लेख विज्ञान साहित्य विश्वविख्यात वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को भारत के वास्तु वैज्ञानिक राजकुमार झांझरी की चुनौती February 6, 2017 / February 6, 2017 by राजकुमार झांझरी | Leave a Comment विश्वविख्यात वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को भारत के वास्तु वैज्ञानिक राजकुमार झांझरी की चुनौती ‘दी गार्डियन’ में “This is the most dangerous time for our planet” शीर्षक से प्रकाशित लेख के संदर्भ में स्टीफन हॉकिंग को भेजे पत्र का हिंदी अनुवाद ‘दी गार्डियन’ में “This is the most dangerous time for our planet” शीर्षक से प्रकाशित […] Read more » “This is the most dangerous time for our planet” “This is the most dangerous time for our planet” शीर्षक से प्रकाशित लेख Featured stephen hawkins The Guardian दी गार्डियन स्टीफन हॉकिंग स्टीफन हॉकिंग को भेजे पत्र का हिंदी अनुवाद
व्यंग्य विवाद की आग जलती रहे, फिल्म वालों की तिजोरी भरती रहे…!! February 4, 2017 / February 4, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा अब स्वर्ग सिधार चुके एक ऐसे जनप्रतिनिधि को मैं जानता हूं जो युवावस्था में किसी तरह जनता द्वारा चुन लिए गए तो मृत्यु पर्यंत अपने पद पर कायम रहे। इसकी वजह उनकी लोकप्रियता व जनसमर्थन नहीं बल्कि एक अभूतपूर्व तिकड़म थी। जिसमें उनके परिवार के कुछ सदस्य शामिल हेोते थे। दरअसल […] Read more » फिल्म वालों की तिजोरी विवाद की आग जलती रहे
कविता साहित्य हे खाली बोतल बता February 2, 2017 / February 2, 2017 by सिया अर्पण राम | Leave a Comment सिया अर्पण राम हे खाली बोतल बता तुझे तो होगा पता क्या था तेरे अंदर ऐसा जिसे पहली बार पीकर ही हो गए वे बावले और छोड़ दिया सब घर-बार दूसरो के हवाले हे खाली बोतल बता तुझे तो होगा पता ऐसी क्या थी वह तरल जवाब तो होगा सरल हे खाली बोतल बता तुझे […] Read more » सिया अर्पण राम
कविता साहित्य वाल बहु व्यस्त जगत विच रहता ! January 30, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment वाल बहु व्यस्त जगत विच रहता, निरीक्षण करना बहुत कुछ होता; जाना पहचाना पुरातन होता, परीक्षण करना पुन: पर होता ! समय से बदलता विश्व रहता, द्रष्टा भी वैसा ही कहाँ रहता; द्रष्टि हर जन्म ही नई होती, कर्म गति अलहदा सदा रहती ! बदल परिप्रेक्ष्य पात्र पट जाते, रिश्ते नाते भी हैं सब उलट […] Read more » वाल बहु व्यस्त जगत विच रहता !
आलोचना राजनीति विचार और व्यवहार के बीच झूलती भारतीय राजनीति January 29, 2017 by विजय कुमार | 1 Comment on विचार और व्यवहार के बीच झूलती भारतीय राजनीति भारतीय राजनीति और राजनेता अजीब असमंजस में हैं। विचार पर दृढ़ रहें या व्यावहारिक बनें। पांच राज्यों के चुनाव के बीच यह यक्षप्रश्न एक बार फिर सिर उठाकर खड़ा हो गया है। आजादी से पहले भारत में कांग्रेस ही एकमेव दल था। उसका मुख्य लक्ष्य आजादी प्राप्त करना था। इसलिए विभिन्न विचारों वाले नेता वहां […] Read more » dynasty politics in political parties dynasty principle in political parties Featured pariwarwad in BJP परिवारवाद भा.ज.पा. में परिवारवाद भारतीय राजनीति राजनेता विचार और व्यवहार
कविता साहित्य ढ़ूँढ़ने में लगाया हर कोई ! January 29, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment ढ़ूँढ़ने में लगाया हर कोई, बना ऋषि घुमाया है हर कोई; ख़ुद छिपा झाँकता हृदय हर ही, कराता खोज स्वयं अपनी ही ! पूर्ण है पूर्ण से प्रकट होता, चूर्ण में भी तो पूर्ण ही होता; घूर्ण भी पूर्ण में मिला देता, रहस्य सृष्टि का समझ आता ! कभी मन द्रष्टि की सतह खोता, कभी […] Read more » ढ़ूँढ़ने में लगाया हर कोई !
