आलोचना अनाथ बच्चे बनाम केजरीवाल ! September 17, 2016 by हरिहर शर्मा | 1 Comment on अनाथ बच्चे बनाम केजरीवाल ! आज के दैनिक भास्कर में प्रकाशित दो आलेखों ने चेतना को झकझोर दिया ! श्री एन. रघुरामन के आलेख में झारखंड की राजधानी रांची से महज 20 कि.मी. दूर ब्राम्बे के एक स्कूल की कहानी है, जिसमें प्री नर्सरी से लेकर दसवीं क्लास तक के बच्चे पढ़ते है ! ये सभी बच्चे या तो अनाथ […] Read more » अनाथ बच्चे केजरीवाल
कविता साहित्य नारी का दर्द September 17, 2016 by चारु शिखा | Leave a Comment क्यों दर्द हैं उसकी बातों में हमेशा मुस्कुराती है जो , इतना अकेली क्यों हैं वो जो मर्यादित है , जो संयमित है, जो नाजुक है , जो शांत है , आखिर एक अबला है वह उसकी की देह तो सबको दिखती है। उसकी आंतरिक सुंदरता क्यों नहीं दिखती.. कहाँ सुरक्षित है वो घर -बाहर […] Read more » नारी का दर्द
राजनीति व्यंग्य साहित्य क्यों भई चाचा, हां भतीजा September 17, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on क्यों भई चाचा, हां भतीजा बचपन में स्कूल से भागकर एक फिल्म देखी थी ‘चाचा-भतीजा।’ उसमें एक गीत था, ‘‘बुरे काम का बुरा नतीजा, क्यों भई चाचा.., हां भतीजा।’’ फिल्म के साथ यह गाना भी उन दिनों खूब लोकप्रिय हुआ था। आजकल भी ये गाना उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में जूतों की ताल पर खूब बज रहा है। इस […] Read more » Akhilesh yadav Featured Shivpal Yadav चाचा भतीजा शिवपाल
व्यंग्य साहित्य पूंजी-राजनीति एकता जिंदाबाद September 17, 2016 by एम्.एम्.चंद्रा | Leave a Comment एम. एम. चन्द्रा पूरी दुनिया के बड़े व्यापारी, पूंजीपति और वित्तीय संस्थान जी -5, जी 8, जी-20 और शक्तिशाली देशों की मीटिंग चल रही थी. विकासशील देश बाहर धरना दे रहे थे. हमें भी इन संस्थाओं में शामिल किया जाये. इन संस्थाओं ने मिलजुलकर यह तय किया कि जब तक बाहर खड़े देशों को यह […] Read more » एकता पूंजी पूंजी-राजनीति एकता राजनीति
कविता साहित्य शहर मर भी रहा है September 16, 2016 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment हर शहर की सरहद के उस पार से कुछ ठंडी हवाएँ हर बार जरूर आती है अपने साथ सभ्यताओं का एक पुलिंदा भी साथ में गाहे-ब-गाहे जरूर ले आती हैं वही हवाएँ, शहरी हवाओं के साथ मिलकर एक रंग बना देती है रंग शहर के पुरातन के साथ भी अक्सर घुल-मिल जाया करता है जैसे […] Read more » शहर मर भी रहा है
आलोचना साहित्य आप के चाल, चरित्र और चिंतन पर संदेह के गहरे बादल September 16, 2016 by मृत्युंजय दीक्षित | 2 Comments on आप के चाल, चरित्र और चिंतन पर संदेह के गहरे बादल मृत्युंजय दीक्षित मात्र डेढ़ वर्ष में ही दिल्ली में शासन कर रही आम आदमी पार्टी का चाल, चरित्र और चिंतन अब देश की जनता के सामने जगजाहिर हो चुका है तथा लगातार हो रहा है ।वर्तमान समय में दिल्ली सरकार के महिला बाल विकास कल्याण मंत्री संदीप कुमार की सेक्स कांड वाली सीडी टी वी […] Read more » Featured आप आशुतोष चरित्र और चितन पर संदेह के गहरे बादल संजय सिंह संदीप कुमार
कहानी साहित्य सखी वे मुझसे कह कर जाते.. September 15, 2016 by आर. सिंह | Leave a Comment “सिद्धि हेतु स्वामी गए यह गौरव की बात पर चोरी चोरी गए यही बड़ा व्याघात. सखी वे मुझसे कह कर जाते”, —‘यशोधरा’ मैथिलीशरणगुप्त. ” भाई साहिब क्या आप जल्द से जल्द इस अस्पताल में पहुँच सकते हैं?” कोकिला. मैं तो अवाक रह गया.मेरे फोन पर यह सन्देश मेरी मुंह बोली बहन कोकिला का था,पर यह […] Read more » सखी वे मुझसे कह कर जाते..
