कविता वरूण ने बिछाया श्वेत जाल April 2, 2017 by डॉ. मधुसूदन | 7 Comments on वरूण ने बिछाया श्वेत जाल डॉ. मधुसूदन बाहर था हिमपात निरंतर, उदास मन,बैठा था घरपर, पढी आप की काव्य पंक्तियाँ। उडा ले गयींं कहीं पंखों पर। अचरज अचरज अपलक अपलक पल में हिम भी रुई बन गया। और रुई का फूल हो गया। श्वेत पँखुडियाँ होती झर-झर॥ अब,श्वेत पँखुडियाँ झरती बाहर। शीतकाल,बसंत बन गया॥ “आ गया ऋतुराज बसन्त मधुऋतु लाई […] Read more » वरूण ने बिछाया श्वेत जाल
कविता साहित्य ऋतुराज बसन्त April 2, 2017 by शकुन्तला बहादुर | 4 Comments on ऋतुराज बसन्त शकुन्तला बहादुर आ गया ऋतुराज बसन्त। छा गया ऋतुराज बसन्त ।। * हरित घेंघरी पीत चुनरिया , पहिन प्रकृति ने ली अँगड़ाई नव- समृद्धि पा विनत हुए तरु, झूम उठी देखो अमराई । आज सुखद सुरभित सा क्यों ये मादक पवन बहा अति मन्द ।। आ गया …. * फूल उठी खेतों में सरसों महक […] Read more » ऋतुराज बसन्त
पुस्तक समीक्षा साहित्य ‘सेक्युलर्टाइटिस’- एक ऐसा उपन्यास, . जिसकी पूरी कहानी हो गई घटित March 30, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment धारा ३७० को आधार बना कर लिखे गये इस उपन्यास में धर्मनिरपेक्षता पर व्यापक विमर्श हुआ है और देश के तमाम धर्मनिरपेक्ष दलों की भिन्न-भिन्न धर्मनिरपेक्षी नीतियों-करतुतों को उजागर करते हुए उन्हें तरह-तरह की व्यंग्यात्मक संज्ञा देकर चूभनेवाले विशेषण प्रदान किये गये है । मसलन- कांगेस की जजिया, हजिया, सफेद, रंगीन, दुधारु, गोधरी, निर्माणकारी व तीन सौ सतरी धर्मनिरपेक्षता, तो जदयू के नीतीश की Read more » ‘सेक्युलर्टाइटिस
व्यंग्य सोशल मीडिया के रास्ते प्रसिद्धी के वैकल्पिक सौपान March 28, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment सिद्धी की इतनी सहज उपलब्धता ने कई लोगो को असहज बना दिया है । प्रसिद्ध लोग जब अपनी 1000-2000 लाइक वाली किसी पोस्ट पर किसी कमेंट का रिप्लाई करते है तो अपने शब्दों से ऐसा आभामंडल रचते है मानो कमेंट नहीं कर लाखो लोगो की सभा को संबोधित कर रहे हो। हालाँकि अपनी हर पोस्ट पर 1K/2K लाइक लेने वाले इन सेलिब्रिटीज के सारे पोस्ट्स चोरी "के" होते है। Read more » Featured प्रसिद्धी के वैकल्पिक सौपान
व्यंग्य साहित्य लेखक और सम्मान March 26, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment लेखक होना बड़ी ज़िम्मेदारी का काम होता है क्योंकि आपको जबान ना चलाकर अपनी कलम चलानी होती है। सामाजिक सरोकारों की गठरी कंधो पर उठाए ,ज़बान को लगाम देकर,कलम के घोड़े दौड़ना एक चुनौतीपूर्ण कार्यक्रम है जिसे उचित क्रम में फॉलो करना होता है। जिस तरह से भगवान केवल भाव के भूखे होते है उसी […] Read more » लेखक लेखक और सम्मान सम्मान
व्यंग्य साहित्य सही गलत की नौकरी ! March 26, 2017 by सुप्रिया सिंह | Leave a Comment राजनीति और चुनाव मे नेताओं की क्रियाकलाप की आलोचना करना गलत नही है या यूँ कहे कि बिल्कुल भी गलत नही है और तो और ये तो आपका अधिकार भी है लेकिन ये गलत तब गलत हो जाता है जब अधिकार – अधिकार चिल्लाकर अधिकार के शोर मे कृत्वयों को धूमिल करने का प्रयास किया जाता है । घर के बाहर सही जगह पर कचरा न फेंकने वाले गन्दगी के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते है , ट्रैफिक पर सिंग्लन तोड़ कर जाने वाले दुर्घटना का शिकार होने पर सड़को की आड़ लेकर सरकार को कोसते है । Read more » Featured सही गलत
