कविता साहित्य आओ खेलें वैदिक होली March 8, 2017 by विमलेश बंसल 'आर्या' | Leave a Comment विमलेश बंसल ‘आर्या’ होली को पावन त्यौहार आज कछु ऐसे मनाऊँगी। लगाकर सबके चंदन माथे, सौम्य हो जाऊंगी। बड़ों को करके ॐ नमस्ते, छोटों को हृदय लगाऊंगी। नवान्न आटे की गुजिया बना, प्रसाद बनाऊंगी। वृहद यज्ञ सामूहिक कर के नौत खिलाऊंगी। उंच नीच का भेद भुलाकर, प्रीति निभाऊंगी उत्तम पेय पिला ठंडाई, फाग गवाऊँगी। पूरे […] Read more »
व्यंग्य यह मैने नहीं मेरी कलम ने लिखा …!! March 6, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | 2 Comments on यह मैने नहीं मेरी कलम ने लिखा …!! तारकेश कुमार ओझा मैं एक बेचारे ऐसे अभागे जो जानता हूं जिसे गरीबी व भूखमरी के चलते उसके बड़े भाई ने पास के शहर में रहने वाले रिश्तेदार के यहां भेज दिया। जिससे वह मेहनत – मजदूरी कर अपना पेट पाल सके। बेचारा जितने दिनों तक उसे काम ढूंढने में लगे, उतने दिन मेजबान की […] Read more »
पुस्तक समीक्षा साहित्य “शतपथ ब्राह्मण का महत्वपूर्ण लघु परिचयात्मक ग्रन्थ शतपथ सुभाषित” March 6, 2017 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on “शतपथ ब्राह्मण का महत्वपूर्ण लघु परिचयात्मक ग्रन्थ शतपथ सुभाषित” मनमोहन कुमार आर्य शतपथ ब्राह्मण पर स्मृति-शेष प्रतिष्ठित आर्य विद्वान पं. वेदपाल जी ने ‘शतपथ सुभाषित’ नाम से एक लघु पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक का प्रकाशन सन् 1998 में हुआ। डा. भवानीलाल भारतीय जी ने इस ग्रन्थ पर अपनी सम्मति दी है जिसे हम प्रस्तुत कर रहे हैं। वह लिखते हैं कि शतपथ […] Read more » shatpath subhashit शतपथ ब्राह्मण
कहानी साहित्य खुंखार कुत्ता भीगी बिल्ली बना March 5, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी एक बादशाह अपने खुंखार कुत्ते के साथ नाव में बैठकर यात्रा कर रहा था। उस नाव में अन्य यात्रियों के साथ एक दार्शनिक भी था। उस कुत्ते ने कभी नौका में सफर नहीं किया था, इसलिए वह अपने को सहज महसूस नहीं कर पा रहा था। वह उछल-कूद कर रहा था और […] Read more » खुंखार कुत्ता भीगी बिल्ली
कहानी साहित्य अजनबीपन और मासूमियत March 5, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 4 Comments on अजनबीपन और मासूमियत डा. राधे श्याम द्विवेदी एक पाँच साल का मासूम सा बच्चा अपनी छोटी बहन को लेकर एक मंदिर में एक तरफ कोने में बैठा हाथ जोडकर भगवान से न जाने क्या मांग रहा था । उसके कपड़े में मैले से लग रहे थे मगर वह साफ जैसा दिख रहा था। उसके नन्हें- नन्हें से गाल […] Read more » अजनबीपन मासूमियत
व्यंग्य निज़ाम-ए मुस्तफा March 5, 2017 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment बापू की एक और इच्छा थी ,,,,वे कहते थे जब मेरा काम यहाँ पूरा हो जायेगा मैं पाक चला जाऊंगा। बापू की अधूरी इच्छा को पूरा करना अब गाँधी भक्त कांग्रेसियो और अफ़ज़ल गैंग के आज़ादी परस्त छात्रों और उनको उकसाने वाले बुद्धिजीवी अवार्डवापसी गैंग का है पाक जाएं और अपने आकाओं की बिरियानी का हक़ अदा करें और निज़ाम-ए मुस्तफा कायम करने में अपना योगदान दें !!!! Read more » Featured निज़ाम-ए मुस्तफा
