कविता साहित्य चलो, दिवाली आज मनायें October 28, 2016 by बलवन्त | Leave a Comment चलो, दिवाली आज मनायें Read more » चलो दिवाली आज मनायें
व्यंग्य साहित्य किताब तो छप गई मगर …………. October 27, 2016 by बीनू भटनागर | Leave a Comment अब हमें कुछ किताबें अपने नज़दीकी रिश्तेदारों को भेजनी थीं, साहित्य जगत के उन वरिष्ठ लोगों को उपहार में भेजनी थीं जो हमें प्रोत्सहन देते रहे थे या फिर वो जिनके लेखन से हम प्रभावित थे, जिन्हे हमने किताबें भेजी उनमें से कुछ ने अतिरिक्त किताबों की मांग की तो हमने साफ़ कह दिया कि अतिरिक्त किताब तो उन्हे हमसे ख़रीदनी होगी।अब हमे ढेरों किताबें कोरियर से भेजनी थीं उपहार वाली भी और ख़रीद वाली भी। Read more » किताब तो छप गई मगर .............
खेल जगत मनोरंजन व्यंग्य यहाँ तो घर की मुर्गी दाल बराबर ही है ! October 27, 2016 by सुप्रिया सिंह | Leave a Comment स्थिति ऐसी लगती है जैसा कबड्डी के साथ घर की मुर्गी दाल बराबर जैसा व्यवहार हो रहा है । वर्ल्ड कप , वर्ल्ड कप होता है चाहे वे किसी भी खेल का क्यों न हो पर अपने यहाँ तो वर्ल्ड कप मतलब क्रिकेट वर्ल्ड कप और कुछ नही । ये बात समझी जा सकती है कि व्यक्ति की खेल भावना मे एकाएक बड़ा बदलाव सम्भव नही है और न ही कोई क्रिकेट प्रेमी एकाएक कबड्डी प्रेमी बनकर उसकी बारिकियों का विश्लेषण कर सकता है और एकाएक इतने बड़े बदलाव की उम्मीद न तो समाज हमसे करता और न ही उस खेल के खिलाड़ी , वे तो बम इस इतनी Read more »
लेख साहित्य अकबर की 411वीं पुण्यतिथि 27 अक्टूबर October 27, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment रियासतों के रूप में टुकड़ों टुकड़ों में टूटे हुए भारत को एक बनाने की बात हो, या हिन्दू मुस्लिम झगडे मिटाने को दीन ए इलाही चलाने की बात, सब मजहब की दीवारें तोड़कर हिन्दू लड़कियों को अपने साथ शादी करने का सम्मान देने की बात हो, या हिन्दुओं के पवित्र स्थानों पर जाकर सजदा करने की, हिन्दुओं पर से जजिया कर हटाने की बात हो या फिर हिन्दुओं को अपने दरबार में जगह देने की, Read more » अकबर
व्यंग्य साहित्य खान मियां का ‘हलाल -हलाला ‘ October 26, 2016 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment मुस्लिम देशों में ऐसी वहशीता का बहुत प्रचलन है ..... और सुविधा के अनुरूप ही सज़ा या मज़ा का चलन है। अफगानिस्तान में एक सैनिक ने एक गधे के साथ पशुगमन किया। उसे महज़ चार दिन कैद की सज़ा मिली और छूट गया। हमारे पडोसी देश 'पाक ' के पश्चिमी पंजाब ,खैबर ,पख्तूनवा ,बलोचिस्तान आदि में पशुगमन का आंम प्रचलन है ........ Read more » खान मियां का 'हलाल -हलाला '
व्यंग्य साहित्य अस्पताल में एक और आम हादसा October 25, 2016 by अशोक गौतम | Leave a Comment नहीं सर! वह तो बेचारी समान नागरिक संहिता के दौर में भी हरदम बस इसी बात से डरी रहती है कि दूसरे धर्म का होने के बाद भी जो भोलाराम ने सपने तक में उसे तीन बार तलाक तलाक तलाक कह दिया तो इस बुढ़ापे में कहां जाएगी? सोचती है तो उसके हाथ पांव फूल जाते हैं।हाय री रूह! गजब के मर्द हैं ये भी! सारी उम्र प्रेम. प्रेम करते. करते, कहते.कहते भी अपनी बीवी से प्रेम नहीं कर पाते पर सिर्फ तीन बार तलाक तलाक तलाक कहकर उसे तलाक जरूर दे देते हैं। कौन से धर्म की पोथी पढ़े हैं री ये मर्द? Read more » अस्पताल में एक और आम हादसा
