कला-संस्कृति लेख साहित्य अमृत कलश में भरे सोम रस का रहस्य October 23, 2016 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव श्रावकों, कलश में भरे इस अमृत को अगर आप अलौकिक पेय द्रव्य न मानकर चलें, तो आपको इस पदार्थ को समझने में ज्यादा आसानी होगी। हम सभी सुनते-पढ़ते चले आ रहे हैं कि वैदिक देवता सोमरस पीते थे। प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में इसे सोमलता नामक वनस्पति से बनाने का उल्लेख है। इसलिए सोमलता […] Read more » Featured अमृत कलश सोम रस सोम रस का रहस्य
व्यंग्य साहित्य सोशल मीडिया इंश्योरेंस : लिखने की आजादी October 22, 2016 by एम्.एम्.चंद्रा | Leave a Comment सोशल मीडिया पर बोलने से पहले न सोचने की जरूरत है न पढ़ने की. जब किसी के लिखे को पढ़ने की जरूरत ही नहीं तो सोचने की जरूरत किसे है. आज किसके पास इतना टाइम रखा है जो पहले सो बार सोचे. जितना समय सोचने में लगायेगे, उतने समय में तो सोशल मीडिया पर लिख देंगे. आज टाइम की कीमत, लिखने की कीमत है, सोचने की नहीं. सोचने का काम दूसरे लोग करे. समझदार व्यक्ति वही होता है जो लिख दे, रही बात लेने- देने की तो वह सोशल मीडिया इंश्योरेंस कंपनी कर ही देंगी. Read more » लिखने की आजादी सोशल मीडिया इंश्योरेंस
कविता साहित्य अब न चुप रह पाऊंगी October 19, 2016 by लक्ष्मी जायसवाल | Leave a Comment अब न चुप रह पाऊंगी Read more » अब न चुप रह पाऊंगी
लेख साहित्य नारी के बारे में तुलसीदास जी के विचार October 17, 2016 / October 17, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 14 Comments on नारी के बारे में तुलसीदास जी के विचार तमाम सीमाओं और अंतर्विरोधों के बावजूद तुलसी लोकमानस में रमे हुए कवि हैं। वे गृहस्थ-जीवन और आत्म निवेदन दोनों अनुभव क्षेत्रों के बड़े कवि हैं। तुलसी भक्ति के आवरण में समाज के बारे में सोचते हैं। इनकी साधना केवल धार्मिक उपदेश नहीं है वह लोक से जुड़ी हुई साधना है। Read more » गोस्वामी तुलसीदास तुलसीदास नारी के बारे में तुलसीदास जी के विचार
कविता साहित्य कुछ तो है हममें October 14, 2016 by लक्ष्मी जायसवाल | Leave a Comment कुछ तो है हममें जिससे यह दिल ही दिल में ख़ौफ़ खाते हैं। कुछ तो है हममें जिसे यह दुनिया वाले सदियों से झुठलाते हैं। Read more » कुछ तो है हममें
व्यंग्य बहिष्कारी तिरस्कारी व्यापारी October 14, 2016 by आरिफा एविस | 2 Comments on बहिष्कारी तिरस्कारी व्यापारी हिष्कार जनता को नहीं करना है. यह काम नेताओं का है क्योंकि वे लोग तो दिलो जान से स्वदेशी हैं. देखो न सदियों से अब तक सफेदपोश ही हैं. खादी पहन कर ही सारे समझौते विदेशी कम्पनियों से हो सकते हैं. बहिष्कार करना स्वदेशी होने की निशानी है लेकिन विदेशी कम्पनियों से नित नए समझौते करना और लुभावने ऑफर देकर अपने यहाँ स्थापित करना उससे बड़ा स्वदेशीपन है Read more » तिरस्कारी बहिष्कारी व्यापारी
