व्यंग्य साहित्य मूर्ख परंपरा और समर्पित मूर्ख February 28, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment मैं बचपन से मूर्ख रहा हूँ पर कभी इस पर गर्व नहीं किया, करता भी क्यों आखिर, गर्व मनुष्य द्वारा स्वअर्जित चीज़ों पर किया जाना चाहिए, प्रकृतिप्रदत्त वस्तुओ पर कैसा गुमान, वो तो आपके पूर्व जन्म में किये गए कर्मो का ही फल होता है, जो कभी बासी नहीं होता है। प्रकृति के इस “फल” […] Read more » मूर्ख परंपरा समर्पित मूर्ख
कला-संस्कृति लेख जहां कण-कण में बिखरी है ऋषि वाल्मिकी की स्मृतियां…!! February 27, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा — सीता ने व्यतीत किया था अज्ञातवास — लव-कुश का हुआ था जन्म आधुनिकता के उच्चतम शिखर पर जहां आज भी मानव जीवन के चिह्न नदारद हो वहां सदियों पहले मानवीय दिनचर्या की उपस्थिति किसी को भी देवत्व प्रदान करने के लिए पर्याप्त है, क्योंकि अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में सामान्य जीवन यापन […] Read more » Featured ऋषि वाल्मिकी पश्चिम मेदिनीपुर जिला अंतर्गत नयाग्राम के तपोवन
कविता सत्य पथ का मुसाफिर February 25, 2017 by कुमार विमल | 1 Comment on सत्य पथ का मुसाफिर कुमार विमल कोई पथ जाती है धन को, कोई सुख साधन को, और कोई प्रेमिका के मधुर चितवन को। पर छोड़ ये सारे सुलभ पथ को तूने चुना है सत्य को नमन है तेरे त्याग और तप को। पग-पग है संग्राम जिस पथ का, मापदंड साहस जिस पथ का , इंतिहान तप,तेज और बल […] Read more » Featured सत्य पथ का मुसाफिर
व्यंग्य साहित्य मैं जब भ्रष्ट हुआ February 24, 2017 / February 24, 2017 by वीरेन्द्र परमार | Leave a Comment वीरेन्द्र परमार मेरी नियुक्ति जब एक कमाऊ विभाग में हुई तो परिवार के लोगों और सगे – संबंधियों को आशा थी कि मैं शीघ्रातिशीघ्र भ्रष्ट बनकर राष्ट्र की मुख्यधारा में जुड़ जाऊंगा लेकिन आशा के विपरीत जब मैं एक दशक तक भ्रष्ट नहीं हुआ तो सभी ने एक स्वर से मुझे कुल कलंक घोषित कर […] Read more » Featured भ्रष्ट भ्रष्ट होना एक राष्ट्रीय उत्सव भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार मुक्त समाज
व्यंग्य खट्ठा-मीठा : भाभी से होलियाना छेड़छाड़ February 23, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment ऐसे दीवाने देवरों को देखकर भाभी डर गयीं। भैया से शिकायत करने की धमकी दी। इस पर देवर और भी अधिक हो-हल्ला करने लगे। ‘भाभी, हम भैया से नहीं डरते। अगर भैया डाँटेंगे, तो उनको भी गुलाल लगा देंगे। पर हम भाभी से होली जरूर खेलेंगे।’ भाभी जानती थी कि ससुर जी से भी शिकायत करने का कोई लाभ नहीं होगा। वे तो ज्यादा से ज्यादा यही कहेंगे कि ‘लड़के हैं, लड़कों से गलतियाँ हो जाती हैं।’ Read more » भाभी भाभी से होलियाना छेड़छाड़ होलियाना छेड़छाड़
व्यंग्य साहित्य आईपीएल, मनोरंजन और भारतीय दर्शन February 22, 2017 / February 22, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment आईपीएल की बोली लग चुकी है, खिलाडी बिक चुके है, बस अब खेल का बिकना बाकी है। मज़मा लग चुका हैै, खिलाडी मुजरा करने को तैयार है। बाज़ारीकरण के इस दौर में “आई-पिल” और “आईपीएल” दोनों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है क्योंकि दोनों ही कम समय में “सुरक्षित” मनोरंजन सुनिश्चित करते है। विकासशील […] Read more » Featured आईपीएल भारतीय दर्शन मनोरंजन
