कहानी चश्मा May 13, 2017 by देवेश शास्त्री | Leave a Comment देवेश शास्त्री ………. उन्हें नीति-नेम, धर्म-कर्म से कोई मतलब नहीं था। उसकी स्वाभाविक वृत्ति राजनैतिक रूप से ऐन-केन प्रकारेण अपना उल्लू सीधा करने यानी कमाऊ जुगाड़ भिड़ाने की रही है। कई बार चुनाव भी लड़ा और हारते रहे, उनका नजरिया चुनाव जीतने की बजाय आलाकमान से मिलने वाले चुनावी खर्चे को हड़पने और क्षेत्रीय रसूख […] Read more » ‘‘चश्मा’’
व्यंग्य साहित्य दूर के रसगुल्ले , पास के गुलगुले …!! May 12, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा इसे जनसाधारण की बदनसीबी कहें या निराशावाद कि खबरों की आंधी में उड़ने वाले सूचनाओं के जो तिनके दूर से उन्हें रसगुल्ले जैसे प्रतीत होते हैं, वहीं नजदीक आने पर गुलगुले सा बेस्वाद हो जाते हैं। मैगों मैन के पास खुश होने के हजार बहाने हो सकते हैं, लेकिन मुश्किल यह कि […] Read more » दूर के रसगुल्ले
लेख साहित्य अपदीपो भव …………. May 11, 2017 by वीरेंदर परिहार | Leave a Comment भगवान बुद्ध ने कहा कि वही सुखी है जो जय-पराजय की भावना का त्याग करता है। वजह यह कि जय की भावना से बैर उत्पन्न होता है, पराजय से दुःख उत्पन्न होता है। उनका मानना था - अक्रोध के द्वारा क्रोध को, साधुता के द्वारा असाधु भाव को, दान के द्वारा कदर्प और सत्य के द्वारा मृषावाद या झूंठ को जीतना चाहिए। उनके अनुसार जिसका किसी से बैर नही है और जो सभी प्राणियों से मैत्री करता है वही सुखी होता है। Read more » बुद्ध पूर्णिमा
लेख साहित्य आदि पत्रकार देवर्षि नारद May 11, 2017 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment 12 मई पर विशेष:- मृत्युंजय दीक्षित सृष्टिकर्ता प्रजापति ब्रहमा के मापस पुत्र पारद। महान तपस्वी तेजस्वी सम्पूर्ण वेदान्त शास़्त्र के ज्ञाता तथा समस्त विद्वाओं में पारंगत नारद। ब्रहमतेज से संपन्न हैं। नारद जी क महान कृतित्व व व्यक्तित्व पर जितनी भी उपमाएं लिखी जायें बेहद कम हैं। देवर्षि नारद ने अपने धर्मबल से परमात्मा का […] Read more » Featured आदि पत्रकार देवर्षि नारद देवर्षि नारद
लेख साहित्य 1857 की क्रान्ति का नायक धनसिंह गुर्जर कोतवाल May 10, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment कोतवाल धनसिंह ने इन आजादी के दीवानों की सेना का रामराम करके स्वागत किया और उनसे पूछा कि क्या चाहते हो? उसने अपनी ओर से लोगों से कहा कि-'मारो फिरंगी को और देश को आजाद कराओ।' हनुमान की जय बोलकर इन सिरफिरे देशभक्तों की सेना कोतवाल धनसिंह के घोड़े के पीछे-2 चल दी, वह पुलिस जो इनके विशाल दल को रोकने के लिए तैनात थी, वह भी अपने कोतवाल के पीछे पीछे चल पड़ी। इन्होंने पहला धावा मेरठ की नई जेल पर बोल दिया। इन्होंने जेल से 839 कैदियों को मुक्त कराया और वे भी मुक्त होकर स्वतंत्रता सेनानियों के इस दल के साथ मिल गए और अंग्रेेजों की मेरठ जेल तोड़ दी । वहां से यह भीड़ मेरठ शहर और सिविल लाइन में घुस गई और अंग्रेज अधिकारियों के बंगलों को आग लगाना और उन्हें मारना शुरू कर दिया। Read more » 1857 की क्रान्ति का नायक Featured धनसिंह गुर्जर धनसिंह गुर्जर कोतवाल
लेख साहित्य माहिष्मती के समृद्ध इतिहास को कौन नहीं बूझना चाहता May 8, 2017 by अलकनंदा सिंह | Leave a Comment उस समय मुस्लिम थे ही कहां? और जब मुस्लिम थे ही नहीं तो फिल्म में मुस्लिम किरदार कैसे घुसाया जाता? घुसा भी दिया जाता तो शायद वामपंथी इस बात पर सिर पीटते कि मुस्लिमों को बदनाम करने के लिए इतिहास से छेड़छाड़ की गई है क्योंकि मुस्लिम शासकों का किरदार प्रशंसा के योग्य सिर्फ अपवाद स्वरूप ही मिलता है। Read more » Featured माहिष्मती माहिष्मती के समृद्ध इतिहास
दोहे साहित्य प्राण की आहुति कोई देता ! May 8, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment प्राण की आहुति कोई देता, समझ बलिदान कहाँ कोई पाता; ताक में कोई है रहा होता, बचा कोई कहाँ उसे पाता ! रही जोखिम में ज़िन्दगी रहती, सुरक्षा राह हर कहाँ होती; तभी तो ड्यूटी है लगी होती, परीक्षा हर घड़ी वहाँ होती ! चौकसी करनी सभी को होती, चूक थोड़ी भी नहीं है चलती; […] Read more » प्राण की आहुति कोई देता !