व्यंग्य आहत होने की चाहत March 24, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment राजनीती, खेल, बॉलीवुड,धर्म या अन्य किसी भी क्षेत्र से जुडी कोई भी घटना हो या इन से जुड़े किसी भी सेलेब्रिटी या किसी व्यक्ति का कोई भी बयान हो वो रोज़ सोशल मीडिया की भट्टी में ईंधन रूपी कच्चे माल के रूप में झोंक दिया जाता है जो "ट्रेंड"की शक्ल में बाहर निकल कर लोगो को कोमल भावनाए आहत करने का अपना क़र्ज़ और फ़र्ज़ अदा करता है। Read more » wish to get hurted आहत आहत होने की चाहत
कविता साहित्य भगवा और हरा March 23, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment राष्ट्रीय ध्वज के शीर्ष में लगा, भगवा को आदर हमने दिया। विदेशी हमले से ही आकरके, हरा रंग यहां फहराती है ।। भारत का मूल स्वरूप चेतना, औ गरिमा को गिरा दिया। हरा को बढ़ाचढ़ा करके, सभ्यता संस्कार धुलवाती है ।।4।। Read more »
कविता साहित्य मोदी विश्व का नेता बन, योगी गुरु जगत कहायेगा।। March 23, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment यूपी में ना शासन था, सब हाथ पर हाथ धरे रहे। योगीजी के आते ही, सब द्रुत गति से बदल रहे।। वह वक्त एक दिन आयेगा, योगी मोदी बन जाएगा। मोदी विश्व का नेता बन, योगी गुरु जगत कहायेगा।। Read more » उत्तम प्रदेश मोदी विश्व का नेता योगी गुरु जगत
व्यंग्य कुछ दिन तो गुजारो ; गुजरात ( माडल ) में March 23, 2017 by जगमोहन ठाकन | Leave a Comment मित्रों , अब तो अमिताभ बच्चन का कहा मानकर कुछ दिन तो गुजारो गुजरात (माडल) में । हाँ , पर चीख चीख कर यू पी चुनाव में ई वी एम मशीन पर सवाल उठाने वाली मायावती जी की बात भी सुन लो, कहीं वहाँ भी गुजराती माडल का प्रयोग तो नहीं किया गया है । क्योकि गुजराती माडल देता है परीक्षा में 100 % सफलता की गारंटी Read more »
लेख साहित्य धर्म का सत्य —- विज्ञान का सत्य March 22, 2017 by गंगानन्द झा | Leave a Comment सबसे सुन्दर और गम्भीर अनुभूतियाँ, जिनका हम अनुभव कर सकते हैं, अध्यात्म की सिहरन है। यह विज्ञान की शक्ति है। — एलबर्ट आइंस्टिन भगवान और भूत तमाम मानव सभ्यताओं में प्रारम्भ से मौजूद रहे हैं। इनके जरिए आदमी अपनी प्रासंगिकता समझता रहा है। प्राचीन सभ्यताएँ जीवों के साथ नदी, पर्वत, तथा हवा जैसी निर्जीव वस्तुओं […] Read more » dharam and science religion and science धर्म का सत्य विज्ञान का सत्य
आलोचना साहित्य मोदी राज में कितनी बदली भारतीय रेल …!! March 22, 2017 / March 22, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment इस साल मार्च में होली के दौरान उत्तर प्रदेश जाने का अवसर मिला। संयोग से इसी दौरान प्रदेश में चुनावी बुखार चरम पर था।वाराणसी से इलाहाबाद जाने के लिए ट्रेन को करीब पांच घंटे इंतजार करना पड़ा। वाराणसी से ही खुलने वाली कामायिनी एक्सप्रेस इस सीमित दूरी की यात्रा में करीब घंटे भर विलंबित हो गई। वापसी में भी कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ। प्लेटफार्मों पर किसी ट्रेन की बार - बार उद्घोषणा हो रही थी, तो कुछ ट्रेनों के मामलों में उद्घोषणा कक्ष की अजीब खामोशी थी। Read more » कितनी बदली भारतीय रेल