लेख साहित्य कर्बला : हुसैन का भारत से दिल और दर्द का सम्बंध October 12, 2016 by शाहिद नकवी | Leave a Comment कर्बला पर गौर करने के बाद ये साफ हो जाता है कि मोहम्मद साहब ने जो इस्लाम दिया था वह ज़ुल्म और दहशतगर्दों का इस्लाम नहीं बल्कि अमन शांति और सब्र का इस्लाम है।आज के दौर मे फिर आतंकवात ने पंख फैला लिये हैं,इस्लाम की नई परिभाषा गढ़ कर बेगुनाहों का कत्ल किया जा रहा है।महिलाओं की आबरू लूटी जा रही है,लोगों को बेघर किया जा रहा है। Read more » Featured कर्बला भारत से दिल और दर्द का सम्बंध हुसैन
व्यंग्य साहित्य रामायण और मीडिया ट्रायल October 12, 2016 by दीपक शर्मा 'आज़ाद' | Leave a Comment मीटिंग समाप्त होने के अगले कुछ दिनों में लंका में जो हुआ उससे राम और लक्ष्मण एक बड़ी प्रोब्लम में फंस गये। पत्रकारों और मानवाधिकारवादियों ने गुस्सैल लक्ष्मण को अपने सवालों में जकड़ लिया। आम जनता के बीच अपनी न्यूज सेंस टैक्निक की बदौलत यह बात फैला दी कि लक्ष्मण के पास ब्रह्मास्त्र था जबकि मेधनाद निहत्था था। बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान ढ़ूंढ़ने वाले राम इस आधुनिक समस्या का समाधान ढूंढ़ने में असफल दिखाई दिये। Read more » मीडिया ट्रायल रामायण
कविता साहित्य आओ वैदिक दीप जलाएं October 11, 2016 by विमलेश बंसल 'आर्या' | Leave a Comment गोवर्धन, संरक्षण, पोषण, गौ की सेवा, गौ का पालन| गौ माता के प्राण बचाएं|| Read more » आओ वैदिक दीप जलाएं
कविता साहित्य रावण क्या बन पावोगे October 9, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment कीट मकोड़े पशु जानवर, भी बन पाना आसान नहीं। सब के अपने लक्ष्य होते हैं,सब कर पाना आसान नहीं।। चारो वेद का ज्ञाता था वह, वीणा संगीत में सानी नहीं। राजनीतिज्ञ था पराक्रमी , ज्ञानी सम उसके कोई नहीं।। Read more » रावण क्या बन पावोगे
व्यंग्य नेताओ का राज , फिर कैसे आएगा इंडिया का स्वराज October 7, 2016 by अमित शर्मा (CA) | 1 Comment on नेताओ का राज , फिर कैसे आएगा इंडिया का स्वराज वहीँ भूषण के ऑफिस में घुसकर कुछ लोगो ने जूतों से उनकी पिटाई कर दी थी। वैसे इन घटनाओ की निंदा की जानी चाहिए। मैंने भी इन घटनाओ की निंदा की थी , हालांकि मैं कड़ी निंदा नहीं कर पाया था ,क्योंकि निंदा करने से पहले मैंने मिठाई खा ली थी क्योंकि जैसे ही मैंनै इन घटनाओ के बारे में सुना, वैसे ही मेरे दिल में ख्याल आया, “कुछ मीठा हो जाए”। Read more » नेताओ का राज फिर कैसे आएगा इंडिया का स्वराज योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण
व्यंग्य व्यंग्य : केजरी भैया बोले October 5, 2016 by मनोहर पुरी | 1 Comment on व्यंग्य : केजरी भैया बोले पाकिस्तान के प्रधान मंत्री ने अपनी संजय रूपी आंख से देखा कि उनके हमसाये अरविन्द केजरी भैया बहुत ही मायूस एक कोने में पड़े हैं। हमेशा अखबारों में छाये रहने वाले उनके केजरी भैया मीडिया में सोलहवें पेज पर भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। Read more » Featured Kejriwal attack on surgical strike केजरी भैया बोले