कहानी वरदान March 22, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment दूसरे ही दिन आशा के पिताजी का फोन आया और फिर वे अपनी पत्नी के साथ हमारे घर आ गये। प्रारम्भिक बात के बाद उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति और विवाह का बजट साफ-साफ हमें बता दिया। उन्होंने कहा कि यदि इसके बाद भी आप हमारी बेटी लेंगे, तो यह उनके लिए बहुत खुशी की बात होगी। आपके घर की बहू बनना आशा के लिए सौभाग्य की बात है। हम तो सोचते थे कि वह नर्स है, तो अस्पताल के किसी कर्मचारी से ही उसका विवाह कर देंगे; पर वह इतने अच्छे और सम्पन्न परिवार में जाएगी, यह तो हमने कभी सोचा ही नहीं था। Read more » वरदान
लेख साहित्य यकीऩ मानिए, आपके शब्द आपको महान बना देंगे March 22, 2017 by शालिनी तिवारी | 1 Comment on यकीऩ मानिए, आपके शब्द आपको महान बना देंगे यकीनन् यह हमें मानना ही होगा कि हम सब कुछ विशेष कार्य के निमित्त जन्में हैं. जीवन को व्यसनों, कुविचारों और अन्धकार में बिताने से तो ठीक ही है कि अपने मनो-मस्तिष्क एवं शब्दों को पवित्र रखें. हाँ कुछ लोग आज यह जरूर बोलते हैं कि अब इमानदारी का जमाना नहीं रहा. वह शायद आज यह भूल चुके हैं कि दुनियाँ को चलाने वाला सर्वशक्तिमान पहले भी वही था और आज भी वही है. Read more » Featured शब्द शब्द आपको महान बना देंगे
लेख साहित्य विश्वकाव्य दिवस के अवसर पर हिन्दी के कवियों का स्मरण भी आवश्यक March 22, 2017 / March 22, 2017 by डाॅ. कृष्णगोपाल मिश्र | Leave a Comment सुयश मिश्र 21 मार्च विश्वकाव्य दिवस के अवसर पर हिन्दी के एक बड़े अखबार (दैनिक भास्कर) जो कि स्वयं को देश का सबसे विश्वसनीय और नंबर-1 अखबार’ घोषित करता है, ने ‘ये हैं दुनियाँ की अब तक की सर्वश्रेष्ठ रचनाएं’ शीर्षक से बड़ा समाचार प्रकाशित किया। इस समाचार में विलियमशेक्सपियर कृत ‘सानेट-18’, जानडन कृत डेथ, […] Read more » विश्वकाव्य दिवस
लेख साहित्य एक बार फिर … March 20, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on एक बार फिर … तुम्हारा वक्तव्य पढ़ कर (चूँकि स्त्रियाँ इस मार्ग पर आ गयी हैं इसलिये ब्रह्मचर्य चिरजीवी नहीं होगा और सद्धर्म केवल पाँच सौ वर्षों तक चलेगा.“)पहले तो मैं यह समझने का यत्न करती रही कि इसके लिये दोषी किसे मानें -स्त्रियों को, सद्धर्म में दीक्षित ब्रह्मचर्य निभानेवाले को , या मानव की स्वाभाविक वृत्तियाँ को ? Read more »
व्यंग्य नेता वही जो वोट दिलाये March 19, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment होली आते ही मौसम सुहावना हो जाता है। हर तरफ बसंती उल्लास। नाचते-गाते लोग। मस्ती करते पशु और चहचहाते पक्षी। स्वच्छ धरती और मुक्त आकाश। डालियों पर हंसते फूल और कलियां। शीतल और गुनगुनी हवा में अठखेलियां करती गेहूं की बालियां। ऐसा लगता है मानो अल्हड़ नवयौवनाएं एक दूसरे के गले में हाथ डाले पनघट […] Read more » नेता वही जो वोट दिलाये