व्यंग्य “लांच” होने से ज़्यादा रूचि “लंच” करने में February 18, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment इसरो ने अंतरिक्ष में 104 उपग्रह एक साथ छोड़कर उन्हें सफलतापूर्वक अपनी कक्षा में स्थापित कर दिया है,ये पूरे देश के लिए तो गर्व की बात है ही लेकिन मेरे लिए यह गर्व के साथ -साथ प्रेरणास्पद बात भी है क्योंकि बचपन में अपने मम्मी-पापा के कई असफल प्रयासों के बाद भी मैं अपनी स्कूल […] Read more »
व्यंग्य नये इसरो की तलाश February 18, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment इन दिनों हर कोई ‘इसरो’ के गुण गा रहा है। सचमुच उसने काम ही ऐसा किया है। दुनिया में आज तक कोई देश एक साथ 104 उपग्रह सफलतापूर्वक प्रक्षेपित नहीं कर सका है। जो लोग वैज्ञानिक सफलता के नाम पर सुबह उठते ही अमरीका और रात में सोने से पहले रूस की माला जपते हैं, […] Read more » नये इसरो की तलाश
व्यंग्य साहित्य नेता जी के साथ एक दिन February 15, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment ये चुनाव के दिन हैं। जिसे देखो अपनी प्रशंसा और दूसरे की बुराई करने में दिन-रात एक कर रहा है। नेता लोग दूसरे की सबसे अधिक आलोचना जिस मुद्दे पर करते हैं, वह है भ्रष्टाचार। लेकिन चुनाव जीतते ही अधिकांश लोग उसी काम में लग जाते हैं, जिसकी आलोचना कर वे चुनाव जीतते हैं। कई […] Read more » Featured नेता जी के साथ एक दिन
कहानी साहित्य टिया और मैं February 13, 2017 by गंगानन्द झा | Leave a Comment एक मशहूर पौराणिक कथा से बात शुरु होती है। नारद मुनि को हाथ में तेल से लबालब भरा कटोरा लिए राजर्षि जनक के बाग का पूरा चक्कर लगाने को कहा गया था। शर्त थी कि तेल की एक भी बूँद छलकने नहीं पाए। मुनिवर ने सफलतापूर्वक चक्कर लगाया। अब उनसे बाग का वर्णन देने को […] Read more » टिया और मैं
व्यंग्य मफलर के मौसम में रेनकोट February 13, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment मफलर के मौसम में रेनकोट के चर्चे है। कपड़ो का उपयोग उनकी प्रवृति के हिसाब से अब किसी मौसम विशेष तक सीमित नहीं रह गया हैै वो अपनी सीमाए लांघकर हर मौसम में “सर्जिकल- स्ट्राइक” कर अपनी निर्भरता और उपयोगिता का लौहा मनवा रहे है। यह उल्लेखनीय है की ये लोहा , “लौहपुरुष” के मार्गदर्शक […] Read more » मफलर रेनकोट
पुस्तक समीक्षा साहित्य ‘उत्तर प्रदेश – विकास की प्रतीक्षा में’ पुस्तक समीक्षा February 13, 2017 / February 13, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment Bloomsbury प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में पिछले 15 सालों में सपा-बसपा द्वारा उत्तर प्रदेश में किये गए कु-शासन को विस्तार से व्यापक रिसर्च करके प्रस्तुत किया गया है. इस पुस्तक के लेखक है, शान्तनु गुप्ता, जिन्होंने लंदन से पॉलिसी और राजनीति की पढ़ाई की है। और लम्बे समय से भारत में डिवेलप्मेंट रीसर्च में […] Read more » Book by Shantanu Gupta book review by Shantanu Gupta Uttar Pradesh Vikas ki pratiksha mein उत्तर प्रदेश - विकास की प्रतीक्षा में