राजनीति व्यंग्य साहित्य खाट सभा और टाट सभा September 8, 2016 / September 8, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment कल शाम शर्मा जी के घर गया, तो वे माथे पर हाथ रखे ऐसे बैठे थे, जैसे सगी सास मर गयी हो। हर बार तो मेरे आने पर वे हंसते हुए मेरा स्वागत करते थे, पर आज उनमें कोई हलचल ही नहीं थी। भाभी जी भी घर पर नहीं थी। इसलिए मैंने रसोई से एक […] Read more » Featured खाट सभा टाट सभा
आलोचना व्यभिचार का महिमामंडन September 8, 2016 by हरिहर शर्मा | Leave a Comment परंपरागत राजनीति से ऊबी हुई दिल्ली की जनता ने बड़ी आशा और विश्वास के साथ आम आदमी पार्टी को विजयश्री प्रदान की थी ! किन्तु एक के बाद एक दिल्ली सरकार के कुल छह मंत्रियों में से तीन को विभिन्न आरोपों के चलते हटाना पड़ा ! किन्तु सबसे ज्यादा चोंकाने वाली विदाई हुई है महिला […] Read more » AAP Featured Sandeep Kumar Sex CD व्यभिचार का महिमामंडन
राजनीति व्यंग्य साहित्य खटिया लूटेरी जनता September 8, 2016 / September 8, 2016 by अश्वनी कुमार, पटना | Leave a Comment जब लोकतंत्र जनता के लिए है, चुनाव जनता के लिए हैं, रैलियों का इंतजाम जनता के लिए है तो खटिया क्यूँ नहीं? उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से खटिया लूटने के शुरुआत बताती है की अब चुनाव के वक्त जनता को ठगने का जो टैलेंट नेताओं में पहले था वो अब जनता में आने लगी […] Read more » Featured khat sabha of Rahul Gandhi खटिया लूटेरी जनता
कविता तुम से प्यार कितना है September 7, 2016 / September 7, 2016 by मनीषा गुप्ता | Leave a Comment मनीषा गुप्ता क्या कहूँ की तुम से प्यार कितना है तेरी चाहत पर एतबार कितना है !! की साँसे भी अब तो कर देती है बगावत की तुम बिन चलना अब उनका भी मुहाल कितना है !! की तेरी आने की आहट से ही महक जाता है श्रृंगार मेरा देखो मेरे वज़ूद में बसता तेरा […] Read more » तुम से प्यार कितना है
व्यंग्य साहित्य इतने लोग हड़ताल नहीं इन्कलाब करते है September 5, 2016 by एम्.एम्.चंद्रा | Leave a Comment एम. एम.चन्द्रा भाई! गाड़ी की सर्विस करानी है सर! अभी तो 9 भी नहीं बजे और पुलिस को देखकर आपको क्या लगता है? क्या आज कोई काम हो पायेगा ? सर यदि आप अपनी गाड़ी को बचाना चाहते हो तो आज यहाँ से गाड़ी ले जाओ और किसी ओर दिन सर्विस करा लेना. भाई! ये पुलिस वाले हड़ताल […] Read more » इन्कलाब
कहानी साहित्य बाप जी की दुकान September 5, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on बाप जी की दुकान यों तो हर गांव और नगर में चौक होते हैं; पर लखनऊ के चौक की बात ही कुछ और है। यह केवल एक चौराहा नहीं, बल्कि 200 साल पुराना बाजार और घनी आबादी वाला क्षेत्र भी है। इसलिए इसे ‘पुराना शहर’ भी कहते हैं। लखनऊ के प्रसिद्ध चिकन की कढ़ाई वाले कपड़े यहां सबसे अच्छे […] Read more » बाप जी की दुकान
