रेनकोट February 13, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment मफलर के मौसम में रेनकोट के चर्चे है। कपड़ो का उपयोग उनकी प्रवृति के हिसाब से अब किसी मौसम विशेष तक सीमित नहीं रह गया हैै वो अपनी सीमाए लांघकर हर मौसम में “सर्जिकल- स्ट्राइक” कर अपनी निर्भरता और उपयोगिता का लौहा मनवा रहे है। यह उल्लेखनीय है की ये लोहा , “लौहपुरुष” के मार्गदर्शक […] Read more » मफलर रेनकोट
पुस्तक समीक्षा साहित्य ‘उत्तर प्रदेश – विकास की प्रतीक्षा में’ पुस्तक समीक्षा February 13, 2017 / February 13, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment Bloomsbury प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में पिछले 15 सालों में सपा-बसपा द्वारा उत्तर प्रदेश में किये गए कु-शासन को विस्तार से व्यापक रिसर्च करके प्रस्तुत किया गया है. इस पुस्तक के लेखक है, शान्तनु गुप्ता, जिन्होंने लंदन से पॉलिसी और राजनीति की पढ़ाई की है। और लम्बे समय से भारत में डिवेलप्मेंट रीसर्च में […] Read more » Book by Shantanu Gupta book review by Shantanu Gupta Uttar Pradesh Vikas ki pratiksha mein उत्तर प्रदेश - विकास की प्रतीक्षा में
व्यंग्य साहित्य वाद, विवाद और विकासवाद February 10, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment सिरदर्द के अनेक कारण होते हैं। कुछ आतंरिक होते हैं, तो कुछ बाहरी। पर मेरे सिरदर्द का एक कारण हमारे पड़ोस में रहने वाला एक चंचल और बुद्धिमान बालक चिंटू भी है। उसके मेरे घर आने का मतलब ही सिरदर्द है। कल शाम को मैं टी.वी. पर समाचार सुन रहा था कि वह आ धमका। […] Read more » Featured पूंजीवाद वाद विकासवाद विवाद विवाद और विकासवाद समाजवाद
साहित्य ऊर्ध्व हर विन्दु रहा अवनी तल ! February 10, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment ऊर्ध्व हर विन्दु रहा अवनी तल, गोल आकार हुआ प्रति-सम चल; जीव उत्तिष्ट शिखर हर बैठा, रेणु कण भी प्रत्येक है एेंठा ! कम कहाँ किसी से रहा कोई, लगता पृथ्वी पति है हर कोई; देख ना पाता कौन इधर उधर, समझता स्वयं को महा भूधर ! अधर फैला हुआ है शून्य तिमिर, घूमते पिण्ड […] Read more » ऊर्ध्व हर विन्दु रहा अवनी तल !
कविता साहित्य उर में आता कोई चला जाता ! February 10, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment उर में आता कोई चला जाता, सुर में गाता कभी है विचलाता; सुनहरी आभा कभी दिखलाता, कभी बे-रंग कर चला जाता ! वश भी उनका स्वयं पे कब रहता, भाव भव की तरंगें मन बहता; नियंत्रण साधना किये होता, साध्य पर पा के वो कहाँ रहता ! जीव जग योजना विविध रहता, विधि वह उचित […] Read more » उर में आता कोई चला जाता !
दोहे साहित्य बीजू के छक्के February 9, 2017 by विजय सिंघल | Leave a Comment तमिलनाडु में चल रही है जूतमपैजार। शशीकला ने खींच ली सेल्वम की सरकार॥ सेल्वम की सरकार कि इस पर मैं बैठूँगी। जया सहेली की विरासत बस मैं ही लूँगी॥ कह “बीजू” जो रौनक़ यूपी के चुनाव में। उससे ज़्यादा मज़ा आ रहा तमिलनाडु में॥ 2. राज्य सभा में अटक गये हैं विपक्ष के प्राण। मोदी […] Read more » बीजू के छक्के
राजनीति व्यंग्य मैं वोट जरूर दूंगा February 8, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment चुनाव के दिन जैसे-जैसे पास आ रहे हैं, हर कोई उसके रंग में रंगा दिख रहा है। किसी ने छत पर अपनी मनपंसद पार्टी का झंडा लगाया है, तो किसी ने सीने पर उसका बिल्ला। कुछ लोगों ने साइकिल, स्कूटर और कार पर ही अपने प्रिय प्रत्याशी को चिपका लिया है। पान की दुकान हो […] Read more » Featured मैं वोट जरूर दूंगा वोट वोट दूंगा
व्यंग्य साहित्य आलू और पनीर (सेल्वम्) February 7, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment दुनिया की हर भाषा में लोकजीवन में प्रचलित प्रतीकों और मुहावरों का बड़ा महत्व है। फल-सब्जी, पशु-पक्षी और व्यवहार या परम्पराओं से जुड़ी बातें साहित्य की हर विधा को समृद्ध करती दिखती हैं। अब आप आलू को ही लें। यह हर सब्जी में फिट हो जाता है। इससे नमकीन और मीठे, दोनों तरह के व्यंजन […] Read more » Featured आलू और पनीर (सेल्वम्)