व्यंग्य आखिर अहिंसा के पुजारी का घर अशांत क्यों? October 1, 2016 / October 1, 2016 by प्रवीण कुमार | Leave a Comment अजीब विडम्बना है कि कल तक हमें कालापानी और फाँसी की सजा सुनाने वाले गोरे अब हमारे दोस्त बन गये और जो साथ लड़े वो दुश्मन। इसलिए अब सडकों और दीवारों की गन्दगी साफ करने के साथ-साथ हमें अपने दिलों की गन्दगी भी साफ करनी पड़ेगी तथा पुनर्चिंतन करना पड़ेगा। गाँधी के गुजरात से आने वाले प्रधानमंत्री जी को "गाँधी के मन्तर" को अपने मन की बात बनानी पड़ेगी। Read more » आखिर अहिंसा के पुजारी का घर अशांत क्यों?
लेख साहित्य 2 अक्टूबर : अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस October 1, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment यदि किसी 'विशुद्ध मानव' जो सब नैसर्गिक मानवीय गुणों से परिपूर्ण हो, इसकी मूर्त कल्पना करनी हो तो 'राम', 'कृष्ण', 'बुद्ध' के अवतार के बाद गाँधीजी का व्यक्तित्व उभरकर आता है। गाँधीजी से बढ़कर मानव पूजक दिखलाई देना आसान नहीं है। Read more » 2 अक्टूबर Featured अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस
आलोचना साहित्य काश! सुप्रीमो, सुप्रीम को अहमियत देते! September 30, 2016 / September 30, 2016 by शिव शरण त्रिपाठी | Leave a Comment सोमवार को जब उन गायत्री प्रसाद प्रजापति ने पुन: मंत्री पद की शपथ ली जिन्हे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते अपने मत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था तो लोगो के मुंह से बरबस निकल पड़ा कि काश! सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव ने सुप्रीम मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पूर्व के निर्णय का सम्मान किया होता। Read more »
व्यंग्य साहित्य मच्छर से कुछ सीखो भाई ………… September 30, 2016 / September 30, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment मनुष्य भले ही स्वयं को संसार के प्राणियों में सबसे अधिक बुद्धिमान समझे, पर मैं इससे सहमत नहीं हूं। इन दिनों सब तरफ बाबा रामदेव और उनके योगासनों की धूम है; पर एक बार जरा आसनों के नाम पर तो नजर डालें। मयूरासन, श्वानासन, कुक्कुटासन, सिंहासन, गोमुखासन, मत्स्यासन, भुजंगासन, मकरासन, उष्ट्रासन... आदि। नाम गिनाना शुरू करें, तो सूची समाप्त नहीं होगी। Read more » Featured sattirical article on dengue मच्छर
व्यंग्य साहित्य आज़ादी की तान पर नाचे बलूचिस्तान September 27, 2016 / September 27, 2016 by अमित शर्मा (CA) | 1 Comment on आज़ादी की तान पर नाचे बलूचिस्तान भारत के रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान को नरक कहाँ था , मतलब बलूचिस्तान नर्क से आज़ादी चाहता है लेकिन बलूची लोगो को समझना होगा की नरक से आज़ादी मिलने में समय लगता है , हमें भी यूपीए के शासनकाल से 10 साल के बाद ही मुक्ति मिली थी। Read more » Featured sattirical article on baluchistan बलूचिस्तान
कविता साहित्य फल की इच्छा September 27, 2016 by बीनू भटनागर | Leave a Comment कर्म का उद्देश्य ही फल है, तो फल की इच्छा होना तो ज़रूरी है। थोड़ी व्याकुलता भी होगी ही, Read more » Featured फल की इच्छा
कहानी साहित्य कैलाश September 26, 2016 by राजू सुथार | Leave a Comment आह ! क्या दिन है थोड़ी – थोड़ी ठंड पड़नी शुरू हो गई थी साथी संग कैलाश ठंड से ठिठक रहे थे । कैलाश अभी 10 साल का है और 7वीं कक्षा में पढ़ रहा है, इनकी दो बहने है और दो भाई है, कैलाश परिवार में सबसे छोटा है इस कारण माँ का लाड़ला […] Read more » Featured कैलाश
व्यंग्य साहित्य वाकई ! इस चमत्कार को नमस्कार है !! September 26, 2016 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा क्या आप इस बात की कल्पना कर सकते हैं कि कोई बिल्कुल आम शहरी युवक बमुश्किल चंद दिनों के भीतर इतनी ऊंची हैसियत हासिल कर लें कि वह उसी माहौल में लौटने में बेचारगी की हद तक असहायता महसूस करे, जहां से उसने सफलता की उड़ान भरी थी। मैं बात कर रहा […] Read more » Featured
कहानी साहित्य मेन इन यूनिफ़ॉर्म September 24, 2016 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment धाँय ….धाँय ….धाँय ….. तीन गोलियां मुझे लगी ,ठीक पेट के ऊपर और मैं एक झटके से गिरा….गोली के झटके ने और जमीन की ऊंची -नीची जगह के घेरो ने मुझे तेजी से वहां पहुचाया , जिसे NO MAN’S LAND कहते है … मैं दर्द के मारे कराह उठा.. पेट पर हाथ रखा तो देखा […] Read more » Featured मेन इन यूनिफ़ॉर्म
कविता साहित्य तलाश पूरी हुई September 22, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment राजेश बाबू देहरादून में रहते हैं। उनकी बेटी सुमन एम.ए. के अंतिम वर्ष में थी। हर पिता की तरह वे भी उसके विवाह के लिए चिंतित थे। उनकी इच्छा थी कि परीक्षा के बाद इस सर्दियों में उसके हाथ पीले कर दिये जाएं। उन्होंने अपने मित्रों और सम्बन्धियों को यह कह रखा था कि उनकी […] Read more » Featured तलाश पूरी हुई
व्यंग्य साहित्य विश्व शांतिदूत कबूतर की रिहाई September 21, 2016 by एम्.एम्.चंद्रा | Leave a Comment एम एम चन्द्रा कबूतर-1 हर साल होने शांति दिवस को लेकर शांति दूत कबूतरों की समस्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है कोई भी हमारी सुनने वाला नहीं है. सबके सब कबूतरबाजी में लगे है और पतंगबाजी में यकीन करने लगे .जब यह दुनिया शांतिदूत कबूतरों की नहीं हो सकती तो हमें शांतिदूत होने […] Read more » कबूतर की रिहाई विश्व शांतिदूत
राजनीति व्यंग्य ऑपरेशन झाड़ूमार September 18, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment जीभ की लम्बाई, चौड़ाई या मोटाई के बारे में तो हमने अधिक बातें नहीं सुनीं, पर उसकी चंचलता के किस्से जरूर प्रसिद्ध हैं। कहते हैं एक बार दांतों ने हंसी-मजाक में जीभ को काट लिया। जीभ ने कुछ गुस्सा दिखाया; पर वह ठहरी कोमल और अकेली, जबकि दांत थे कठोर और पूरे बत्तीस। उसके गुस्से […] Read more » Featured ऑपरेशन झाड़ूमार