व्यंग्य छेड़छाड़ : हमारा राष्ट्रीय स्वभाव March 19, 2017 by अमित शर्मा (CA) | 1 Comment on छेड़छाड़ : हमारा राष्ट्रीय स्वभाव हम छेड़छाड़ के परंपरागत तरीको से आगे बढ़ चुके है, साइबर फ्रॉड, क्रेडिट कार्ड क्लोनिंग, हैकिंग जैसे नए "हथियारो" ने छेड़छाड़ का "मेकओवर" कर दिया है। छेड़छाड़ के लिए हाई-टेक और डिजिटल साधनो का प्रयोग हो रहा है जिससे कम समय में अधिक परिणाम आ रहे है और हमने प्रति घंटा छेड़छाड़ करने के अपने पिछले औसत को काफी पीछे छोड़ दिया। तकनीक ने हर चीज़ को बदल कर रख दिया लेकिन तकनीक हर जगह अंगुली करने की हमारी आदत को नहीं बदल पाई, अंतर केवल इतना आया है कि अब हम हर जगह अंगुली, टच-स्क्रीन के माध्यम से करते है। Read more » छेड़छाड़ हमारा राष्ट्रीय स्वभाव
लेख साहित्य इतिहास के सुनहरे अक्षरों में लिखा है वीरांगना अवंतीबाई लोधी का नाम March 18, 2017 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment वीरांगना अवंतीबाई लोधी ने वीरांगना झाँसी की रानी की तरह ही अपने पति विक्रमादित्य के अस्वस्थ्य होने पर ऐसी दशा में राज्य कार्य संभाल कर अपनी सुयोग्यता का परिचय दिया और अंग्रेंजों की चूलें हिला कर रख दी। सन 1857 में जब देश में स्वतंत्रता संग्राम छिडा तो क्रान्तिकारियो का सन्देश रामगढ भी पहुंचा। रानी तो अंग्रेजो से पहले से ही जली भुनी बैठी थी। क्योकि उनका राज्य भी झाँसी की तरह कोर्ट कर लिया गया था। Read more » Featured वीरांगना अवंतीबाई वीरांगना अवंतीबाई लोधी
आलोचना साहित्य सच निकली सपा में चुनावी स्क्रिप्ट की बात, साथ दिखे अखिलेश-शिवपाल March 17, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment राजधानी लखनऊ में स्थित पार्टी मुख्यालय के सभागार में 104 दिन के बाद एसपी सुप्रीमो अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवापाल यादव एक साथ दिखे। बैठक में पार्टी के सभी नवनिर्वाचित 47 विधायक मौजूद थे। जसवंत नगर से समाजवादी पार्टी के विधायक शिवपाल यादव बैठक के दौरान खामोश ही रहे। Read more » अखिलेश-शिवपाल
कहानी साहित्य इतिहास से सीख (लघुकथा) March 16, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी महाभारत के कौरव तथा पाण्डवों के बीच हुए युद्ध तथा विवाद के बारे में एक पिता पुत्र के मध्य वार्तालाप हो रही थी। पिता बार बार श्रीकृष्ण की दूरदर्शिता की सराहना कर रहे थे और पुत्र बार बार तर्क देकर श्रीकृष्ण के नाटकीय चरित्र पर उंगली उठाकर आशंका व्यक्त कर रहा था। […] Read more » इतिहास से सीख
कविता आवा हो भइया होली मनाई March 14, 2017 / March 14, 2017 by शालिनी तिवारी | Leave a Comment अब तो गावन कै लड़िका भी पप्पू टीपू जानि गएन, 'यूपी को ये साथ पसन्द है' ऐह जुम्ला का वो नकार दहेन, Read more » आवा हो भइया होली मनाई
कविता साहित्य इन रंगन से अब का डरनो, अब तो आ गई होरी March 12, 2017 by अरुण तिवारी | Leave a Comment कुछ रंगन में भंग परी है, कुछ रंगन में हाला, कुछ रंगन में गोरी, कुछ रंग गड़बड़ झाला। वीरू-जय औ पप्पू-टीपू ले रंगन को प्याला, हाथी, झाडू़, सीटी, नारियल हर रंग शतरंज वाला। कौन रंग वोटर मन भावे, जो रंगरेज़, सोई जाने ईवीएम को तो कमीशन जाने, हम तो जाने रंग तिरंगो वाला। इन रंगन […] Read more » अब तो आ गई होरी इन रंगन से अब का डरनो
कहानी साहित्य आधुनिकता का गरुर March 8, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी पापा मुझे चोट लग गया खून आ रहा है। स्कूल के लिए निकलते एक बच्चे के मुख से ये शब्द निकला था। 5 साल के अपने बच्चे के मुँह से इतना सुनते ही लगभग 40 साल पूर्व साधारण सा दिखने वाले एक पापा सब कुछ छोड़ छाड़ कर बच्चे को गोदी में […] Read more » आधुनिकता