लेख साहित्य अक्तूबर मास के पर्व और महापुरुषों की जयन्तियां September 5, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य अक्तूबर, 2016 माह में अनेक पर्व व जयन्तियां पड़ रही हैं। जयंतियों में वीर हनुमान, महर्षि बाल्मीकि, ऋषि धनवन्तरी, गांधी जी और लाल बहादुर शास्त्री जी सम्मिलित हैं वहीं पर्वों में विजयादशमी, दीपावली, ऋषि दयानन्द बलिदान दिवस एवं गोवर्धन पूजा सम्मिलित हैं। इस अवसर पर हम कुछ चर्चा सभी जयन्तियों व पर्वों […] Read more » अक्तूबर मास के पर्व और महापुरुषों की जयन्तियां
कविता साहित्य मानसिक पतन September 5, 2016 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment उपहास और उलाहना समाज में साथ दौड़ते रहते हैं, जैसे कोई पतंगा भोजन की तलाश में भागता है। एक चौराहे के मानिंद मानता है समग्र शक्ति को, जहाँ कल्पित जिंदगी का नाम गुजर भर जाना है। शहर की भाषा में आधी आबादी एक गहरा तंज है, आदमी स्त्री को गहरे चिंतन में भी शक से […] Read more » मानसिक पतन
लेख साहित्य शिक्षक दिवस की महत्ता September 5, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी गुरु की महत्ता बताने वाला दिवस:- शिक्षक विद्यार्थियो के जीवन के वास्तविक कुम्हार होते हैं जो न सिर्फ हमारे जीवन को आकार देते हैं बल्कि हमें इस काबिल बनाते हैं कि हम पूरी दुनिया में अंधकार होने के बाद भी प्रकाश की तरह जलते रहें। इस वजह से हमारा राष्ट्र ढ़ेर सारे […] Read more » Featured Im[ortance of TEACHERS DAY शिक्षक दिवस शिक्षक दिवस की महत्ता
आलोचना राजनीति यूपी बीजेपीः एक अदद ‘मोदी’ की अधूरी तलाश September 3, 2016 by संजय सक्सेना | Leave a Comment संजय सक्सेना भारतीय राजनीति का दुर्भाग्य है कि यहां विरोधी दलों के नेताओं की किसी भी बात और सुझाव को तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाता हैं,जब तक की सत्तारूढ़ दल को इस बात का अहसास नहीं हो जाता है कि उसके विरोधी उसे किसी तरह का नुकसान पहंचा सकते हैं। वहीं विरोधी दलों […] Read more » Featured यूपी बीजेपी
लेख साहित्य राजनीति का हिन्दूकरण’ और सावरकर, भाग-2 September 3, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment सावरकर जी के हिंदू राष्ट्र में ‘राजनीति का हिंदूकरण’ हो जाने पर कुछ ये बातें स्वाभाविक रूप से देखने को मिलतीं :- हिंदी को प्राथमिकता दी जाती :- सावरकर जी मूलरूप से मराठी भाषा को बोलने वाले थे। पर उनका अपना चिंतन अत्यंत राष्ट्रवादी और पवित्र था। मराठी भाषी होकर भी वह हिंदी के अनन्यतम […] Read more » Featured राजनीति का हिंदूकरण सावरकर हिंदूनिष्ठ राजनीति
पर्यावरण लेख साहित्य एक चिट्ठी, धर्माचार्यों के नाम September 1, 2016 by अरुण तिवारी | Leave a Comment संदर्भ: मूर्ति विसर्जन पर प्रधानमंत्री जी के मन की बात आदरणीय आचार्यवर, आम धारणा है कि मुख्य रूप से उद्योग, सीवेज और शहरी ठोस कचरा मिलकर हमारी नदियों को प्रदूषित करते हैं। इसीलिए प्रदूषण के दूसरों स्त्रोत, कभी किसी बङे प्रदूषण विरोधी आंदोलन का निशाना नहीं बने। समाज ने खेती में प्रयोग होने वाले रासायनिक […] Read more » Featured प्रधानमंत्री जी के मन की बात मूर्ति विसर्जन