गजल साहित्य मेरे लफ़्ज तुझसे यकीं माँगें May 8, 2017 by शालिनी तिवारी | Leave a Comment शालिनी तिवारी झुरमुट में दिखती परछाइयाँ घुँघुरू की मद्दिम आवाज लम्बे अर्से का अन्तराल तुझसे मिलने का इन्तजार चाँद की रोशन रातों में पल हरपल थमता जाए ऐसा लगता है मानो तुम मुझसे आलिंगन कर लोगी पर कुछ छण में परछाइयाँ नयनों से ओझल हो जायें दिन की घड़ी घड़ी में बस बस तेरी ही […] Read more » मेरे लफ़्ज तुझसे यकीं माँगें
व्यंग्य चूहा साहित्य में नया अध्याय May 7, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment आजकल शायद ही कोई बच्चा हो, जो टी.वी. पर चालाक चूहे और खूंखार बिल्ले वाली ‘टॉम और जैरी’ की कार्टून कथा न देखता हो। वैसे समय काटने के लिए कई बूढ़े भी इसे देखते हैं। ये कार्टून कथा तो विदेशी है; पर इससे हजारों साल पूर्व पंचतंत्र और अन्य भारतीय कथा साहित्य में चूहों की […] Read more » Featured चूहा साहित्य
व्यंग्य साहित्य साडी रसोई १०/- और सादी रसोई ५/- में ……. May 7, 2017 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment पंजाब दे कैप्टन उर्फ़ महाराजा साहेब अर्थात सदर ऐ रियासत ने पंजाब के गरीबों को भरपेट भोजन देने का वायदा किया था और वह भी महज़ ५ रुप्प्या में ….. जब सदर ने रियासत की जेब टटोली तो राजकुमार की जेब की मानिंद ‘फटी ‘ हुई निकली …… एक जद्दी एडवाइज़र को बुलाया …. हल […] Read more » Featured साडी रसोई १०/ सादी रसोई ५/
व्यंग्य साहित्य अब चुहे बने शराबी : वाह रे बिहार पुलिस May 6, 2017 by सज्जाद हैदर | Leave a Comment इन चूहों ने रात के घोर अंधेरे का फायदा उठाया, योजना बनाई तथा बड़ी चतुराई पूर्वक सभी बिन्दुओं पर गंभीरता पूर्वक विचार किया तथा योजना बद्ध तरीके से इस बड़े कार्य को सफलता पूर्वक अंजाम दिया। क्योंकि यह मामला पुलिस विभाग से संबंधित था, अत: इस संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए बड़ी चतुराई के साथ रात के घोर अंधेरे का फायदा उठाते हुए थानों के पिछले द्वार से प्रवेश किया क्योंकि थाने के मुख्य द्वार पर एक पुलिस वाला पहरा दे रहा था, जो संगीन के साथ पूरी मजबूती से खड़ा हुआ था, इसी कारण चूहों ने पिछले द्वार से प्रवेश की योजना बनाई, जिसके सहारे शराब के भंडार गृह तक योजना बद्ध तरीके से पहुंच गए। Read more » Featured चुहे बने शराबी बिहार पुलिस
व्यंग्य साहित्य तुच्छता से स्वच्छ्ता की और May 6, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment स्वच्छ भारत अभियान के सर्वे में सबसे स्वच्छ शहरो में इंदौर पहले और भोपाल दूसरे नंबर पर आया है, ये दोनों शहर बीजेपी शासित राज्य मध्यप्रदेश में आते है, वैसे 2014 में सरकार बनने के बाद बीजेपी नेताओ ने अपने बयानों से जैसी गंदगी फैलाई है उसे देखते हुए ये काफी अप्रत्याशित लगता है। यह […] Read more » स्वच्छ भारत अभियान