व्यंग्य साहित्य मिलावट का व्याकरण March 4, 2017 by वीरेन्द्र परमार | Leave a Comment देश के प्रतिष्ठित नक्कालों, कालाबाजारियों और मिलावट विशेषज्ञों को इसका सदस्य बनाया जाएगा I ये सदस्य विभिन्न वस्तुओं की नक़ल बनाने एवं मिलावट की आधुनिक प्रविधि के संबंध में बहुमूल्य सुझाव देंगे I हमारा शोध संस्थान डुप्लीकेट चैनल नामक एक टी वी चैनल आरम्भ करेगा जिसके माध्यम से अलंकृत शैली और काव्यमय – अनुप्रासयुक्त शब्दावली में विज्ञापनबालाओं द्वारा उत्पादों का विज्ञापन किया जाएगा I Read more » मिलावट मिलावट का व्याकरण
लेख शख्सियत साहित्य देह के बाद अनुपम March 4, 2017 by अरुण तिवारी | 2 Comments on देह के बाद अनुपम अरुण तिवारी जब देह थी, तब अनुपम नहीं; अब देह नहीं, पर अनुपम हैं। आप इसे मेरा निकटदृष्टि दोष कहें या दूरदृष्टि दोष; जब तक अनुपम जी की देह थी, तब तक मैं उनमें अन्य कुछ अनुपम न देख सका, सिवाय नये मुहावरे गढ़ने वाली उनकी शब्दावली, गूढ से गूढ़ विषय को कहानी की तरह […] Read more » Anupam Mishra death of Anupam Mishra Featured अनुपम मिश्र परंपरागत वर्षा जल-संरक्षण
व्यंग्य जनजागरण की लीला March 4, 2017 / March 4, 2017 by दीपक शर्मा 'आज़ाद' | Leave a Comment देखा जाये तो जनजागरण शब्द राष्ट्रवादी है क्योंकि अभी तक किसी अन्य ने इस पर अपना अधिकार नहीं जताया है। ऐसा मैं इसलिये कह रहा हूं क्योंकि हमारी दो बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों की आपसी लड़ाई का केंद्र ही गांधी और पटेल पर अपने अपने आधिपत्य को लेकर रहा है। मैं तो कहूंगा न केवल यह […] Read more » जनजागरण
व्यंग्य गाजर मूली के साथ धनिया मिर्ची फ्री March 3, 2017 by जगमोहन ठाकन | Leave a Comment गली में कई दिनों बाद नत्थू सब्जी वाले की आवाज़ सुनाई दी । देखा तो सामने नत्थू ही अपनी गधा-रेहड़ी पर सब्जी लादे आवाज़ लगा रहा है । मैंने पूछा – अरे नत्थू ! सब कुशल तो है ? कहीं चले गए थे क्या ? नहीं साहब , हम कहाँ जा सकते हैं । बस […] Read more » गाजर मूली के साथ धनिया मिर्ची फ्री
कला-संस्कृति लेख साहित्य होली के रंगों का आध्यात्मिक महत्व March 2, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment श्वेत रंग की कमी होती है, तो अशांति बढ़ती है, लाल रंग की कमी होने पर आलस्य और जड़ता पनपती है। पीले रंग की कमी होने पर ज्ञानतंतु निष्क्रिय बन जाते हैं। ज्योतिकेंद्र पर श्वेत रंग, दर्शन-केंद्र पर लाल रंग और ज्ञान-केंद्र पर पीले रंग का ध्यान करने से क्रमशः शांति, सक्रियता और ज्ञानतंतु की सक्रियता उपलब्ध होती है। होली के ध्यान में शरीर के विभिन्न अंगों पर विभिन्न रंगों का ध्यान कराया जाता है और इस तरह रंगों के ध्यान में गहराई से उतरकर हम विभिन्न रंगों से रंगे हुए लगने लगा। Read more » होली
लेख स्मारकों के सुरक्षा में हम कितने सफल February 28, 2017 / February 28, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा.राधेश्याम द्विवेदी स्मारक किसे कहते हैं:- कोई वस्तु या रचना जो किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति या घटना की स्मृति को बनाए रखने के लिए हो, स्मारक कहलाता है, जैसे- शहीद स्मारक, मकबरा, समाधि, स्तूप और निशानीय स्मृति चिह्न आदि। राष्ट्रीय स्मारक एक एसा स्मारक होता है जिसे उस देश के इतिहास, राजनीति या उसके लोगों के […] Read more » स्मारकों के सुरक्षा