कविता साहित्य सोने नहीं देते…… June 15, 2017 by बीनू भटनागर | Leave a Comment कभी कभी कुछ शब्द, सोने नहीं देते…… जब तक उन्हे किसी कविता का आकार न दे दूँ। कभी कभी कोई धुन, सोने नहीं देती….. जब तक उसमे शब्द पिरोकर, गीत का कोई रूप न दे दूँ। कभी कभी कोई विचार सोने नहीं देते….. जब तक विचारों को संजोकर आलेख का आकार न […] Read more » sleeplessness कुछ शब्द सोने नहीं देते
व्यंग्य साहित्य यह आंदोलन , वह आंदोलन ….!! June 13, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment बेशक अपराधी के गांव वाले या परिजनों के लिए यह मामूली बात थी। क्योंकि उसका जेल आना – जाना लगा रहता था। अपराधी को जीप में बिठाने के दौरान परिजनों ने पुलिस वालों से कहा भी कि ले तो जा रहे हैं ... लेकिन ऐसी व्यवस्था कीजिएगा कि बंदे को आसानी से जमानत मिल जाए। पुलिस ने केस फारवर्ड किया तो अदालत ने उसकी जमानत याचिका नामंजूर करते हुए आरोपी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। बस फिर क्या था। आरोपी के गांव में कोहराम मच गया। लोगों ने पास स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग पर पथावरोध कर ट्रैफिक जाम कर दिया। सूचना पर पुलिस पहुंची तो उन्हें दौड़ा – दौड़ा कर पीटा। Read more » Featured आंदोलन
कविता साहित्य आदमी June 13, 2017 by बीनू भटनागर | Leave a Comment हज़ारों की भीड़ में भी, अकेला है आदमी! आदमी ही आदमी को, नहीं मानता आदमी! संवेदनायें खो गईं, चोरी क़त्ल बढ़ गये, कोई भी दुष्कर्म करते, डरता नहीं अब आदमी। भगवान ऊपर बैठकर ये सोचता होगा कभी, ऐसा नहीं बनाया था मैने क्या बन गया है आदमी! स्वार्थ की इंतहा हुई , भूल गया दोस्ती […] Read more » आदमी
कविता तोहफे June 13, 2017 / June 13, 2017 by बीनू भटनागर | Leave a Comment मै नहीं कोई ताल तलैया ना ही मैं सागर हूँ। मीठे पानी की झील भी नहीं, मैं बहती सरिता हूँ। सरल नहीं रास्ते मेरे चट्टनों को काटा है। ऊपर से नीचे आने.में झरने कई बनाये मैने इन झरनों के गिरने पर प्रकृति भी मुस्काई है पर मेरी इक इक बूँद ने यहाँ हर पल चोट […] Read more » तोहफे
दोहे साहित्य जो छा रहा वह जा रहा ! June 12, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment जो छा रहा वह जा रहा ! जो छा रहा वह जा रहा, ना संस्कार बना रहा; प्रारब्ध है कुछ ढा रहा, ना लोभ पैदा कर रहा ! मन मोह से हो कर विलग, लग संग मन-मोहन सजग; नि:संग में सब पा रहा, वह हो असंग घुला मिला ! खिल खिला कर है वह खुला, […] Read more »
लेख साहित्य बटेश्वर के मंदिरों का खतरों से भरा जीर्णोद्धार कार्य June 12, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment चम्बल की घाटी में लगभग 10 एकड़ जगह में बने इन मंदिरों के बारे में जब पता चला कि एक मुस्लिम अधिकारी डॉ के. के. मुहम्मद ने इनके जीर्णोद्धार करने का बीड़ा उठाया है तो सबको बहुत ही आश्चर्य हुआ। उस समय मुश्किल यह थी कि वहां आसपास चम्बल के डकैतों का डर व्याप्त था। इसलिए न तो कोई अधिकारी आगे बढ़ रहा था और न काम करने वाले मजदूर। Read more » बटेश्वर