व्यंग्य हिंदी दिवस या हिन्दी विमर्श September 15, 2016 by एम्.एम्.चंद्रा | Leave a Comment एम् एम्. चन्द्रा हिंदी दिवस पर बहस चल रही थी. एक वर्तमान समय के विख्यात लेखक और दूसरे हिंदी के अविख्यात लेखक. हम हिंदी दिवस क्यों मानते है? कोई दिवस या तो किसी के मरने पर मनाया जाता है या किसी उत्सव पर, तो ये हिंदी दिवस किस उपलक्ष में मनाया जा रहा है. अविख्यात […] Read more » हिंदी दिवस हिन्दी विमर्श
व्यंग्य साहित्य शाहबुद्दीन के नाम एक खत September 15, 2016 by संजय चाणक्य | Leave a Comment संजय चाणक्य ” लिखू कुछ आज यह वक़्त का तकाजा है ! मेरे दिल का दर्द अभी ताजा-ताजा है !! गिर पडते है मेरे आसू ,मेरे ही कागज पर ! लगता है कि कलम मे स्याही का दर्द ज्यादा है !!,, मै काफी उलझन में था सोचता हू खत की शुरूआत कहा से और कैसे […] Read more » Featured शाहबुद्दीन के नाम एक खत
कहानी साहित्य बेबसी के आंसू September 13, 2016 / September 14, 2016 by राजू सुथार | Leave a Comment अकाल तो दिख ही रहा था , और दूसरी ओर चुनाव कदमों में थे । मीरपुर गांव में इन दिनों विधायक के चुनाव होने वाले थे इस कारण हर जगह राजनीतिज्ञों का धूम धड़ाका हो रहा था । बरसात की ऋतु थी किन्तु इस बार अकाल ही दिख रहा था अर्थात अभी तक इन्द्र देव […] Read more » बेबसी के आंसू
लेख हिंदी दिवस उनकी नजर में शायद हिंदी शासितों की भाषा है,और अंग्रेजी शासकों की भाषा है। September 10, 2016 by श्रीराम तिवारी | Leave a Comment श्रीराम तिवारी वेशक दुनिया के अधिकांस प्राच्य भाषा विशारद ,व्याकरणवेत्ता ,अध्यात्म -दर्शन के अध्येता और भाषा रिसर्च- स्कालर समवेत स्वर में उत्तर वैदिक संस्कृत वांग्मय के ही मुरीद रहे हैं। जिसका वैचारिक चरमोत्कर्ष उस वेदांत दर्शन में झलकता है,जिसके प्रतिवाद स्वरूप अनेक ‘अवैदिक’ भारतीय दर्शनों का यहाँ निरंतर उदभव होता रहा है। जिसका भाषाई चरमोत्कर्ष […] Read more » Featured अंग्रेजी शासकों की भाषा हिंदी हिंदी शासितों की भाषा है
राजनीति व्यंग्य साहित्य खाट का खटराग September 9, 2016 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment राजनीति में नए नए प्रयोगों के आदी रहे राहुल गांधी ने खाट-चर्चा के जरिए कांग्रेस को ठेठ आम लोगों के बीच चर्चा में ला दिया है। खाट-चैपाल चर्चा में आनी ही थी, क्योंकि खाट का अपना एक शास्त्रीय राग भी होता है, जो शास्त्रीय संगीत में तो शामिल नहीं है, लेकिन लोक में लोकश्रुतियों की […] Read more » Featured खाट खाट का खटराग