व्यंग्य साहित्य कौन समझे पुरबिया पुत्रों की पीड़ा …..!! October 25, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment पूरबिए रोजी - रोटी की तलाश में चाहे अपनी जड़ों से हजारों किलोमीटर दूर या परदेश ही निकल जाएं। लेकिन पिता रहते बाबूजी ही हैं। बेटे से सदा नाराज। बेटा कालेज में पढ़ रहा है, पर बाबूजी को उसकी शादी की चिंता खाए जा रही है। शादी हो गई, तो नाराज ... कि इसे तो घर - परिवार की कोई चिंता ही नहीं। बेटा नौकरी की तलाश में कहीं दूर निकल जाए या घर पर रह कर ही कोई धंधा - कारोबार करे, तो भी शिकायत। मड़हे में बैठ कर बेटे की बुराई ही करेंगे कि भैया , एेसे थोड़े धंधा - गृहस्थी चलती है। परिवार की गाड़ी खींचने के लिए हमने कम पापड़ नहीं बेले। लेकिन आजकल के लौंडों को कौन समझाएं... वगैरह - वगैरह चिर - परिचित जुमले। Read more » पुरबिया पुत्रों की पीड़ा
कविता साहित्य परिवारवाद October 25, 2016 by बीनू भटनागर | Leave a Comment परिवारवाद Read more » परिवारवाद
लेख ऋषि दयानन्द के भक्तों की प्रशंसा और पौराणिक छात्र को फटकार और पुराणों की आलोचना October 25, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment आर्यजगत के विख्यात विद्वान और राष्ट्रपति से सम्मानित संस्कृत के विद्वान पं. युधिष्ठिर मीमांसक जी जिज्ञासु जी के साथ तिवारी जी से पढ़ने जाते थे। यह संस्मरण उन्होंने अपनी आत्म-कथा में दिया है। ऐसे अनेक प्रेरणाप्रद संस्मरण उनकी आत्म कथा में और भी हैं। Read more » ऋषि दयानन्द
कविता साहित्य वाँशुरी ऐसी बजाई मोहन ! October 24, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment वाँशुरी ऐसी बजाई मोहन, लूटि कें लै गए वे मेरौ मन; रह्यौ कोरौ सलौनौ सूने- पन, शून्य में झाँकतौ रह्यौ जोवन ! चेतना दैकें नचायौ जीवन, वेदना दैकें वेध्यौ आपन-पन; कलेवर क्वारे लखे कोमल-पन, कुहक भरि प्रकटे विपिन बृन्दावन ! मधुवन गागरी मेरी झटके, मोह की माधुरी तनिक फुरके; पुलक-पन दै गए पलक झपके, नियति […] Read more » वाँशुरी ऐसी बजाई मोहन !
कविता साहित्य ऊर्जा October 24, 2016 by बीनू भटनागर | Leave a Comment कुछ दिन के लिये, लेखनी कभी रुक सी जाती है। कोई कविता या कहानी, जब नहीं भीतर कसमसाती है, तब कोई बन्दिश पुरानी, याद आती है, कोई सुरीली तान मन में, गुनगुनाती है। कहीं से शब्द जुड़ते हैं, कहीं पर भाव मुड़ते हैं, कोई रचना तभी, काग़ज पर उतरके आती है। कोई पढ़े या न […] Read more » ऊर्जा
कला-संस्कृति प्रवक्ता न्यूज़ लेख साहित्य पंचामृत October 24, 2016 / October 24, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment आयुर्वेद की दृष्टि से चरणामृत स्वास्थ्य के लिए बहुत ही अच्छा माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार तांबे में अनेक रोगों को नष्ट करने की क्षमता होती है। यह पौरूष शक्ति को बढ़ाने में भी गुणकारी माना जाता है। तुलसी के रस से कई रोग दूर हो जाते हैं और इसका जल मस्तिष्क को शांति और निश्चिंतता प्रदान करता हैं। Read more » Featured पंचामृत