व्यंग्य साहित्य सम्मानित करने का टुकड़ा June 11, 2017 by अशोक गौतम | Leave a Comment ज्यों ही यह खबर पूरे जंगल में जंगल की आग की तरह फैली कि मैं अबके फिर अपनी टांग अड़ा सरकार की नरवंश अधिसूचना कमेटी का सक्रिय सदस्य हो गया हूं, तो मुझे देश के समस्त पशुओं, जानवरों के संगठनों के फोन पर फोन आने लगे। आदमी तो मुझे देखते ही ऐसे गायब हो जाते […] Read more » नरवंश अधिसूचना कमेटी सम्मानित सम्मानित करने का टुकड़ा
व्यंग्य राहुल बाबा का गीता ज्ञान June 11, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment मेरी राय है कि इसके बाद वे रामायण, महाभारत, वेद, पुराण और स्मृतियों का भी अध्ययन करें। अच्छा हो वे श्री गुरुग्रंथ साहब, बाइबल, कुरान, त्रिपिटक और जैनागम ग्रंथ भी पढ़ें। इससे उन्हें भारत में प्रचलित विभिन्न धर्म, पंथ, सम्प्रदाय और मजहबों के बारे में पता लगेगा। इस जन्म की तो मैं नहीं जानता, पर शायद इससे उनका अगला जन्म सुधर जाए। Read more » Featured Rahul Gandhi reading Gita and Upanishaad राहुल बाबा का गीता ज्ञान
दोहे साहित्य मो कूँ रहत माधव तकत ! June 10, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment मो कूँ रहत माधव तकत, हर लता पातन ते चकित; देखन न हों पावति तुरत, लुकि जात वे लखि मोर गति ! मैं सुरति जब आवति रहति, सुधि पाइ तिन खोजत फिरति; परि मुरारी धावत रहत, चितवत सतत चित मम चलत ! जानत रहत मैं का चहत, प्रायोजना ता की करत; राखत व्यवस्थित व्यस्त नित, […] Read more » मो कूँ रहत माधव तकत
कहानी साहित्य पागल June 10, 2017 by तेजू जांगिड़ | Leave a Comment गाँव में उन दिनों खूब आंधी चल रही थी जिससे वहां की बालू रेत भी खूब उड़ रही थी। सारा माहौल कुछ मटमैले रंग का प्रतीत हो रहा था। एक तो आंधी ऊपर से ये तेज धूप, कोई अपने घरों से दोपहर को बाहर तक नहीं निकलता था। कौन खामखां आंधी में परेशानी उठाए भला। […] Read more » पागल
लेख साहित्य ब्रह्मा विष्णु और रुद्र के संयुक्त स्वरुपवाली विश्व की पहली स्मार्ट सिटी है अयोध्या June 10, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 1 Comment on ब्रह्मा विष्णु और रुद्र के संयुक्त स्वरुपवाली विश्व की पहली स्मार्ट सिटी है अयोध्या डा. राधेश्याम द्विवेदी वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, “अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या” और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग 144कि.मी) लम्बाई तीन योजन (लगभग 36 कि.मी.) चौड़ाई में […] Read more » Featured अयोध्या
लेख साहित्य आजादी के महानायक बिरसा मुंडा June 9, 2017 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment 9 जून विशेषः- मृत्युंजय दीक्षित आजादी के महानायक और मुंडा आदिवासियों के भगवान बिरसा मुंडा । बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों से जबर्दस्त संघर्ष करते हुए 9 जून 1900 को अंतिम संास ली थी। ज्ञातव्य है कि तत्त्कालीन झारखंड राज्य अंग्रेजांे के आधीन हो चुका था और अंग्रेजों ने आदिवासियों के साथ काफी निर्ममतापूर्वक व्यवहार किया […] Read more » बिरसा मुंडा