कविता साहित्य प्रेरणा January 28, 2017 / January 28, 2017 by अजय कुमार | Leave a Comment बस्ती – बस्ती गली – गली फैली एक निराशा | कल कल करती बहती नदियां फिर भी मैं हूं प्यासा || जीवन के दुख द्वन्द लिए पागल पथिक सा चलता जाऊं | एक क्षण में रोता हूं दूजे क्षण मैं गाता जाऊं || समझ चुका था जीवन का हर नियम और वो कायदा | तपकर […] Read more »
लेख साहित्य हाथीयुद्ध मनोरंजन का लोकप्रिय साधन तथा आगरा के हाथीघाट का इतिहास January 26, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा- राधेश्याम द्विवेदी हाथियों का व्ंशानुगत इतिहास :- हाथी जमीन पर रहने वाला विशाल आकार का स्तनपायी प्राणी है। आज के समय में हाथी परिवार कुल में केवल दो प्रजातियाँ जीवित हैं। एलिफस तथा लॉक्सोडॉण्टा। तीसरी प्रजाति मैमथ विलुप्त हो चुकी है। जीवित दो प्रजातियों की तीन जातियाँ पहचानी जाती हैं। लॉक्सोडॉण्टा प्रजाति की दो […] Read more » आगरा के हाथीघाट आगरा के हाथीघाट का इतिहास हाथीघाट हाथीयुद्ध हाथीयुद्ध मनोरंजन का लोकप्रिय साधन
कविता साहित्य गीत सुनाने निकली हूँ January 26, 2017 by शालिनी तिवारी | Leave a Comment भारत माँ की बेटी हूँ और गीत सुनाने निकली हूँ, वीरों की गाथा को जन जन तक पहुँचाने निकली हूँ, भारत माँ के शान के खातिर सरहद पर तुम ड़टे रहे, सर्दी गर्मी बरसातों में भी तुम अड़िग वीर बन खड़े रहे, कोई माँ कहती है कि मेरा लाल गया है सीमा पर, दुश्मन को […] Read more » गीत सुनाने निकली हूँ
लेख साहित्य अजब गजब रिवाज थे राज रजवारे के January 26, 2017 by अनिल अनूप | 3 Comments on अजब गजब रिवाज थे राज रजवारे के अनिल अनूप पटियाला (पंजाब) में पुरानी रियासत के महल आज भी महाराजा भुपिंदर सिंह की 365 रानियों के किस्से बयान करते हैं। महाराजा भुपिंदर सिंह ने यहां वर्ष 1900 से वर्ष 1938 तक राज किया। महाराज भुपिंद्र सिंह का जीवन रंगीनियों से भरा हुआ था। इतिहासकारों के मुताबिक महाराजा की 10 अधिकृत रानियों के समेत […] Read more » महाराजा भुपिंदर सिंह
व्यंग्य साहब, आदमी अभी ओर कितना नीचे गिरेगा ? January 26, 2017 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment डॉ. मयंक चतुर्वेदी रामभुलावन आज सुबह बहुत गुस्से में आया था । गणतंत्र दिवस था, मैंने दरवाजा खोला तो उम्मीद नहीं थी अंदर आए वगैर ही रामभुलावन इस तरह से मन में दबी हुई अपनी किसी बात पर प्रतिक्रिया देगा । मैंने कहा… रामभुलावन आज खुशी का मौका है …देश को आज ही के दिन […] Read more » आदमी अभी ओर कितना नीचे गिरेगा
कविता साहित्य संस्कार सुर में फुरक कर ! January 24, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment संस्कार सुर में फुरक कर, ‘सो-हं’ की गंगा लुढ़क कर; ‘हं’ तिरोहित ‘सो’ में हुआ, ‘सो’ समाहित ‘हं’ में हुआ ! वह विराजित विभु में हुआ, अपना पराया ना रहा; अपनत्व पा महतत्व का, था सगुण गुण ले मन रहा ! शाश्वत खिला पा द्युति दिशा, मन महल वत चमका किया; रहना था बस उसका […] Read more »